ग्वालियर में NHAI सड़क सैंपल फेल, ठेकेदार के भुगतान से पहले हाईकोर्ट में सुनवाई
समझें क्या है पूरा मामला
- ग्वालियर की सड़कों की गुणवत्ता पर हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है।
- कोर्ट की निगरानी में कई सड़कों से सैंपल लिए गए हैं।
- जांच में कई सैंपल तय मानकों पर खरे नहीं उतरे।
- NHAI के ठेकेदार को 6 अक्टूबर को भुगतान होना है।
ग्वालियर में सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल बढ़ गए हैं। मामला हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच में चल रहा है। यह मामला WP 10680/2025 से जुड़ा है। कोर्ट ने सड़कों की जांच के लिए विशेष आयोग बनाया था। आयोग ने मौके पर पहुंचकर सड़क से सैंपल जुटाए। इन सैंपलों की अलग-अलग स्तर पर जांच कराई गई। कोर्ट रिकॉर्ड में अधिकांश सैंपल फेल बताए गए हैं।
जांच में बिटुमिन की मात्रा भी कम मिली
18 सितंबर की सुनवाई में आयोग ने रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट में कई सैंपल गुणवत्ता जांच में फेल मिले। कई सैंपलों में बिटुमिन की मात्रा कम पाई गई। कुछ सैंपल घनत्व और बाइंडर कंटेंट में भी फेल हुए। कुछ सैंपलों की ग्रेडिंग भी तय मानक पर नहीं थी। एक सैंपल में ओएमसी, एमडीडी और सीबीआर जांच फेल हुई। इससे सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल और बढ़े हैं।
NHAI के रिकॉर्ड पर भी उठे सवाल
कोर्ट में सड़क से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच हो रही है। आयोग ने एनएसवी सर्वे से जुड़े दस्तावेज मांगे थे। NHAI की ओर से जरूरी दस्तावेज देने की बात कही गई थी। 8 सितंबर की सुनवाई में यह बात कोर्ट रिकॉर्ड में दर्ज है। आयोग ने एनएसवी रिपोर्ट का पूरा डेटा भी मांगा था। इसमें जांच का तरीका और टेस्ट रिजल्ट भी शामिल थे। NHAI की ओर से दस्तावेज देने का भरोसा दिया गया था।
6 अक्टूबर का भुगतान बना अहम मुद्दा
अब इस मामले में भुगतान की तारीख अहम हो गई है। NHAI को ठेकेदार को 6 अक्टूबर को भुगतान करना है। सड़क सैंपलों की रिपोर्ट इस भुगतान से पहले सामने है। इसी वजह से 5 अक्टूबर को सुनवाई रखी गई है। कोर्ट उस दिन रिपोर्ट पर आगे विचार करेगा। जरूरत पड़ने पर भुगतान को लेकर भी आदेश आ सकता है। अंतिम फैसला कोर्ट की अगली सुनवाई में होगा।
भुगतान रुक सकता है
सैंपल फेल होने के बाद भुगतान पर सवाल उठना स्वाभाविक है। लेकिन अभी भुगतान रोकने का अंतिम आदेश सामने नहीं है। कोर्ट 5 अक्टूबर को मामले पर विचार करेगा। इसके बाद ही भुगतान को लेकर स्थिति साफ होगी।
PWD सड़क की जांच भी हुई
इस मामले में सिर्फ NHAI सड़क की जांच नहीं हुई। PWD की सड़क से भी सैंपल लिए गए हैं। 8 सितंबर को कोर्ट ने PWD सड़क से सैंपल लेने कहा था। सड़क AG ऑफिस से विक्की फैक्ट्री तक बताई गई थी। सैंपल लेने की तारीख 13 सितंबर तय हुई थी। चारों सड़कों की रिपोर्ट 17 सितंबर तक मांगी गई थी।
कोर्ट ने सड़क सुधार पर भी सवाल उठाए
सैंपल लेने के लिए सड़क में गड्ढे किए गए थे। इन गड्ढों को भरने की जिम्मेदारी नगर निगम की थी। 18 सितंबर को कोर्ट ने इस काम पर भी सवाल उठाया। कोर्ट के सामने नगर निगम की तस्वीरें पेश हुईं। इन तस्वीरों में मलबे से गड्ढे भरना दिखा। ऊपर से पतली बिटुमिन परत डालने की बात सामने आई। कोर्ट ने नगर निगम से इस पर जवाब मांगा।
100 से 150 मिलीमीटर गहराई का नियम
कोर्ट रिकॉर्ड में गड्ढे भरने की तकनीक भी दर्ज है। गड्ढे की गहराई 100 से 150 मिलीमीटर होनी चाहिए। गड्ढे से ढीली सामग्री पहले हटानी जरूरी है। इसके बाद तय सामग्री से गड्ढा भरना होता है। सामग्री को रोलर से अच्छी तरह दबाना भी जरूरी है। नगर निगम के अपने दस्तावेज में यह नियम दर्ज है।
रिपोर्ट में पुराने टेस्ट रिकॉर्ड पर भी सवाल
आयोग की रिपोर्ट में टेस्ट रिकॉर्ड से जुड़ी बातें सामने आईं। कुछ डीपीआर में सरकारी लैब की रिपोर्ट नहीं मिली। कई रिपोर्ट निजी लैब से मिलने की बात कही गई। कुछ रिपोर्ट में सैंपल की जगह भी नहीं लिखी थी। एक रिपोर्ट की तारीखों में भी अंतर पाया गया। इस मामले में मूल रिकॉर्ड भी मांगा गया है।
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