हाईकोर्ट ने आईएएस अशोक बर्णवाल समेत 4 अफसरों के खिलाफ जारी किया जमानती वारंट
शॉर्ट में समझें क्या है पूरा मामला...
- शीला त्रिपाठी ने पति की पेंशन न मिलने पर 2019 में कोर्ट में याचिका दायर की थी।
- हाईकोर्ट के नोटिस के बाद भी अफसर न पेश हुए, न जवाब दिया था।
- 95 वर्षीय डॉ. राजकुमार गुप्ता को एडिशनल पेंशन नहीं मिली थी।
- हाईकोर्ट ने 14 अगस्त 2024 को डॉ. गुप्ता के पक्ष में फैसला दिया था।
- आदेश नहीं माना गया तो अवमानना याचिका और वारंट जारी हुए हैं।
पेंशन न मिलने पर कोर्ट पहुंची विधवा
ग्वालियर हाईकोर्ट में इन दिनों दो ऐसे मामले सामने आए हैं जो सरकारी अफसरों की लापरवाही की दास्तान कहते हैं। एक मामला याची शीला त्रिपाठी का है। उनके पति का निधन हो चुका है। पति की फैमिली पेंशन और अन्य लाभ नहीं मिल रहे थे, इसलिए उन्होंने 2019 में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
कोर्ट ने 26 फरवरी और 5 मार्च 2019 को संबंधित अफसरों को नोटिस जारी किए थे। इसके बावजूद, न कोई अफसर पेश हुआ, न किसी ने जवाब भेजा। कोर्ट की इस अनदेखी पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है।
4 अधिकारी वारंट की जद में
हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव आईएएस अशोक बर्णवाल, कमिश्नर हेल्थ, सीएमएचओ ग्वालियर डॉ. सचिन श्रीवास्तव और जिला पेंशन अधिकारी को 10-10 हजार रुपए के जमानती वारंट से तलब किया है। इस मामले में अगली सुनवाई बुधवार को होगी।
95 साल के डॉक्टर को नहीं मिली पेंशन
दूसरा मामला और भी संवेदनशील है। जबलपुर के मेडिकल कॉलेज में एचओडी (HOD- Head of Department) के पद से रिटायर हुए डॉ. राजकुमार गुप्ता अब 95 साल के हो चुके हैं। वे मई 1991 में सेवानिवृत्त हुए थे। तीन दशक से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन उन्हें एडिशनल पेंशन यानी डियरनेस रिलीफ के साथ बकाया लाभ नहीं दिए गए हैं।
डॉ. गुप्ता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। कोर्ट ने 14 अगस्त 2024 को उनके पक्ष में फैसला सुनाया था। आदेश था कि उन्हें एडिशनल पेंशन दी जाए।
आदेश के बाद भी हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे अफसर
फैसला आने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग ने कोई कदम नहीं उठाया था। न पेंशन जारी की, न कोर्ट में जवाब पेश किया। इस पर डॉ. गुप्ता की तरफ से अवमानना याचिका दायर की गई थी।
कोर्ट ने फिर नोटिस दिया था। अपर मुख्य सचिव की ओर से इस बार भी कोई जवाब नहीं आया था। नतीजा यह रहा कि हाईकोर्ट ने अपर मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल को पांच हजार रुपए के जमानती वारंट से तलब किया है। इस मामले की अगली सुनवाई आज यानी 13 मई को तय है।
क्यों गंभीर है यह मामला?
यह सिर्फ पेंशन का मामला नहीं है। यह कोर्ट की अवमानना का मामला है। जब कोई अफसर कोर्ट के नोटिस या आदेश को नजरअंदाज करता है तो यह सीधे तौर पर न्यायपालिका की अवहेलना मानी जाती है।
शीला त्रिपाठी जैसी विधवाओं के लिए पेंशन जीवनयापन का एकमात्र जरिया होती है। साथ ही, 95 साल के डॉ. गुप्ता जैसे बुजुर्ग रिटायर्ड अफसर के लिए तो यह और भी बड़ी बात है। तीन दशक बाद भी उन्हें हक के लिए लड़ना पड़ रहा है।
ग्वालियर हाईकोर्ट ने इन दोनों मामलों में जो सख्त रुख अपनाया है वह बताता है कि न्यायपालिका बुजुर्गों और कमजोर वर्ग की सुनवाई के मामले में सख्त है। जमानती वारंट जारी होने के बाद अब इन अफसरों को कोर्ट के सामने पेश होना होगा।
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