सिलेबस, कंप्यूटर और एक्सपर्ट बिना साइबर सुरक्षा का सरकारी प्लान, कैसे होगा अमल ?
News in short
- नए सत्र से स्कूलों में साइबर सिक्योरिटी पढ़ाने का फरमान।
- हिंदी-अंग्रेजी, गणित पढ़ाने वाले शिक्षकों के हजारों पद खाली।
- 70 हजार से ज्यादा गेस्ट टीचर्स के सहारे चल रहा विभाग।
- साइबर सिक्योरिटी का सिलेबस नहीं, शिक्षकों को ट्रेनिंग नहीं।
- 60% सरकारी स्कूलों में कम्प्यूटर-इंटरनेट की सुविधा नहीं।
News in Detail
मध्यप्रदेश सरकार ने नए शैक्षणिक सत्र से स्कूली बच्चों को साइबर सिक्योरिटी पढ़ाने का फरमान जारी कर दिया है। दावा है कि बच्चों को ऑनलाइन फ्रॉड, डेटा चोरी और साइबर क्राइम से बचाने के लिए जागरूक किया जाएगा।
जमीनी हकीकत यह है कि सरकारी स्कूलों में हिंदी, अंग्रेजी, गणित पढ़ाने वाले शिक्षक तक नहीं हैं। शिक्षा विभाग 70 हजार से ज्यादा गेस्ट टीचर्स के सहारे चल रहा है। नए सत्र के लिए साइबर सिक्योरिटी का सिलेबस क्या होगा, इसका पता नहीं है।
असर की हालिया रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के 40% ही सरकारी स्कूलों में कम्प्यूटर लैब है। 60 फीसदी स्कूलों ने कम्प्यूटर नहीं देखे। उनमें पढ़ने वाले छात्र- छात्राओं को मोबाइल चलाने भी नहीं मिलता। ऐसे में सरकार और स्कूल शिक्षा विभाग की यह घोषणा मजाक न बन जाए, यह बड़ा सवाल है।
पढ़ाएगा कौन, जब शिक्षक ही नहीं ?
प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के हजारों पद खाली हैं। हिंदी, अंग्रेजी, विज्ञान, गणित जैसे कोर सब्जेक्ट के शिक्षक नहीं मिल रहे। स्थाई भर्ती सालों से अटकी है। विभाग 70 हजार से ज्यादा गेस्ट टीचर्स से काम चला रहा है।
अब साइबर सिक्योरिटी जैसे तकनीकी विषय के लिए प्रशिक्षित शिक्षक कहां से आएंगे? विभाग ने कोई रोडमैप नहीं बताया। शिक्षकों को साइबर सुरक्षा की ट्रेनिंग देने की कोई कार्ययोजना अभी तक सामने नहीं आई है।
सिलेबस का अता-पता नहीं
नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने वाला है। पर साइबर सिक्योरिटी किस क्लास में पढ़ाई जाएगी, कितने पीरियड होंगे, मूल्यांकन कैसे होगा? पाठ्यक्रम तैयार नहीं है। किताबें कब छपेंगी, स्कूलों तक कब पहुंचेंगी, कोई जानकारी नहीं।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि बिना होमवर्क के आदेश जारी कर दिया गया है। बाद में "उपलब्ध संसाधनों से पढ़ाएं" का सर्कुलर आ जाएगा।
संसाधन नहीं, आदेश लंबे- चौड़े
प्रदेश के 60% से ज्यादा सरकारी स्कूलों में कंप्यूटर लैब नहीं है। जहां लैब है वहां कंप्यूटर सालों से खराब पड़े हैं। इंटरनेट कनेक्शन 10% स्कूलों में भी नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की समस्या आम है।
बच्चों ने कंप्यूटर देखा तक नहीं है। ऐसे में पासवर्ड सुरक्षा, एथिकल हैकिंग, सोशल मीडिया सेफ्टी प्रैक्टिकल के बिना कैसे पढ़ाई जाएगी? सिर्फ थ्योरी से बच्चे साइबर क्राइम से नहीं बच पाएंगे।
पहले के प्रयोग भी फेल
यह पहला मौका नहीं है। इसके पहले कोडिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स पढ़ाने के आदेश आए थे। बिना शिक्षक, बिना ट्रेनिंग, बिना कंप्यूटर के ये प्रयोग फाइलों में सिमट गए।
जमीन पर कुछ नहीं हुआ, पर उपलब्धि जरूर दर्ज हो गई। अभिभावकों का कहना है कि पहले बुनियादी पढ़ाई तो सुधार लें। हिंदी-अंग्रेजी-गणित ढंग से पढ़ा दें, साइबर सिक्योरिटी बाद में पढ़ा लेना।
गेस्ट टीचर्स के भरोसे एडवांस शिक्षा
सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी का अंदाजा अतिथि शिक्षकों की संख्या से लगा सकते हैं। प्रदेश में 70 हजार गेस्ट टीचर्स हैं। जो 10 से 18 हजार मासिक मानदेय पर काम कर रहे हैं। ऐसे में साइबर सिक्योरिटी जैसे एडवांस कोर्स पढ़ाने वाला कहां से आएगा। क्या गेस्ट टीचर्स की तरह ही विभाग किसी अस्थायी व्यवस्था का सहारा लेने की तैयारी कर रहा है।
FAQ
- सरकारी स्कूलों में साइबर सिक्योरिटी कौन पढ़ाएगा?
यही सबसे बड़ा सवाल है। प्रदेश के स्कूलों में हिंदी, अंग्रेजी, गणित के हजारों पद खाली हैं। विभाग 70 हजार गेस्ट टीचर्स के भरोसे चल रहा है। साइबर सिक्योरिटी के लिए प्रशिक्षित शिक्षक नहीं हैं। शिक्षकों को ट्रेनिंग देने की कोई योजना भी सामने नहीं आई है।
ये खबर भी पढ़ें...
एमपी के सरकारी स्कूलों में मिलेगी फ्री NEET-JEE की ट्रेनिंग, 9वीं से ही शुरू होगा फाउंडेशन क्लास
शिक्षा की स्थिति बदतर, MP 15 साल में बंद हुए 49 हजार सरकारी स्कूल, क्या ऐसे बढ़ेगा एमपी?
एमपी सरकार फिर ले रही 1800 करोड़ का लोन, कुल कर्ज पहुंचा 4.14 लाख करोड़ के पार
1500 करोड़ का निवेश और विदेशी मशीनें भी फेल! एमपी के युवा ग्लोबल स्किल पार्क से मोड़ रहे मुंह