रतलाम में एसपी ऑफिस के बाहर धरने पर बैठे पूर्व मंत्री हिम्मत कोठारी, कानून व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल

Ramanand Tiwari | May 20, 2026, 17:39 IST
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रतलाम में भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह मंत्री हिम्मत कोठारी ने बुधवार को SP कार्यालय के बाहर धरना दिया। उन्होंने पुलिस निष्क्रियता और जमीन कब्जा विवाद पर सवाल उठाए।

मध्य प्रदेश में कानून व्यवस्था को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठाता रहा है। लेकिन अब सत्ता पक्ष के वरिष्ठ नेता ही अपनी सरकार की पुलिस व्यवस्था पर सवाल खड़े करते नजर आ रहे हैं। भाजपा के पूर्व गृहमंत्री हिम्मत कोठारी का रतलाम एसपी ऑफिस में धरने पर बैठना सिर्फ एक स्थानीय विवाद नहीं, बल्कि सिस्टम की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल बन गया है। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब पूर्व गृह मंत्री की बात थाने का टीआई नहीं सुन रहा, तो आम जनता की हालत क्या होगी?



अपनी ही सरकार में बेबस दिखे पूर्व मंत्री

पूर्व मंत्री हिम्मत कोठारी बुधवार को अचानक रतलाम एसपी ऑफिस पहुंच गए। यहां उन्होंने जमीन पर बैठकर धरना शुरू कर दिया। धरने की खबर मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। एसपी अमित कुमार खुद अपने कक्ष से बाहर आए और हिम्मत कोठारी को अंदर ले जाकर चर्चा की। पूरा मामला मीसाबंदी रहे बसंत पुरोहित की जमीन पर कथित कब्जे से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि शिकायत के बावजूद पुलिस कार्रवाई नहीं कर रही थी।



नेता की नहीं सुन रहे, तो जनता का क्या होगा?

हिम्मत कोठारी की नाराजगी सिर्फ एक जमीन विवाद तक सीमित नहीं दिखी। उन्होंने सीधे तौर पर पुलिस व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। पूर्व गृह मंत्री ने कहा कि उन्होंने पहले भी एसपी को पूरे मामले से अवगत कराया था। एसपी ने थाना प्रभारी को कार्रवाई के निर्देश भी दिए थे। लेकिन कई दिनों तक कोई कदम नहीं उठाया गया। यही वजह रही कि उन्हें विरोध में धरने पर बैठना पड़ा। राजनीतिक गलियारों में अब यह चर्चा तेज हो गई है कि यदि भाजपा के वरिष्ठ नेता को न्याय पाने के लिए धरना देना पड़ रहा है, तो आम आदमी किस हाल में होगा।



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मीसाबंदी के प्लॉट पर कब्जे का मामला

बताया जा रहा है कि मीसाबंदी रहे बसंत पुरोहित की प्रॉपर्टी पर जबरन कब्जे की शिकायत की गई थी। मामले में दीनदयाल नगर थाना पुलिस को कार्रवाई करनी थी। लेकिन शिकायत के बाद भी कार्रवाई लंबे समय तक अटकी रही। इसी देरी से नाराज होकर हिम्मत कोठारी सीधे एसपी ऑफिस पहुंच गए और जमीन पर बैठकर विरोध जताया।



एसपी की एंट्री के बाद दर्ज हुई एफआईआर

धरने और बढ़ते दबाव के बाद पुलिस प्रशासन हरकत में आया। रतलाम एसपी अमित कुमार ने 'द सूत्र' से चर्चा में कहा कि थाना प्रभारी को फटकार लगाई और मामले में कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद कब्जा करने के आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। एसपी ने यह भी बताया कि कार्रवाई में देरी को लेकर दीनदयाल नगर थाना प्रभारी को नोटिस जारी किया गया है।



जरूरत पड़ी तो पार्टी छोड़ दूंगा

हिम्मत कोठारी ने अपनी ही सरकार और जनप्रतिनिधियों को भी खुली नसीहत दे डाली। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है कि वे देखें जनता की सुनवाई हो रही है या नहीं। अगर ऐसा नहीं होगा तो प्रदेश में अराजकता फैल जाएगी। इतना ही नहीं, उन्होंने यहां तक कह दिया कि अगर जरूरत पड़ी तो वे पार्टी से इजाजत लेकर आमरण अनशन करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि यदि अनुमति नहीं मिली, तो जनता की लड़ाई लड़ने के लिए पार्टी छोड़ने तक का फैसला ले सकते हैं।



कानून व्यवस्था पर फिर खड़े हुए सवाल

रतलाम की यह घटना भाजपा सरकार के लिए राजनीतिक असहजता बढ़ाने वाली मानी जा रही है। एक तरफ सरकार प्रदेश में बेहतर कानून व्यवस्था के दावे करती है। वहीं दूसरी तरफ पूर्व गृह मंत्री का पुलिस प्रशासन के खिलाफ धरने पर बैठना कई सवाल खड़े कर रहा है। सबसे बड़ा सवाल है कि ऐसा क्या हुआ कि नेता को न्याय के लिए सड़क पर जाना पड़ा।



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कौन हैं हिम्मत कोठारी

हिम्मत कोठारी मध्य प्रदेश से भारतीय जनता पार्टी के नेता हैं। वे छह बार विधायक और राज्य के गृहमंत्री भी रह चुके हैं। वे पहली बार 1977 में रतलाम शहर से विधानसभा के लिए चुने गए थे। कोठारी साल 1990 से 1992 तक प्रदेश के तत्कालीन सीएम सुंदरलाल पटवा की सरकार में मध्य प्रदेश के गृहमंत्री रह चुके हैं। कोठारी ने गृह, लोक निर्माण और वन मंत्रालय संभाला। साथ ही वे मध्य प्रदेश राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।



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FAQ

  1. हिम्मत कोठारी ने रतलाम SP ऑफिस में धरना क्यों दिया?
    हिम्मत कोठारी ने अपने साथी की जमीन पर कब्जा विवाद और सुनवाई न होने पर धरना दिया।


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