हाथियों के गोबर से बन रहा एलीफेंट रेस्टोरेंट, एआई के जरिए हो रही निगरानी
Arun Tiwari | Jul 08, 2026, 14:25 IST
एलीफेंट रेस्टोरेंट 2026
छत्तीसगढ़ के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में वन्यजीव संरक्षण का अनोखा मॉडल अपनाया जा रहा है। AI तकनीक से हाथियों की निगरानी के साथ अब उनके गोबर से उगाए गए पौधों से एलीफेंट रेस्टोरेंट तैयार किए जा रहे हैं।
छत्तीसगढ़ का उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व (यूएसटीआर) वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में नया काम कर रहा है। यहां हाथियों की निगरानी के लिए एआई आधारित तकनीक अपनाई जा रही है।
वन विभाग ने "एलीफेंट रेस्टोरेंट" जैसी पहल शुरू की है, जिसका मक़सद वन्यजीवों के लिए प्राकृतिक भोजन उपलब्ध कराना और मानव-हाथी संघर्ष को कम करना है।
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में पिछले कई वर्षों से स्थानीय हाथी ट्रैकर जंगलों में घूम रहे 40 से अधिक जंगली हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखते हैं।
वे सीजी एलीफेंट ट्रैकिंग एंड अलर्ट ऐप के जरिए हाथियों की वास्तविक समय की लोकेशन वन विभाग तक पहुंचाते हैं, जिससे आसपास के गांवों को समय रहते चेतावनी दी जा सके और मानव-हाथी संघर्ष की घटनाओं में कमी लाई जा सके।
अब इन्हीं ट्रैकर्स को एक नई जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। वे हाथियों के पारंपरिक मार्गों पर मिले ताजे गोबर को एकत्र कर रहे हैं। चूंकि हाथी अनेक प्रकार के फल और वनस्पतियां खाते हैं, इसलिए उनके गोबर में मौजूद बीज अंकुरण के लिए तैयार अवस्था में होते हैं।
वन अधिकारियों ने पाया कि आम, कुम्ही और केरमेटा जैसे स्थानीय वृक्षों के पौधे हाथियों के गोबर से स्वाभाविक रूप से उग रहे हैं। इन पौधों को सावधानीपूर्वक निकालकर जंगल के उपयुक्त स्थानों पर रोपा जा रहा है, जहां भविष्य में हाथियों के लिए प्राकृतिक भोजन क्षेत्र विकसित किए जाएंगे। इन्हें "एलीफेंट रेस्टोरेंट" नाम दिया गया है।
यह पहल केवल हाथियों तक सीमित नहीं है। पिछले तीन महीनों से वनकर्मी और ट्रैकर हॉर्नबिल पक्षियों की पसंदीदा पीपल, बरगद, पाकड़, जंगली जामुन और केरमेटा के बीज भी एकत्र कर रहे हैं।
इन पौधों को विकसित कर जंगल के विभिन्न हिस्सों में लगाया जा रहा है ताकि हॉर्नबिल सहित अन्य फलाहारी पक्षियों और वन्यजीवों को पूरे वर्ष प्राकृतिक भोजन उपलब्ध हो सके।
वन विभाग के अनुसार यह पौधरोपण सामान्य अभियान की तरह नहीं है। एआई ऐप से प्राप्त हाथियों की आवाजाही के आंकड़ों और हॉर्नबिल ट्रैकर्स के फील्ड डेटा के आधार पर उन स्थानों का वैज्ञानिक चयन किया जा रहा है, जहां भोजन की सबसे अधिक आवश्यकता है।
इससे जंगलों का पुनर्जीवन अधिक प्रभावी और वन्यजीवों की जरूरतों के अनुरूप हो रहा है। इस पहल का एक प्रमुख उद्देश्य हाथियों को जंगल के भीतर पर्याप्त भोजन उपलब्ध कराना भी है।
जब जंगल में ही भोजन की उपलब्धता बढ़ेगी तो हाथियों के खेतों और गांवों की ओर जाने की संभावना कम होगी। इससे फसलों को होने वाले नुकसान और मानव-हाथी संघर्ष में स्वाभाविक कमी आने की उम्मीद है।
इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी है। जिन ग्रामीणों को कभी हाथियों की आवाजाही से परेशानी होती थी, वही आज हाथी ट्रैकर, बीज संग्राहक, जैव विविधता संरक्षक और आवास पुनर्स्थापना कार्यक्रम के सहयोगी बन गए हैं।
उनकी पारंपरिक वन संबंधी जानकारी और आधुनिक एआई तकनीक का यह मेल संरक्षण का एक सफल सामुदायिक मॉडल बनकर सामने आया है।
वन विशेषज्ञ हाथियों को "जंगल का माली" भी कहते हैं क्योंकि वे लंबी दूरी तक बीज फैलाकर नए जंगलों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में इसी प्राकृतिक प्रक्रिया का उपयोग करते हुए स्थानीय प्रजातियों के जंगलों को पुनर्जीवित करने, जैव विविधता बढ़ाने और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से मुकाबला करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं।
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वन विभाग ने "एलीफेंट रेस्टोरेंट" जैसी पहल शुरू की है, जिसका मक़सद वन्यजीवों के लिए प्राकृतिक भोजन उपलब्ध कराना और मानव-हाथी संघर्ष को कम करना है।
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में पिछले कई वर्षों से स्थानीय हाथी ट्रैकर जंगलों में घूम रहे 40 से अधिक जंगली हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखते हैं।
वे सीजी एलीफेंट ट्रैकिंग एंड अलर्ट ऐप के जरिए हाथियों की वास्तविक समय की लोकेशन वन विभाग तक पहुंचाते हैं, जिससे आसपास के गांवों को समय रहते चेतावनी दी जा सके और मानव-हाथी संघर्ष की घटनाओं में कमी लाई जा सके।
हाथी के गोबर से उगा रहे आम:
वन अधिकारियों ने पाया कि आम, कुम्ही और केरमेटा जैसे स्थानीय वृक्षों के पौधे हाथियों के गोबर से स्वाभाविक रूप से उग रहे हैं। इन पौधों को सावधानीपूर्वक निकालकर जंगल के उपयुक्त स्थानों पर रोपा जा रहा है, जहां भविष्य में हाथियों के लिए प्राकृतिक भोजन क्षेत्र विकसित किए जाएंगे। इन्हें "एलीफेंट रेस्टोरेंट" नाम दिया गया है।
पक्षियों के लिए भी भोजन:
इन पौधों को विकसित कर जंगल के विभिन्न हिस्सों में लगाया जा रहा है ताकि हॉर्नबिल सहित अन्य फलाहारी पक्षियों और वन्यजीवों को पूरे वर्ष प्राकृतिक भोजन उपलब्ध हो सके।
यह साधारण पौधरोपण नहीं:
इससे जंगलों का पुनर्जीवन अधिक प्रभावी और वन्यजीवों की जरूरतों के अनुरूप हो रहा है। इस पहल का एक प्रमुख उद्देश्य हाथियों को जंगल के भीतर पर्याप्त भोजन उपलब्ध कराना भी है।
जब जंगल में ही भोजन की उपलब्धता बढ़ेगी तो हाथियों के खेतों और गांवों की ओर जाने की संभावना कम होगी। इससे फसलों को होने वाले नुकसान और मानव-हाथी संघर्ष में स्वाभाविक कमी आने की उम्मीद है।
स्थानीय लोगों की भागीदारी:
उनकी पारंपरिक वन संबंधी जानकारी और आधुनिक एआई तकनीक का यह मेल संरक्षण का एक सफल सामुदायिक मॉडल बनकर सामने आया है।
वन विशेषज्ञ हाथियों को "जंगल का माली" भी कहते हैं क्योंकि वे लंबी दूरी तक बीज फैलाकर नए जंगलों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में इसी प्राकृतिक प्रक्रिया का उपयोग करते हुए स्थानीय प्रजातियों के जंगलों को पुनर्जीवित करने, जैव विविधता बढ़ाने और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से मुकाबला करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं।
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