महेंद्र गोयनका की कंपनी को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं, जारी रहेगा प्रतिबंध

Pawan Modiya | Aug 08, 2026, 23:18 IST
गोयनका सुप्रीम कोर्ट
जियोमिन इंडस्ट्रीज और यूरो प्रतीक के आयरन ओर विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने याचिका निपटा दी। हाईकोर्ट का प्रतिबंध जारी रहेगा, ट्रायल कोर्ट को 2 महीने में फैसला लेना होगा।

समझें क्या है पूरा मामला

  • जियोमिन और यूरो प्रतीक के आयरन ओर विवाद में सुप्रीम कोर्ट का आदेश आया है।
  • यूरो प्रतीक की याचिका निपटा दी गई, कोर्ट ने गुण-दोष पर राय नहीं दी।
  • मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का अंतरिम प्रतिबंध अभी भी लागू रहेगा।
  • ट्रायल कोर्ट को अब दो महीने में फैसला लेना होगा।
  • यूरो प्रतीक से जुड़े महेंद्र गोयनका पर पहले से ही गंभीर आरोप हैं।

जियोमिन इंडस्ट्रीज और यूरो प्रतीक इस्पात के बीच आयरन ओर विवाद है। बीते शुक्रवार यानी सात अगस्त इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का आदेश आया। यूरो प्रतीक कंपनी ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने अब यह याचिका निपटा दी है। कोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर कोई राय नहीं दी है। हाईकोर्ट का अंतरिम प्रतिबंध अभी भी लागू रहेगा। यह प्रतिबंध तब तक रहेगा जब तक ट्रायल कोर्ट अंतिम फैसला नहीं सुनाती। यूरो प्रतीक की प्रमुख शेयरधारिता रायपुर निवासी महेंद्र गोयनका के पास बताई जाती है। गोयनका पर पहले से ही कई गंभीर आरोप लगे हैं। हालांकि ये सभी आरोप अभी अदालत में साबित होना बाकी हैं।



जानिए क्या है पूरा विवाद

दरअसल, मेसर्स जियोमिन इंडस्ट्रीज ने जबलपुर की कमर्शियल कोर्ट में वाद दायर किया था। कंपनी का आरोप है कि अनुबंध का पालन नहीं हुआ। जियोमिन ने कंपनी से आयरन ओर खरीदने का अनुबंध किया था। यह मात्रा करीब 1 लाख 70 हजार टन थी। आरोप है कि अनुबंध के बाद आयरन ओर की सप्लाई नहीं हुई। इसी को लेकर जियोमिन ने कोर्ट में केस दायर किया था। यूरो प्रतीक इस्पात इंडिया के मौजूदा प्रमुख शेयरधारक रायपुर निवासी महेंद्र गोयनका हैं।



सुनवाई में क्या हुआ

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस पी एस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ बैठी। यह मामला 7 अगस्त को सुनवाई के लिए आया था। यूरो प्रतीक की तरफ से अधिवक्ता दिवाकर माहेश्वरी पेश हुए। जियोमिन की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता बलवीर सिंह ने पक्ष रखा। कोर्ट ने पाया कि पहले भी एक बार मध्यस्थता की कोशिश हुई थी। यह मध्यस्थता 19 सितंबर 2025 के आदेश से शुरू हुई थी। लेकिन दोनों पक्षों के बीच कोई समझौता नहीं हो पाया।



हाईकोर्ट का पुराना फैसला

यह पूरा विवाद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के एक पुराने फैसले से जुड़ा है। हाईकोर्ट ने 11 अगस्त 2025 को अपना फैसला सुनाया था। हाईकोर्ट ने मामला वापस ट्रायल कोर्ट को भेज दिया था। यह मामला आदेश 39 नियम 1 और 2 के आवेदन से जुड़ा है। यह सीपीसी (Code of Civil Procedure) का एक प्रावधान है। तब तक के लिए हाईकोर्ट ने एक अंतरिम व्यवस्था भी दी थी। इस व्यवस्था के तहत यूरो प्रतीक को आयरन ओर बेचने से रोका गया। यह आयरन ओर 3 अप्रैल 2023 के अनुबंध से जुड़ा हुआ है। इसकी मात्रा 1 लाख 70 हजार टन बताई गई है।



अब आगे क्या होगा

सुप्रीम कोर्ट ने अब ट्रायल कोर्ट को साफ निर्देश दिया है। ट्रायल कोर्ट को दो महीने के भीतर फैसला लेना होगा। यह समयसीमा 7 अगस्त से गिनी जाएगी। तब तक हाईकोर्ट का अंतरिम प्रतिबंध जारी रहेगा। कोर्ट ने साफ किया, मामले के गुण-दोष पर राय नहीं दी गई। ट्रायल कोर्ट अपने स्तर पर स्वतंत्र रूप से फैसला लेगी। दोनों पक्षों के सभी अधिकार और तर्क सुरक्षित रखे गए हैं। इस तरह सुप्रीम कोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया।



गोयनका पर और भी हैं आरोप

अब बात करते हैं यूरो प्रतीक की प्रमुख शेयरधारिता की। कंपनी से जुड़े दस्तावेजों में महेंद्र गोयनका का नाम आता रहा है। यूरो प्रतीक इस्पात इंडिया को लेकर पहले भी कई मामले सामने आए हैं। गोयनका के सहयोगी बताए जाने वाले तीन डायरेक्टरों पर भी आरोप हैं। इनमें हिमांशु श्रीवास्तव, सन्मति जैन और सुनील अग्रवाल शामिल हैं। इनके खिलाफ कटनी के कोतवाली और माधवनगर थाने में मामले दर्ज हैं। आरोप है कि जाली दस्तावेजों से कंपनियों पर अवैध नियंत्रण हासिल किया गया। तीनों डायरेक्टरों की अग्रिम जमानत सुप्रीम कोर्ट से भी खारिज हो चुकी है। इसके बावजूद तीनों करीब दो साल से फरार बताए जा रहे हैं।



कोलकाता में भी दर्ज है मामला

कोलकाता में भी गोयनका के खिलाफ मामला दर्ज बताया जाता है। वहां हजारों करोड़ रुपए की कथित वित्तीय अनियमितता का आरोप है। कंपनी के शेयर फर्जी तरीके से अपने नाम कराने का भी आरोप लगा है। कोलकाता पुलिस ने जुलाई में गोयनका को गिरफ्तार किया था। वे करीब दो साल से फरार बताए जा रहे थे। पुलिस ने उन्हें दो बार 14 दिन की रिमांड पर लिया। मामले की गहन जांच अभी जारी बताई जा रही है। ये सभी आरोप भी अभी जांच के दायरे में हैं।



जरूरी FAQ

सुप्रीम कोर्ट ने आयरन ओर विवाद में क्या आदेश दिया?



सुप्रीम कोर्ट ने यूरो प्रतीक की याचिका निपटा दी है और मामले के गुण-दोष पर कोई राय नहीं दी। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का अंतरिम प्रतिबंध तब तक जारी रहेगा जब तक ट्रायल कोर्ट अंतिम फैसला नहीं सुनाती।



यह पूरा विवाद किस बात को लेकर है?



यह विवाद 3 अप्रैल 2023 के एक अनुबंध से जुड़ा है, जिसमें 1 लाख 70 हजार टन आयरन ओर की बिक्री शामिल है। हाईकोर्ट ने इस पर अंतरिम प्रतिबंध लगाया था, जो अब भी जारी रहेगा।



यूरो प्रतीक से जुड़े महेंद्र गोयनका पर क्या आरोप हैं?



गोयनका पर फर्जी दस्तावेज और वित्तीय अनियमितता के गंभीर आरोप हैं। कटनी और कोलकाता में उनके खिलाफ अलग मामले दर्ज हैं। ये आरोप अभी अदालत में साबित होना बाकी हैं।



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