सरकारी कर्मचारियों के लिए नया नियम: 50% डिजिटल कोर्स नहीं किया तो APAR पर पड़ेगा असर
सरकारी कर्मचारियों के कामकाज और मूल्यांकन की व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब कर्मचारियों की वार्षिक परफॉर्मेंस रिपोर्ट (APAR) यानी सालाना कामकाज की समीक्षा में सिर्फ अधिकारी की टिप्पणी और नंबर ही शामिल नहीं होंगे, बल्कि कर्मचारी ने कौन-कौन सी डिजिटल ट्रेनिंग पूरी की है, यह जानकारी भी दर्ज होगी।
केंद्र सरकार ने कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने के लिए iGOT (Integrated Government Online Training) प्लेटफॉर्म को APAR सिस्टम से जोड़ दिया है। नई व्यवस्था रिपोर्टिंग वर्ष 2025-26 से लागू हो गई है। इसका असर वित्त वर्ष 2026-27 के APAR चक्र में दिखाई देगा।
इस बदलाव का मकसद सरकारी कर्मचारियों को नई तकनीक के साथ अपडेट करना है। सरकार चाहती है कि कर्मचारी डिजिटल तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और नई कार्यप्रणाली को समझें, ताकि सरकारी सेवाओं को बेहतर बनाया जा सके।
कर्मचारियों को AI और नई तकनीक की मिलेगी ट्रेनिंग
नई व्यवस्था के तहत कर्मचारियों के लिए डिजिटल ट्रेनिंग का सिलेबस भी बदला गया है। अब उन्हें सिर्फ सामान्य कामकाज से जुड़ी ट्रेनिंग नहीं मिलेगी, बल्कि आधुनिक तकनीक से जुड़े कोर्स भी करने होंगे।
इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI Training)
- जनरेटिव AI
- प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग
- साइबर सुरक्षा
- डेटा प्राइवेसी
- ड्रोन तकनीक
- इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT)
- ब्लॉकचेन तकनीक
इसके अलावा सोशल मीडिया पर गलत जानकारी फैलने से रोकने, डिजिटल सुरक्षा और सरकारी कामों में AI के इस्तेमाल की जानकारी भी कर्मचारियों को दी जाएगी।
सरकार का मानना है कि आने वाले समय में सरकारी सेवाओं में डिजिटल तकनीक की भूमिका और बढ़ेगी। ऐसे में कर्मचारियों को नई तकनीक की जानकारी होना जरूरी है।
सभी कर्मचारियों के लिए डिजिटल कोर्स जरूरी
नई व्यवस्था सिर्फ बड़े अधिकारियों तक सीमित नहीं होगी। इसके दायरे में केंद्र सरकार के सभी कर्मचारी और ऑल इंडिया सर्विसेज के अधिकारी भी आएंगे।
कर्मचारियों को हर साल तय किए गए डिजिटल कोर्स में से कम से कम 50 प्रतिशत कोर्स पूरे करने होंगे। अगर कर्मचारी तय ट्रेनिंग पूरी नहीं करता है तो इसका असर उसके APAR रिकॉर्ड में दिखाई दे सकता है।
APAR में कैसे दर्ज होगी ट्रेनिंग की जानकारी?
पहले कर्मचारी की वार्षिक रिपोर्ट में मुख्य रूप से उसके काम और अधिकारी की टिप्पणी दर्ज होती थी। अब इसमें यह भी देखा जाएगा कि कर्मचारी ने अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए कौन-कौन से कोर्स किए हैं।
कर्मचारी को अलग से कोई रिकॉर्ड जमा नहीं करना होगा। iGOT प्लेटफॉर्म पर पूरा किया गया कोर्स अपने आप रिकॉर्ड में दर्ज होगा और यही जानकारी (Annual Performance Appraisal Report) में दिखाई जाएगी।
क्या है कॉम्पिटेंसी पासबुक?
कॉम्पिटेंसी पासबुक एक डिजिटल रिकॉर्ड है, जिसमें कर्मचारी की ट्रेनिंग और उसकी हासिल की गई क्षमताओं की जानकारी दर्ज होगी।
इसमें यह पता चलेगा कि कर्मचारी ने कौन सा कोर्स पूरा किया है और उसने कौन सी नई स्किल हासिल की है।
इससे विभागों को कर्मचारियों की क्षमता और ट्रेनिंग की स्थिति समझने में आसानी होगी।
SPARROW सिस्टम से जुड़ेगा रिकॉर्ड
कर्मचारियों की परफॉर्मेंस रिपोर्ट तैयार करने के लिए इस्तेमाल होने वाले SPARROW (Smart Performance Appraisal Report Recording Online Window) सिस्टम में भी ट्रेनिंग की जानकारी जोड़ी जाएगी।
इससे अधिकारी आसानी से देख सकेंगे कि किस कर्मचारी ने जरूरी ट्रेनिंग पूरी कर ली है और किसकी ट्रेनिंग बाकी है।
मंत्रालयों को मिलेगा डिजिटल डेटा
नई व्यवस्था से मंत्रालयों और विभागों को कर्मचारियों (government employees) की क्षमता का डिजिटल रिकॉर्ड मिलेगा।
इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि किस कर्मचारी ने कौन सी नई तकनीक सीखी है और किन क्षेत्रों में अभी और ट्रेनिंग की जरूरत है।
ट्रेनिंग में फेल होने पर क्या होगा?
अगर कोई कर्मचारी किसी असेसमेंट में सफल नहीं हो पाता है तो उसे दोबारा प्रयास करने का मौका मिलेगा। कर्मचारी को अपनी क्षमता साबित करने के लिए आगे भी अवसर दिए जाएंगे।
हालांकि APAR में यह जानकारी दर्ज नहीं होगी कि कर्मचारी ने कितनी बार प्रयास किया। वहां सिर्फ यह दिखाई देगा कि कर्मचारी ने असेसमेंट पास किया है या नहीं।
प्रमोशन और पोस्टिंग पर कितना असर पड़ेगा?
फिलहाल सरकार ने यह साफ नहीं किया है कि इस डिजिटल ट्रेनिंग रिकॉर्ड का प्रमोशन, एम्पैनलमेंट या पोस्टिंग में कितना सीधा असर होगा।
लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में कर्मचारियों की क्षमता और डिजिटल स्किल को देखते हुए ऐसे रिकॉर्ड की भूमिका बढ़ सकती है।
क्यों किया गया बदलाव?
सरकारी कामकाज तेजी से डिजिटल हो रहा है। ऑनलाइन सेवाएं, डेटा आधारित फैसले और AI जैसी तकनीकें प्रशासन का हिस्सा बन रही हैं।
ऐसे में सरकार चाहती है कि कर्मचारी भी नई तकनीक के साथ कदम मिलाकर चलें। इसी उद्देश्य से ट्रेनिंग को अब कर्मचारियों के प्रदर्शन मूल्यांकन से जोड़ा गया है।
नई व्यवस्था से कर्मचारियों की डिजिटल क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ सरकारी सेवाओं को ज्यादा प्रभावी बनाने की कोशिश की जा रही है।
FAQ
- Q1. सरकारी कर्मचारियों की APAR व्यवस्था में क्या बदलाव हुआ है?
Ans: अब APAR में कर्मचारियों की डिजिटल ट्रेनिंग और कोर्स पूरा करने की जानकारी भी दर्ज होगी। - Q2. सरकारी कर्मचारियों को कितने डिजिटल कोर्स पूरे करने होंगे?
Ans: कर्मचारियों को तय डिजिटल कोर्स में से कम से कम 50% कोर्स पूरे करने होंगे। - Q3. iGOT प्लेटफॉर्म क्या है?
Ans: iGOT एक ऑनलाइन ट्रेनिंग प्लेटफॉर्म है, जहां सरकारी कर्मचारियों को नई तकनीक और कामकाज से जुड़ी ट्रेनिंग दी जाती है।
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Performance Report | iGOT कर्मयोगी