चप्पल से मारेंगे... एथेनॉल पर अफवाह फैलाई तो, गडकरी के समर्थन में किसान संघ का तीखा बयान

Amresh Kushwaha | Jul 19, 2026, 10:40 IST
एथेनॉल के विरोधियों पर भड़के किसान संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष
नितिन गडकरी के एथेनॉल बयान पर भारतीय किसान संघ खुलकर सामने आया है। अध्यक्ष के. साईं रेड्डी ने अफवाह फैलाने वालों को चप्पल मारने की बात कही। जानें एथेनॉल से जुड़े फायदे, गाड़ियों पर असर और सरकार का पूरा प्लान...

समझें क्या है पूरा मामला...

  • गडकरी के एथेनॉल बयान पर किसान संघ ने साथ दिया।
  • अध्यक्ष बोले, अफवाह फैलाने वालों को चप्पल मारेंगे।
  • एथेनॉल से गाड़ी खराब होने का कोई सबूत नहीं है।
  • पेट्रोल-डीजल को जीएसटी में लाने की मांग उठी।
  • कैलारस शुगर मिल किसानों को सौंपने की मांग भी हुई।

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के एथेनॉल संबंधी बयान को लेकर देश में बहस छिड़ी हुई है। अब इस मुद्दे पर भारतीय किसान संघ (बीकेएस) खुलकर सामने आ गया है। भोपाल में संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष के. साईं रेड्डी ने गडकरी का पूरा साथ दिया है।



चप्पल मारने की बात

रेड्डी ने कहा कि एथेनॉल के खिलाफ जानबूझकर गलत जानकारी फैलाई जा रही है। उन्होंने तीखे अंदाज में कहा कि अफवाह फैलाने वाले मिल जाएं तो उन्हें चप्पल से मारेंगे। रेड्डी के मुताबिक एथेनॉल का विरोध किसान और देश दोनों के हित के खिलाफ है। उनका कहना है कि एथेनॉल से किसानों की आय बढ़ती है। साथ ही विदेशी तेल पर देश की निर्भरता भी कम होती है।



पानी वाले दावे को बताया भ्रामक

एथेनॉल बनाने में हजारों लीटर पानी खर्च होने के दावे को रेड्डी ने पूरी तरह गलत बताया। उन्होंने कहा कि गन्ने का रस निकालने के लिए सिर्फ सीमित पानी मिलाया जाता है। फैक्ट्रियों में इस्तेमाल पानी को दोबारा रीसाइकिल भी किया जाता है। इसलिए ज्यादा पानी खपत की बात सिर्फ अफवाह है।



100 प्रतिशत एथेनॉल गाड़ियों की मांग

रेड्डी ने बताया कि एथेनॉल गन्ना, मक्का और चावल जैसी फसलों से तैयार होता है। इससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर दाम मिलता है। उन्होंने भविष्य में 100 प्रतिशत एथेनॉल से चलने वाली गाड़ियों को बढ़ावा देने की भी मांग रखी। उनका मानना है कि इससे किसानों को और फायदा होगा।



गाड़ी खराबी पर सफाई

एथेनॉल मिले पेट्रोल से गाड़ियों में खराबी आने के सवाल पर भी रेड्डी ने जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि देश में पिछले 5 साल से एथेनॉल मिला पेट्रोल इस्तेमाल हो रहा है। यदि किसी गाड़ी में तकनीकी दिक्कत आती है तो इसका समाधान कंपनियों को करना चाहिए। इसे एथेनॉल के खिलाफ प्रचार का आधार नहीं बनाना चाहिए।



पुरानी गाड़ियों में E20 फ्यूल से रबर पाइप और फ्यूल पाइप को सबसे ज्यादा खतरा रहता है। इनमें मौजूद रबर के छल्ले एथेनॉल के संपर्क में आने से गलने और कड़े होने लगते हैं। इससे पेट्रोल लीक होने का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि यह असर मुख्य रूप से पुराने वाहनों में देखने को मिलता है।



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जीएसटी में लाने की मांग

प्रेस कॉन्फ्रेंस में किसान संघ ने एक और बड़ी मांग रखी है। संगठन का कहना है कि पेट्रोल और डीजल को सभी जगह जीएसटी (Goods and Services Tax) के दायरे में लाना चाहिए। इससे देशभर में ईंधन की कीमतों में एकरूपता आएगी। आम लोगों को इससे सीधी राहत मिलेगी। साथ ही संगठन ने किसानों से आत्महत्या न करने और प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील भी की।



शुगर मिल पर भी उठाई मांग

किसान संघ के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री (सीएम) डॉ मोहन यादव से मुलाकात की। इस दौरान मुरैना की कैलारस शुगर मिल का मुद्दा उठाया गया। संगठन ने मांग की कि इस मिल को निजी हाथों में देने के बजाय सहकारी समिति के जरिए किसानों को सौंपा जाए। इसके लिए कलेक्टर की अध्यक्षता में एक समिति बनाने का सुझाव भी दिया गया। किसान संघ के मुताबिक मुख्यमंत्री ने इस प्रस्ताव पर सकारात्मक विचार करने का भरोसा दिया है।



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अब जानिए गडकरी ने क्या कहा

इस पूरे मुद्दे पर खुद केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि एथेनॉल से गाड़ियां खराब होने का कोई सबूत नहीं है। उनके मुताबिक वैकल्पिक ईंधन से देश का तेल आयात कम होगा। साथ ही प्रदूषण घटेगा और किसानों की आय बढ़ेगी।



गडकरी ने बताया कि किस ईंधन का इस्तेमाल होगा, इसका फैसला पेट्रोलियम मंत्रालय करता है। उन्होंने कहा कि वे पिछले 25 साल से किसानों के हित में वैकल्पिक ईंधन पर काम कर रहे हैं। देश हर साल 22 लाख करोड़ रुपए का पेट्रोलियम आयात करता है। दिल्ली के प्रदूषण का 40 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ परिवहन से आता है। एक इन्फोग्राफिक के मुताबिक गडकरी ने यह भी कहा कि एथेनॉल से मक्के का भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से ऊपर पहुंचा है। साथ ही इलेक्ट्रिक स्कूटर, कार, बस, ट्रक और हाइड्रोजन ट्रक जैसे कई प्रोजेक्ट पर भी काम चल रहा है।



एथेनॉल कैसे बनता है

एथेनॉल असल में एक तरह का बायो फ्यूल यानी जैव ईंधन है। यह गन्ना, मक्का और खेती के अन्य वेस्ट से तैयार किया जाता है। देश में इसे दो तरीकों से बनाया जाता है। फर्स्ट जनरेशन एथेनॉल गन्ने, चुकंदर, आलू और ज्वार के वेस्ट से बनता है। सेकेंड जनरेशन एथेनॉल चावल, गेहूं, भुट्टे और बांस के वेस्ट से तैयार होता है। सरकार अब थर्ड जनरेशन बायोफ्यूल पर भी फोकस कर रही है।



E20 से लेकर E100 तक

फिलहाल देश में ज्यादातर पेट्रोल पंपों पर E20 फ्यूल मिल रहा है। इसमें 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल मिलाया जाता है। दिल्ली और मुंबई में फ्लेक्स फ्यूल गाड़ियों के लिए 85 प्रतिशत तक एथेनॉल वाला ईंधन भी शुरू हो चुका है। सरकार ने लगभग शुद्ध एथेनॉल यानी E100 ईंधन के इस्तेमाल को भी औपचारिक मंजूरी दे दी है।



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देश को हो रहा बड़ा फायदा

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अमेरिका, ब्राजील और जापान जैसे देशों में भी एथेनॉल मिला पेट्रोल पहले से चल रहा है। भारत ने एथेनॉल मिलाने से अब तक 1.90 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की विदेशी मुद्रा बचाई है। इससे करीब तीन करोड़ 10 लाख टन कच्चे तेल का आयात कम हुआ है। किसानों को भी 1.60 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की अतिरिक्त कमाई हुई है। इसके अलावा एथेनॉल इस्तेमाल से करीब नौ करोड़ 30 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) उत्सर्जन भी कम हुआ है।



भारत ने बीते साल ही पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाने का लक्ष्य तय समय से पांच साल पहले हासिल कर लिया। एक अप्रैल से पूरे देश में E20 पेट्रोल की सप्लाई शुरू हो चुकी है। अब सरकार 2030 तक इसे बढ़ाकर 30 प्रतिशत करने के लक्ष्य पर काम कर रही है।



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FAQ

  1. क्या एथेनॉल मिला पेट्रोल गाड़ियों को नुकसान पहुंचाता है?
    केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के मुताबिक एथेनॉल से गाड़ियां खराब होने का कोई प्रमाण नहीं है। हालांकि पुरानी गाड़ियों में रबर पाइप और फ्यूल पाइप एथेनॉल के संपर्क में आने से कमजोर हो सकते हैं। इससे कुछ मामलों में पेट्रोल लीक होने का खतरा बढ़ सकता है।
  2. भारत में एथेनॉल किन चीजों से बनाया जाता है?
    भारत में एथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने, मक्का और चावल जैसी फसलों से बनाया जाता है। इसके अलावा चुकंदर, आलू, ज्वार, गेहूं और भुट्टे के वेस्ट से भी एथेनॉल तैयार किया जाता है। इसे फर्स्ट और सेकेंड जनरेशन एथेनॉल कहा जाता है।
  3. एथेनॉल मिलाने से देश को क्या फायदा हुआ है?
    सरकारी आंकड़ों के मुताबिक एथेनॉल मिलाने से भारत ने 1.90 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की विदेशी मुद्रा बचाई है। इससे कच्चे तेल का आयात भी काफी कम हुआ है। साथ ही किसानों को 1.60 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की अतिरिक्त आय हुई है और प्रदूषण भी घटा है।

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