अवैध खनन पर कोर्ट का बड़ा एक्शन, कलेक्टर करेंगे निगरानी, ड्रोन से होगा सर्वे
समझें क्या है पूरा मामला...
- अवैध खनन पर हाईकोर्ट सख्त, अफसर पद से हटाया।
- ग्वालियर में खनन माफिया पर कोर्ट का बड़ा एक्शन।
- सहायक खनिज अधिकारी को कोर्ट ने काम से रोका।
- कलेक्टर करेंगें अब खनन गतिविधियों की निगरानी।
- ड्रोन से होगी खनन क्षेत्र की पूरी वीडियोग्राफी।
ग्वालियर हाईकोर्ट ने अवैध खनन मामले में सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने सहायक खनिज अधिकारी घनश्याम यादव को काम से रोक दिया है। ग्वालियर कलेक्टर को अब खनन गतिविधियों की निगरानी सौंपी गई है। कोर्ट ने ड्रोन सर्वे से पूरे खनन क्षेत्र की वीडियोग्राफी कराने के आदेश दिए हैं। अगली सुनवाई 7 अगस्त को होगी।
हाईकोर्ट ने दिखाई सख्ती
उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ ने अवैध खनन मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। यह सुनवाई न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की युगलपीठ ने की। कोर्ट ने प्रशासन और खनिज विभाग के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सहायक खनिज अधिकारी पर गंभीर आरोपों को सही पाया। इसके बाद अधिकारी को तत्काल प्रभाव से काम से रोक दिया गया।
याचिका पर हुई सुनवाई
यह याचिका अकरम खान ने दायर की थी। सुनवाई के दौरान डबरा की एसडीएम जूही गर्ग ने अहम स्वीकारोक्ति की। उन्होंने हलफनामे में कहा कि अवैध परिवहन रोकना प्रशासन के लिए व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। इस बयान पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि प्रशासन की यह स्वीकारोक्ति जवाबदेही तय करने की मांग करती है।
कलेक्टर को सौंपी गई जिम्मेदारी
कोर्ट ने आदेश दिया कि अब ग्वालियर कलेक्टर खुद हलफनामा पेश करेंगी। खनन गतिविधियों की निगरानी भी अब कलेक्टर के स्तर पर होगी। एसडीएम को इस मामले की जिम्मेदारी से हटा दिया गया है। यह बदलाव प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए किया गया है।
अधिकारी पर लगे गंभीर आरोप
कोर्ट ने पाया कि सहायक खनिज अधिकारी ने मौके का सत्यापन नहीं किया। उन्होंने सिर्फ ई-खनिज पोर्टल के आंकड़ों का हवाला दिया। कोर्ट ने इसे न्यायालय को गुमराह करने की कोशिश माना।
कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रशासन और अधिकारी खनन माफिया के प्रति नरम रुख अपना रहे हैं। इसके बाद अधिकारी को पद से तत्काल हटा दिया गया। राज्य सरकार को ईमानदार अधिकारी की तैनाती के निर्देश भी दिए गए हैं।
खदानों के रिकॉर्ड जब्त करने का आदेश
कोर्ट ने कलेक्टर को एक घंटे के भीतर खनन कारोबारी अशोक सिंह यादव की तीनों खदानों के रिकॉर्ड जब्त करने का आदेश दिया। हालांकि जब अतिरिक्त कलेक्टर मौके पर पहुंचे तो वहां सीमित कागजात ही मिले। इससे रिकॉर्ड हटाए जाने की आशंका भी सामने आई है।
ड्रोन से होगी वीडियोग्राफी
कोर्ट ने पूरे खनन क्षेत्र की ड्रोन कैमरे से एरियल वीडियोग्राफी कराने का आदेश दिया है। इसकी वीडियो क्लिप हलफनामे के साथ कोर्ट में पेश करनी होगी। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि स्वीकृत क्षेत्र के बाहर कोई खनन न हो।
तीसरी खदान पर भी मंडराया खतरा
अशोक सिंह यादव की दो खदानों पर पहले ही रोक लगाई जा चुकी है। अब तीसरी खदान को भी बंद करने पर विचार हो रहा है। कोर्ट ने कारोबारी के वकील से इस पर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 7 अगस्त 2026 को तय की गई है।
पहले भी हो चुकी है कार्रवाई
इस मामले में पहले डबरा के तत्कालीन एसडीओ रूपेश रतन सिंघई को भी हाईकोर्ट फटकार लगा चुका है। कोर्ट ने उनकी रिपोर्ट को भ्रामक बताया था। इसके बाद उनके खिलाफ स्वत संज्ञान लिया गया था। हाल ही में उन्हें अवमानना का नोटिस भी जारी किया गया है।
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