आबकारी एसी मंदाकिनी दीक्षित मामले में हाईकोर्ट डीबी की सिंगल बेंच आदेश पर सख्त टिप्पणी

Sanjay Gupta | Jul 17, 2026, 20:47 IST
आबकारी एसी मंदाकिनी दीक्षित
निलंबित आबकारी सहायक आयुक्त मंदाकिनी दीक्षित को हाईकोर्ट डबल बेंच से बड़ी राहत मिल गई है। सिंगल बेंच के आदेश पर रोक लगने के साथ ही CBI में दर्ज FIR और जांच को भी रद्द करने के आदेश हुए। साथ ही डीबी ने सिंगल बेंच के आदेश पर सख्त टिप्पणी की है।

Indore. इंदौर में रहने वाले शराब ठेकेदार ने देवास में शराब की दुकान ली थी। बाद में मकवाना ने सुसाइड कर लिया। इसके कुछ दिन बाद एक वीडियो आया जिसमें मंदाकिनी दीक्षित पर आरोप लगाए कि वह परेशान करती है और हर दुकान से डेढ़ लाख प्रति माह रिश्वत मांगती है। अभी तक 22 लाख ले चुकी है।



इस मामले के बाद दीक्षित को सस्पेंड कर दिया गया। वहीं मकवाना की मां संतोष बाई ने पुलिस जांच में ढिलाई के आरोप लगाकर याचिका दायर की। इसमें सिंगल बेंच ने सीबीआई को एफआईआर करने और जांच करने के आदेश दिए। सीबीआई जांच भी शुरु हो गई। दीक्षित इसके खिलाफ रिट अपील में गई। इसमें यह आदेश हुआ है।



सिंगल बेंच के आदेश पर यह टिप्पणी

जस्टिस संदीप भट्ट और जस्टिस जय कुमार पिल्लई की बेंच ने सिंगल बेंच के आदेश पर तीखी टिप्पणी की है। इसमें कहा गया कि सिंगल बेंच ने वर्तमान अपीलकर्ता के विरुद्ध शिकायत को प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) के रूप में दर्ज करने का सीधा निर्देश देकर गलती की है।



यह निर्देश दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 154 और 156 (या बीएनएसएस की धारा 194) के प्रावधानों के अनुरूप नहीं है। इसमें न्यायिक विवेक का उल्लंघन किया कया। विवादित आदेश में उच्च न्यायालय के विद्वान एकल न्यायाधीश द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया न्याय के उद्देश्यों को पूरा करने के बजाय अधिक अन्याय की ओर ले गई है।



सिंगल बेंच ने पक्षपातपूर्ण किया

आदेश में आगे लिखा कि विद्वान एकल न्यायाधीश द्वारा अपनाया गया मार्ग गलत सहानुभूति पर आधारित पक्षपातपूर्ण दृष्टिकोण को दर्शाता है। यह गलत सहानुभूति का मामला था या ऐसी कार्यप्रणाली थी जो कानूनी ढांचे के तहत नहीं थी। जैसा कि न्यायमूर्ति बेंजामिन एन. कार्डोजो ने प्रसिद्ध रूप से कहा है, न्यायिक प्रक्रिया कानून के स्थापित सिद्धांतों पर आधारित होनी चाहिए। लेकिन इस आदेश में किसी भी तर्कसंगत कानूनी सिद्धांत के आधार पर उचित नहीं ठहराया जा सकता है।



हाईकोर्ट ने यह दिए आदेश

इंदौर हाईकोर्ट ने आदेश में कहा कि इन तर्कों के आधार पर अपील मंजूर की जाती है और सिंगल बेंच के आदेश को निरस्त किया जाता है। सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर भी निरस्त की जाती है।



81130384-213


संतोष बाई कानून के तहत जा सकती है

मकवाना की मां को लेकर हाईकोर्ट ने माना कि उन्होंने पुलिस को पेनड्राइव दी और इसके पांच दिन बाद ही हाईकोर्ट में केस किया। इस दौरान पुलिस को इतना समय ही नहीं मिला कि वह जांच कर सके।



यदि उन्हें कोई शिकायत थी तो उच्च अधिकारियों से बात की जाना चाहिए थी। पक्षकार संतोष बाई बीएनएस प्रावधानों के तहत कानूनी रूप से कदम उठा सकती है। संबंधित प्राधिकारी या न्यायालय मामले की उचित जांच कर सकता है, साथ ही पेश सामग्री पर उसके गुण-दोष के आधार पर विचार कर सकता है और इस न्यायालय द्वारा की गई किसी भी टिप्पणी से प्रभावित हुए बिना स्वतंत्र निर्णय ले सकता है।



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