हरदा के IITian श्रेयांश बड़ोदिया ने 2.3 करोड़ का पैकेज छोड़ा, UPSC में पाई 194वीं रैंक
News In Short
- हरदा के रहने वाले श्रेयांश बड़ोदिया ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 में 194वीं रैंक हासिल की है।
- उन्होंने IIT मुंबई से 2018 में बीटेक किया और गुरुग्राम में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में काम किया।
- 2.3 करोड़ रुपए सालाना पैकेज की नौकरी छोड़कर उन्होंने अगस्त 2024 में UPSC की तैयारी शुरू की।
- मई 2025 में प्रीलिम्स, अगस्त 2025 में मेंस और जनवरी 2026 में इंटरव्यू पास करके वे IAS बने।
- भविष्य में वे शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में जमीनी काम करना चाहते हैं।
News In Detail
2.3 करोड़ की नौकरी, फिर भी मन नहीं भरा
श्रेयांश बड़ोदिया के पास वो सब था जो लोग सालों मेहनत करके पाना चाहते हैं। अच्छी कंपनी, मोटी तनख्वाह और एक सुकून भरी जिंदगी। लेकिन अंदर से एक बेचैनी थी जो चैन नहीं लेने देती थी। हरदा, मध्यप्रदेश के इस IITian ने आखिरकार वो फैसला किया जो बहुत कम लोग कर पाते हैं। उन्होंने 2.3 करोड़ रुपए सालाना का पैकेज छोड़ा और UPSC की राह चुनी। और UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 में 194वीं रैंक हासिल करके पूरे मध्यप्रदेश का नाम रोशन किया।
IIT मुंबई से पढ़ाई, फिर IT की राह
श्रेयांश ने 2018 में IIT मुंबई से बीटेक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद वे गुरुग्राम की एक कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर बन गए। करियर आगे बढ़ा और पैकेज भी। धीरे-धीरे उनकी सालाना तनख्वाह 2.3 करोड़ रुपए तक पहुंच गई। बाहर से देखने पर यह एक बेहद कामयाब जिंदगी थी। लेकिन श्रेयांश के मन में कुछ और ही चल रहा था।
दोस्तों ने जगाया कुछ नया सोचने का जज्बा
नौकरी के दौरान उनके कई दोस्त सिविल सर्विस में चले गए थे। उनसे बातें होती थीं तो लगता था कि यह काम बिल्कुल अलग है। यहां सिर्फ पैसा नहीं, बल्कि समाज से सीधा जुड़ाव है। यही सोच धीरे-धीरे श्रेयांश के मन में जड़ें जमाने लगी। और एक दिन उन्होंने तय किया कि वे भी यही रास्ता अपनाएंगे।
दो रास्तों के बीच उलझा मन
श्रेयांश बताते हैं कि जब नौकरी छोड़ने की सोची तो मन दो हिस्सों में बंट गया था। एक तरफ आरामदेह जिंदगी थी, दूसरी तरफ कुछ बेहतर करने का सपना था। उनके अपने शब्दों में, "मेरी हालत उस कहावत जैसी थी जिसमें इंसान दो रायों के बीच फंसा होता है।" एक आवाज कहती थी कि जो चल रहा है वो ठीक है। दूसरी आवाज कहती थी कि इससे मन नहीं भरेगा। आखिरकार उन्होंने दूसरी आवाज सुनी।
अगस्त 2024 में छोड़ी नौकरी
छह साल की नौकरी में कई बार UPSC की तैयारी का मन बनाया लेकिन हर बार कोई न कोई वजह आड़े आ जाती थी। फिर साल 2024 में उन्होंने खुद से पक्का वादा किया। परिवार को बताया और इस्तीफा दे दिया। अगस्त 2024 से वे मुंबई में रहकर पूरी तरह UPSC की तैयारी में जुट गए। कोई समझौता नहीं, सिर्फ पढ़ाई।
नौ महीने में पास की देश की सबसे कठिन परीक्षा
श्रेयांश ने मई 2025 में UPSC प्रीलिम्स दिया और पास हुए। अगस्त 2025 में मेंस परीक्षा दी। जनवरी 2026 में इंटरव्यू भी सफलतापूर्वक पूरा किया। करीब 9 महीने की तैयारी में उन्होंने UPSC को पहले ही प्रयास में पास कर लिया। यह वही परीक्षा है जिसे देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिना जाता है।
अब शिक्षा और सेहत के लिए काम करना है
श्रेयांश का सपना बिल्कुल साफ है। वे प्रशासनिक सेवा में जाकर शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में बदलाव लाना चाहते हैं। उनका कहना है कि कई सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है। प्राथमिक शिक्षा को मजबूत किए बिना समाज का भविष्य नहीं सुधरेगा। स्वास्थ्य के मामले में वे चाहते हैं कि लोगों को इलाज के लिए अपनी जेब से कम खर्च करना पड़े। उनकी नजर उन परिवारों पर है जो बीमारी में सब कुछ लुटा देते हैं।
परिवार का भरपूर साथ रहा
श्रेयांश का परिवार फिलहाल मुंबई में रहता है। उनके पिता जीडी बड़ोदिया नर्मदापुरम में जिला कोषालय अधिकारी रह चुके हैं। वे मेहर गढ़वाल समाज के अध्यक्ष भी रहे हैं। 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने विधायक पद के लिए चुनाव भी लड़ा था। परिणाम आने के बाद पूरा परिवार श्रेयांश के साथ मध्यप्रदेश लौटा। उन्होंने भोपाल में रिश्तेदारों से मुलाकात की और फिर अपने गृह जिले हरदा गए।
जब पीछे मुड़कर देखें, तो गर्व हो
श्रेयांश कहते हैं कि उनके लिए सफलता का मतलब सिर्फ रैंक नहीं है। वे चाहते हैं कि जब एक दिन पीछे मुड़कर अपनी जिंदगी देखें तो यह लगे कि हां, कुछ सच में किया। 2.3 करोड़ की नौकरी छोड़कर उन्होंने सिर्फ एक पद नहीं बदला, उन्होंने अपना मकसद बदला। और पहले ही कदम पर उन्हें वो मंजिल मिल गई जिसके लिए उन्होंने सब कुछ दांव पर लगाया था।
FAQ
- श्रेयांश बड़ोदिया ने UPSC 2025 में कौन सी रैंक हासिल की?
श्रेयांश बड़ोदिया ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 में 194वीं रैंक हासिल की। यह उनका पहला प्रयास था। उन्होंने मई 2025 में प्रीलिम्स, अगस्त 2025 में मेंस और जनवरी 2026 में इंटरव्यू पास किया। नौकरी छोड़ने से लेकर अंतिम नतीजे तक का सफर करीब 9 महीने का रहा। - श्रेयांश बड़ोदिया ने कितने पैकेज की नौकरी छोड़कर UPSC की तैयारी की?
श्रेयांश ने 2.3 करोड़ रुपए सालाना पैकेज वाली IT नौकरी छोड़ी। वे गुरुग्राम की एक कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे। IIT मुंबई से 2018 में बीटेक करने के बाद उन्होंने यह नौकरी शुरू की थी और करीब छह साल तक काम किया। अगस्त 2024 में इस्तीफा देकर उन्होंने UPSC की तैयारी शुरू की। - IAS बनकर श्रेयांश बड़ोदिया क्या काम करना चाहते हैं?
श्रेयांश बड़ोदिया शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करना चाहते हैं। वे सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करना और प्राथमिक शिक्षा को मजबूत बनाना चाहते हैं। इसके साथ ही वे चाहते हैं कि बीमारी के समय लोगों को अपनी जेब से कम खर्च करना पड़े। उनका मानना है कि यही वो काम है जिससे समाज में असली बदलाव आएगा।
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