ऑपरेशन हाथी : सरकार कर रही कॉरिडोर मैपिंग से हाथियों की निगरानी की तैयारी

Sanjay Sharma | Jul 24, 2026, 23:19 IST
सरकार कर रही कॉरिडोर मैपिंग से हाथियों की निगरानी की तैयारी
मध्य प्रदेश सरकार ने मानव-हाथी संघर्ष रोकने के लिए हाथी गलियारों और हॉटस्पॉट क्षेत्रों को मैप करने का अध्ययन शुरू किया है। सर्वे के बाद अर्ली वार्निंग, फेंसिंग और रैपिड रिस्पॉन्स टीम से गांवों को सुरक्षित किया जाएगा।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • हाथी गलियारों और संघर्ष वाले हॉटस्पॉट की मैपिंग की जाएगी।
  • बुंदेलखंड, विंध्य और सीमावर्ती जिलों पर विशेष फोकस रहेगा।
  • सैटेलाइट डेटा, फील्ड सर्वे और फीडबैक से जानकारी जुटेगी।
  • अर्ली वार्निंग सिस्टम, सोलर फेंसिंग और रैपिड टीम तैनात होंगी।
  • संघर्ष आधा घटाना और हाथियों की सुरक्षा बढ़ाना लक्ष्य है।

सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

मध्य प्रदेश वन विभाग ने हाथियों और इंसानों के टकराव को कम करने के लिए पूरे प्रदेश में हाथी गलियारों और संघर्ष वाले क्षेत्रों का अध्ययन शुरू किया है। इसका उद्देश्य वैज्ञानिक डेटा के आधार पर स्थायी समाधान निकालना है। अध्ययन पूरा होने के बाद चिह्नित क्षेत्रों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे।



क्यों पड़ रही है सर्वे की जरूरत

पिछले कुछ सालों में झारखंड, छत्तीसगढ़ और बिहार से आए हाथियों के दल बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्र में फसलें रौंद रहे हैं। बस्तियों में घुसने से जानमाल का नुकसान भी हुआ है। बिना सही रास्तों और हॉटस्पॉट की जानकारी के इन घटनाओं को रोकना मुश्किल था। इसी कमी को दूर करने के लिए मैपिंग का काम शुरू किया गया।



कैसे होगी गलियारों की मैपिंग

वन विभाग सैटेलाइट इमेजरी, ड्रोन सर्वे और जमीन पर फील्ड टीम भेजकर हाथियों के पुराने और नए मार्गों को चिह्नित करेगा। साथ ही पिछले 5 सालों के संघर्ष के रिकॉर्ड और ग्रामीणों से बातचीत कर उन गांवों को रेड जोन में डाला जाएगा जहां घटनाएं सबसे ज्यादा हुई हैं।



हॉटस्पॉट में क्या होंगे इंतजाम

रिपोर्ट आने के बाद चिह्नित गांवों में सबसे पहले अर्ली वार्निंग सिस्टम लगेंगे। हाथी के करीब आने पर सायरन और SMS से सूचना मिलेगी। इसके अलावा संवेदनशील इलाकों में सोलर फेंसिंग, ट्रेंच और रैपिड रिस्पॉन्स टीम तैनात की जाएगी। पंचायत स्तर पर जागरूकता शिविर भी चलेंगे।



सरकार का दीर्घकालिक लक्ष्य

सरकार का उद्देश्य सिर्फ तात्कालिक राहत नहीं है। गलियारों को अतिक्रमण मुक्त कर सुरक्षित करना, जलस्रोत और चारा क्षेत्र विकसित करना और वैकल्पिक फसल को बढ़ावा देना भी प्लान में शामिल है। इससे हाथियों को जंगल में ही भोजन-पानी मिलेगा और वे गांव की ओर कम आएंगे।



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