प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण में ज्ञान भारतम् ऐप से एमपी ने बनाया रिकॉर्ड
समझें क्या है पूरा मामला
- मध्य प्रदेश पांडुलिपि संरक्षण में देश में पहले स्थान पर पहुंचा।
- ज्ञान भारतम् ऐप से 34 लाख से ज्यादा पन्ने दर्ज हुए।
- 12 लाख से अधिक पांडुलिपियों का सत्यापन पूरा हुआ।
- भोपाल जिले से सबसे ज्यादा पंजीकरण दर्ज किए गए।
- कई दुर्लभ ऐतिहासिक ग्रंथ और अभिलेख सामने आए।
ज्ञान भारतम् ऐप में मध्य प्रदेश ने बनाया नया रिकॉर्ड
भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को सुरक्षित रखने की दिशा में मध्य प्रदेश ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। भारत सरकार की डिजिटल पहल ज्ञान भारतम् ऐप के तहत राज्य ने देश में पहला स्थान प्राप्त किया है। यह उपलब्धि दुर्लभ पांडुलिपियों के पंजीकरण और संरक्षण के आधार पर मिली है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार राज्य से अब तक 34 लाख 45 हजार 439 पांडुलिपि पन्नों का पंजीकरण किया जा चुका है। इनमें से 12 लाख 13 हजार 127 पांडुलिपियों का सत्यापन भी पूरा हो चुका है। बाकी पांडुलिपियों की जांच और प्रमाणीकरण चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है।यह अभियान केवल दस्तावेजों की गिनती तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य भारत की हजारों वर्ष पुरानी ज्ञान परंपरा को सुरक्षित रखना और उसे डिजिटल स्वरूप में भविष्य की पीढ़ियों तक पहुंचाना भी है।
भोपाल सबसे आगे, कई जिलों का अहम योगदान
राज्य के जिलों में भोपाल सबसे आगे रहा है। एक जुलाई तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार भोपाल से 24 लाख 26 हजार 172 पांडुलिपियों का पंजीकरण हुआ है। इसके बाद इंदौर से 3 लाख 99 हजार 477 पंजीकरण दर्ज किए गए। रीवा से 2 लाख 68 हजार 763 पांडुलिपियां दर्ज हुईं।बैतूल से 1 लाख 593 और छिंदवाड़ा से 77 हजार 94 पांडुलिपियों का पंजीकरण हुआ। पन्ना से 64 हजार 257 और सागर से 60 हजार 25 पंजीकरण दर्ज किए गए।
ग्वालियर, उज्जैन, रायसेन, मंदसौर और अनूपपुर सहित कई जिलों ने भी इस अभियान में उल्लेखनीय भागीदारी निभाई है। इसके अलावा नीमच, खंडवा, जबलपुर, सतना, नर्मदापुरम, गुना, विदिशा, धार, देवास, राजगढ़, कटनी, झाबुआ, बुरहानपुर और अन्य जिलों से भी बड़ी संख्या में पांडुलिपियों का पंजीकरण कराया गया। राज्य के लगभग सभी जिलों की भागीदारी बताती है कि प्राचीन दस्तावेजों के संरक्षण के प्रति लोगों की जागरूकता लगातार बढ़ रही है।
क्या है ज्ञान भारतम् ऐप
ज्ञान भारतम् ऐप भारत सरकार की एक डिजिटल पहल है। इसका उद्देश्य देशभर में मौजूद दुर्लभ पांडुलिपियों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना है।
इस अभियान के जरिए केवल पांडुलिपियों की जानकारी नहीं जुटाई जा रही है। उन्हें सुरक्षित रखने, उनका वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण करने और शोध के लिए उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
भारतीय पांडुलिपियां इतिहास, संस्कृति, विज्ञान, दर्शन, साहित्य और सामाजिक जीवन की अमूल्य धरोहर मानी जाती हैं। इनके संरक्षण से आने वाली पीढ़ियों को भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को समझने का अवसर मिलेगा।
आम लोग भी बन सकते हैं इस अभियान का हिस्सा
ज्ञान भारतम् ऐप केवल सरकारी पहल नहीं है। यह आम लोगों की भागीदारी पर भी आधारित है। यदि किसी व्यक्ति, परिवार, मंदिर, आश्रम, ट्रस्ट, पुस्तकालय या निजी संस्था के पास कोई दुर्लभ हस्तलिखित पांडुलिपि मौजूद है, तो उसकी जानकारी ऐप के माध्यम से साझा की जा सकती है।
ऐप में स्मार्ट सर्च की सुविधा भी दी गई है। उपयोगकर्ता शीर्षक, लेखक, भाषा, विषय और संग्रह स्थल के आधार पर पांडुलिपियों की जानकारी खोज सकते हैं। इससे शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और इतिहास में रुचि रखने वाले लोगों को काफी सुविधा मिलती है।
यदि किसी के पास कोई प्राचीन ग्रंथ है, तो वह उसके संरक्षण या डिजिटलीकरण के लिए भी आवेदन कर सकता है। इससे निजी संग्रहों में सुरक्षित दुर्लभ धरोहरों को भी संरक्षित करने का अवसर मिलता है।
शोध और शिक्षा को मिलेगा बड़ा लाभ
डिजिटल पंजीकरण के बाद इन पांडुलिपियों का उपयोग शोध, शिक्षा और सांस्कृतिक अध्ययन में अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा। पहले कई दुर्लभ ग्रंथ सीमित स्थानों तक ही उपलब्ध थे। अब उनके डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने से भविष्य में अधिक लोगों तक पहुंच आसान होगी।
विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे भारतीय इतिहास, साहित्य, आयुर्वेद, ज्योतिष, दर्शन और अन्य पारंपरिक ज्ञान विषयों पर नए शोध को भी गति मिलेगी।
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