लाड़ली बहनों को हर महीने 1500, पेंशनर्स को 1000 भी नहीं, 81 लाख EPFO पेंशनर्स की चौंकाने वाली हकीकत

Amresh Kushwaha | Oct 11, 2026, 10:04 IST
EPFO की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा।
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी ईपीएफओ के आंकड़ों ने पेंशन का एक कड़वा सच खोला है। इनके मुताबिक बड़ी संख्या में पेंशनर्स बहुत कम रकम पर जी रहे हैं। यह रकम कई मामलों में राज्य की लाड़ली बहना योजना से भी कम है। लाड़ली बहना योजना में हितग्राहियों को फिलहाल हर महीने 1500 रुपए दिए जा रहे हैं।
Data EPFO revealed harsh reality regarding pensions. shows large number pensioners living very meager amounts. many cases, sum even lower monthly payout under states Ladli Behna Yojana.

वहीं, आगे इसे बढ़ाकर 3000 रुपए करने की योजना बताई गई है। यही राशि तुलना का आधार बनी है। पर यह तुलना सिर्फ राशि की है। दोनों योजनाओं का स्वरूप अलग है।



देश में कितनों को कितनी पेंशन

ईपीएफओ के अनुसार देश में ईपीएस पेंशनर्स की कुल संख्या 81 लाख 47 हजार 820 है। ईपीएस का मतलब कर्मचारी पेंशन योजना (Employees Pension Scheme) है।



इनमें से 36 लाख 82 हजार 31 पेंशनर्स को हर महीने 1000 रुपए से भी कम मिलता है। यह कुल का 45.19 फीसदी है। वहीं, 12 लाख 33 हजार 285 पेंशनर्स को 1001 से 1500 रुपए मिलते हैं। यह 15.14 फीसदी है। दोनों को जोड़ दें, तो करीब 49 लाख पेंशनर्स बनते हैं। यानी करीब 60 फीसदी को 1500 रुपए से कम पेंशन मिलती है।



कुछ और श्रेणियां भी हैं-

1501 से 2000 रुपए पाने वाले करीब 9.19 लाख हैं। यह 11.28 फीसदी है।



2001 से 2500 रुपए पाने वाले करीब 9.57 लाख यानी 11.75 फीसदी हैं।



5000 रुपए से ज्यादा पेंशन सिर्फ 60 हजार 479 लोगों को मिलती है। यह कुल का 0.74 फीसदी है।



मध्य प्रदेश में कितनों को कितनी पेंशन

मध्य प्रदेश में कुल दो लाख 60 हजार 261 ईपीएस पेंशनर्स हैं। इनमें से एक लाख 17 हजार को 1000 रुपए से कम मिलता है। यह 44.9 फीसदी है। वहीं, 31 हजार 320 को 1001 से 1500 रुपए मिलते हैं। यह 12.03 फीसदी है।



यानी मध्य प्रदेश में भी करीब 57 फीसदी पेंशनर्स को 1500 रुपए से कम मिलता है। यह गणना ऊपर के दो आंकड़ों को जोड़कर निकाली गई है। 1501 से 2000 रुपए वाले 29 हजार 441 हैं, यानी 11.31 फीसदी। 5000 रुपए से ज्यादा वाले सिर्फ 3008 हैं, यानी 1.16 फीसदी।



यहां एक बात ध्यान देने की है। ये आंकड़े पेंशन पाने वाले खातों के हैं। पेंशनर के परिवार या अन्य आय का हिसाब इसमें नहीं है।



क्यों इतनी कम है पेंशन

पेंशन की राशि कर्मचारी की पेंशन योग्य सेवा और पेंशन योग्य वेतन से जुड़ी गणना पर निर्भर करती है। सामान्य पेंशन 58 साल की उम्र में मिलती है। पेंशन के लिए कम से कम 10 साल की पात्र सेवा जरूरी है।



इसी वजह से समान नौकरी अवधि वाले कर्मचारियों की पेंशन भी अलग हो सकती है। कम वेतन या कम सेवा वर्ष हों, तो पेंशन भी कम बनती है। जैसे इन्हीं आंकड़ों में करीब आधे कर्मचारियों को हजार रुपए महीना भी पेंशन नहीं मिल रही, यह रिपोर्ट कहती है। एक अलग हिस्से में इसकी वजह बताई गई है।



कोशियारी समिति की सिफारिश

ईपीएफ मामलों के जानकारों का कहना है कि कोशियारी समिति की सिफारिशों के आधार पर न्यूनतम पेंशन 3000 रुपए होनी चाहिए। साथ ही उस पर महंगाई भत्ता और मेडिकल सुविधा जैसी मांगें भी जुड़ी हैं। कर्मचारी संगठन लंबे समय से इसकी मांग उठा रहे हैं।



अभी एम्पलाइज पेंशन स्कीम में न्यूनतम पेंशन 1000 रुपए है। संसद में दिए गए जवाबों के मुताबिक यह न्यूनतम पेंशन सितंबर 2014 से बजट सहायता से दी जा रही है। यह पृष्ठभूमि सरकारी जवाबों से ली गई है।



यहां एक बात साफ रहे। संसद की कुछ चर्चाओं में कोशियारी समिति और अन्य समितियों की सिफारिश 7500 रुपए तक बताई गई है। 3000 रुपए लिखा है। इसलिए सटीक आंकड़ा समिति की रिपोर्ट से जांच लेना जरूरी है।



विशेषज्ञ की राय

रिटायर्ड जनरल मैनेजर, अपेक्स बैंक पीके परिहार के मुताबिक पेंशनर्स की स्थिति का आकलन सिर्फ इस आधार पर नहीं होना चाहिए कि उन्हें कितनी रकम मिल रही है। असल सवाल यह है कि उस रकम से कितनी जरूरतें पूरी हो सकती हैं।



उन्होंने कहा कि महंगाई बढ़ने के साथ 1000 रुपए की वास्तविक कीमत कम हुई है। रिटायरमेंट के बाद पेंशन ही नियमित आय का स्रोत होती है। इसलिए न्यूनतम पेंशन को महंगाई, दवाओं, राशन, बिजली और अन्य जरूरी खर्च से जोड़कर देखना चाहिए।



परिहार के मुताबिक पेंशन का मकसद न्यूनतम आर्थिक सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन देना है। यह राय उन्हीं की है। सरकार की ओर से आगे का रुख अभी साफ नहीं है।



अब आगे क्या होगा

रिपोर्ट के मुताबिक अभी न्यूनतम पेंशन बढ़ाने का कोई नया फैसला सामने नहीं आया है। कर्मचारी संगठन मांग उठा रहे हैं। लेकिन सरकार या ईपीएफओ की ओर से जवाब रिपोर्ट में नहीं है।



सरकारी जवाबों में पहले कहा गया है कि न्यूनतम पेंशन 1000 रुपए बजट सहायता से दी जा रही है। साथ ही पेंशन फंड की सीमाओं का जिक्र भी आया है। यानी बढ़ोतरी का फैसला फंड और नीति दोनों पर टिका है।



मान लीजिए न्यूनतम पेंशन 3000 रुपए हो जाए। तब लाखों परिवारों को राहत मिलेगी। पर इसका खर्च कितना होगा और कौन उठाएगा, यह सवाल बना रहेगा। इसलिए यह मुद्दा सिर्फ आंकड़ों का नहीं, नीति का भी है।



FAQs

  1. भारत में कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) के तहत कितने पेंशनर्स हैं और उनकी पेंशन की स्थिति क्या है?
    भारत में कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) के तहत कुल 81 लाख 47 हजार 820 पेंशनर्स हैं, जिनमें से लगभग 60 फीसदी पेंशनर्स को 1500 रुपए से कम की पेंशन मिलती है।
  2. मध्य प्रदेश में EPS पेंशनर्स की संख्या और पेंशन मिलने की स्थिति क्या है?
    मध्य प्रदेश में कुल 2 लाख 60 हजार 261 EPS पेंशनर्स हैं, जिनमें से लगभग 57 फीसदी को 1500 रुपए से कम की पेंशन मिलती है।
  3. EPS पेंशन की राशि कितनी होती है और इसे किस आधार पर निर्धारित किया जाता है?
    EPS पेंशन की राशि कर्मचारी की पेंशन योग्य सेवा और पेंशन योग्य वेतन पर आधारित होती है। सामान्यतः यह 58 वर्ष की आयु में मिलती है, और पेंशन के लिए कम से कम 10 साल की पात्र सेवा आवश्यक होती है।
Tags:
  • epfo
  • Employees Pension Scheme
  • कर्मचारी पेंशन योजना
  • ईपीएस पेंशनर्स
  • मध्य प्रदेश
  • लाड़ली बहना योजना
  • कर्मचारी की पेंशन योग्य सेवा
  • पेंशन योग्य वेतन
  • कोशियारी समिति
  • कर्मचारी संगठन