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Impact Feature
Raipur. छत्तीसगढ़ का कबीरधाम जिला आने वाले समय में धार्मिक और पर्यटन मानचित्र पर बड़ी पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार ने यहां भोरमदेव कॉरिडोर बनाने की योजना पर काम शुरू कर दिया है। 146 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाला यह कॉरिडोर पूरे क्षेत्र की तस्वीर बदलने वाला प्रोजेक्ट है। इस परियोजना का भूमिपूजन नए साल के मौके पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत कर चुके हैं।
सरकार की योजना है कि भोरमदेव मंदिर परिसर को बड़े और व्यवस्थित धार्मिक-पर्यटन क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाए। इस कॉरिडोर के तहत भोरमदेव मंदिर को मड़वा महल, छेरकी महल, रामचुआ और सरोदा जलाशय से जोड़ा जाएगा। पूरा विकास स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के तहत किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिलें और पूरा क्षेत्र एक व्यवस्थित पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित हो।
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इस तरह होगा काम
भोरमदेव कॉरिडोर का विकास बनारस के काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर किया जाएगा। इस योजना के तहत मंदिर परिसर में 6 नए प्रवेश द्वार बनाए जाएंगे। इन प्रवेश द्वारों में नागद्वार, पार्क, संग्रहालय और अन्य प्रमुख स्थानों पर विशेष गेट बनाए जाएंगे। इसके साथ ही मंदिर परिसर की परिधि दीवारों को मजबूत और सुरक्षित बनाया जाएगा।
इस परियोजना में एक अत्याधुनिक और बड़ा संग्रहालय बनाने की भी योजना है। यह संग्रहालय क्षेत्र की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को दर्शाएगा। सरकार का मानना है कि इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर तैयार होंगे। खासतौर पर स्थानीय व्यापार, हस्तशिल्प और पर्यटन से जुड़े युवाओं को इसका सीधा फायदा मिलेगा।
कॉरिडोर के तहत क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित रखने पर खास ध्यान दिया जाएगा। मड़वा महल और छेरकी महल में नए प्रवेश द्वार और बाउंड्रीवॉल बनाए जाएंगे। इसके साथ ही पेयजल के लिए बोरवेल की व्यवस्था की जाएगी। परिसर में शेड, बिजली, ड्रेनेज और पौधरोपण का काम भी किया जाएगा।
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श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर फोकस
भोरमदेव मंदिर से मड़वा महल और छेरकी महल तक नई सड़क बनाई जाएगी। इससे श्रद्धालुओं की आवाजाही आसान होगी। इसके साथ ही आसपास के तालाबों की सफाई का काम भी किया जाएगा। रामचुआ और सरोदा बांध के विकास पर भी काम किया जाएगा। मंदिर परिसर में आधुनिक लाइटिंग और ऑडियो डिस्क्रिप्शन की सुविधा भी दी जाएगी, ताकि पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिल सके।
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पीएम का जताया आभार
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय कहते हैं, भोरमदेव कॉरिडोर परियोजना राज्य की प्राचीन धरोहर को नई ऊंचाई देने का बड़ा कदम है। भोरमदेव धाम में भगवान शिव की आराधना, प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक विरासत एक साथ दिखाई देती है। यह जगह धार्मिक आस्था और संस्कृति का मजबूत केंद्र है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस परियोजना का भूमिपूजन केंद्र सरकार की स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के तहत किया गया है। करीब 146 करोड़ रुपए की लागत से इस कॉरिडोर का विकास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भोरमदेव को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में यह अहम कदम है। उन्होंने इस पहल के लिए केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत का आभार भी जताया।
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यह है छत्तीसगढ़ का खजुराहो
मुख्यमंत्री साय भोरमदेव मंदिर के ऐतिहासिक महत्व पर कहते हैं कि घने जंगलों के बीच स्थित यह मंदिर छत्तीसगढ़ का खजुराहो कहा जाता है। यह मंदिर सिर्फ धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि हजारों साल की संस्कृति, स्थापत्य कला और आध्यात्मिक परंपरा का प्रतीक है।
यहां भगवान शिव की पूजा भोरमदेव के रूप में की जाती है। इस स्थान पर शैव परंपरा, लोक आस्था और आदिवासी संस्कृति एक साथ दिखाई देती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भोरमदेव मंदिर, मड़वा महल और छेरकी महल ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण हैं। मंदिर की दीवारों पर बनी शिल्पाकृतियां खजुराहो की कला से तुलना की जाती हैं। नागवंशी शासनकाल में बनी नागर शैली की वास्तुकला इस स्थान को खास बनाती है।
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