हंस ट्रैवल्स को झटका: ट्रैफिक पुलिस-कलेक्टर ने सीज की बस, रोड पर पार्क न करने का आदेश

Sanjay Gupta | May 13, 2026, 14:08 IST
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इंदौर के विवादित ट्रैवल्स हंस को एक बार फिर झटका लगा है। ट्रैवल्स संचालक अपनी बसें छुड़ाने के लिए हाईकोर्ट गए थे। इसमें बस छुड़ाने के लिए तो राहत मिली, लेकिन हाईकोर्ट ने साथ ही एक लाइन ऐसी लिखी की संचालक के होश उड़ गए।

इंदौर में रोड पर अवैध रूप से बसें खड़ी करने में हंस ट्रैवल्स की जमकर मनमानी चलती है। जिला प्रशासन कई बार इन बसों को जब्त करता है, लेकिन बाद में जुर्माना लगाकर इन्हें छोड़ देता है। ट्रैफिक की बिगड़ती हालत को देखते हुए प्रशासन ने अब इन बसों को छोड़ने का फैसला नहीं किया है।



इसके बाद हंस ट्रैवल्स की बसें जब्त की गईं और अब उन्हें नहीं छोड़ा गया। इस कार्रवाई के खिलाफ हंस ट्रैवल्स के मालिक अरुण गुप्ता ने हाईकोर्ट में केस दायर किया है। हाईकोर्ट में मामला अभी चल रहा है और अब इस पर जल्द फैसला आने वाला है।



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हाईकोर्ट में यह हुई बहस

जस्टिस सुबोध अभ्यंकर की बेंच में इस केस की सुनवाई हुई। इसमें हंस ट्रैवल्स ने मध्य प्रदेश सरकार, आरटीओ, फ्लाइंग स्क्वाड और इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा को पक्षकार बनाया था। इसमें ट्रैवल्स संचालक अरुण गुप्ता ने हाईकोर्ट में कहा कि प्रशासन द्वारा बस सीज करने की कार्रवाई अवैध है। इसके लिए उन पर कॉस्ट लगाई जानी चाहिए।



उनका कहना था कि ये कार्रवाई गलत थी और बसें बिना किसी वजह के जब्त की गईं। इस पर सरकार और प्रशासन ने जवाब दिया कि वे जुर्माना तो मानते हैं, लेकिन यह आदेश दिया जाए कि अब ट्रैवल्स को रोड पर बसें खड़ी करने की इजाजत नहीं होगी। न ही पार्किंग बनाने की अनुमति दी जाएगी।



हाईकोर्ट ने दिया सख्त आदेश

हाईकोर्ट ने सभी तर्क सुनने के बाद आदेश दिया कि ट्रैवल्स के मालिक से जुर्माना भरवाकर उनकी बसें छोड़ दी जाएं। कोर्ट ने ये भी कहा कि ट्रैवल्स संचालक को भविष्य में रोड पर बसें अवैध तरीके से खड़ी करने या पार्किंग न करने की इजाजत नहीं होगी। अगर ऐसा हुआ, तो प्रशासन को उनके खिलाफ उचित कार्रवाई करने का अधिकार होगा।



कमेटी ने भी बताई थी वजह

गौरतलब है कि हाईकोर्ट की डबल बेंच में ट्रैफिक से जुड़ी कई जनहित याचिकाएं चल रही हैं। हाल ही में हाईकोर्ट ने वकीलों की एक कमेटी बनाई थी, जिसकी रिपोर्ट भी सामने आई थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि खराब ट्रैफिक के लिए अवैध पार्किंग और रोड पर कब्जा भी एक बड़ी वजह है।



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