सिंधिया के ड्रीम प्रोजेक्ट में बड़ा हादसा : 200 फीट की स्लैब गिरी, गुणवत्ता पर गंभीर सवाल
ग्वालियर में बन रहे एलिवेटेड रोड प्रोजेक्ट में बड़ा हादसा सामने आया है। करीब 200 फीट लंबी सीमेंट स्लैब गिरने से एक मजदूर घायल हो गया। हैरानी की बात यह है कि कुछ दिन पहले ही केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने गुणवत्ता और समयसीमा के सख्त निर्देश दिए थे, फिर भी यह चूक कैसे हुई?
घटना क्या है: निर्माण के दौरान गिर गई भारी स्लैब
खेड़ापति इलाके में निर्माणाधीन एलिवेटेड रोड पर काम चल रहा था। इसी दौरान ऊपर रखी भारी-भरकम स्लैब अचानक नीचे आ गिरी। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। घायल मजदूर को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया। यह घटना सीधे तौर पर निर्माण प्रक्रिया की निगरानी और सुरक्षा मानकों पर सवाल खड़े करती है।
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सिंधिया के निर्देशों की अनदेखी?
करीब 10 दिन पहले ही सिंधिया ने प्रोजेक्ट का निरीक्षण किया था। उन्होंने साफ कहा था कि काम “गुणवत्तापूर्ण” और तय समयसीमा में पूरा होना चाहिए। लेकिन ताजा हादसा संकेत देता है कि जिम्मेदार इंजीनियरों और एजेंसियों ने इन निर्देशों को गंभीरता से नहीं लिया। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सिर्फ निरीक्षण और बयान देने तक ही सीमित रह गया पूरा सिस्टम?
1300 करोड़ का प्रोजेक्ट, लेकिन सुरक्षा पर समझौता?
यह एलिवेटेड रोड ग्वालियर का बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट है, जिसकी लागत करीब 1300 करोड़ रुपए बताई जा रही है। दावा है कि इससे शहर को ट्रैफिक जाम से राहत मिलेगी। लेकिन अगर निर्माण के दौरान ही ऐसी लापरवाही सामने आए, तो भविष्य की सुरक्षा पर भरोसा कैसे किया जाए?
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गुणवत्ता के दावों पर लगा ब्रेक
निरीक्षण के दौरान कहा गया था कि यह प्रोजेक्ट शहर को “नई दिशा” देगा और विकास की रफ्तार दिखाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को भी इस प्रोजेक्ट के लिए धन्यवाद दिया गया था। लेकिन अब वही प्रोजेक्ट हादसे की वजह से सवालों के घेरे में है।
गुणवत्ता सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई?
- 200 फीट लंबी सीमेंट स्लैब निर्माण के दौरान गिरी
- एक मजदूर घायल, अस्पताल में भर्ती
- 10 दिन पहले ही सिंधिया ने किया था निरीक्षण
- गुणवत्ता और समयसीमा के दिए थे सख्त निर्देश
- करीब 1300 करोड़ का ड्रीम प्रोजेक्ट
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निर्माण एजेंसियों और इंजीनियरों की भूमिका पर सवाल
इस हादसे ने साफ कर दिया है कि बड़े-बड़े प्रोजेक्ट्स में भी निगरानी और जवाबदेही कमजोर है। अगर समय रहते जिम्मेदारी तय नहीं की गई, तो ऐसे हादसे आगे और भी बड़े नुकसान का कारण बन सकते हैं।अब देखना होगा कि जांच सिर्फ औपचारिकता बनकर रह जाती है या वाकई दोषियों पर कार्रवाई होती है।
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