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Photograph: (the sootr)
News in Short
- यूपीएससी 2025 में 301वीं रैंक पर दो अभ्यर्थियों ने किया दावा।
- गाजीपुर की डॉ. आकांक्षा सिंह ने अपनी रैंक पर स्पष्टता दी।
- बिहार की आकांक्षा सिंह ने भी 301वीं रैंक का दावा किया था।
- गाजीपुर वाली आकांक्षा ने कहा कि एडमिट कार्ड के बारकोड से सच्चाई सामने आएगी।
- यूपीएससी को इस विवाद की जांच करने और आधिकारिक स्पष्टीकरण देने की जरूरत है।
News in Detail
यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 के परिणाम ने एक अजीबोगरीब विवाद को जन्म दिया है। 301वीं रैंक पर दो महिला अभ्यर्थियों ने दावा किया है, जिनका नाम एक ही है - "आकांक्षा सिंह"। यह मामला अब तूल पकड़ चुका है और गाजीपुर की आकांक्षा सिंह का बयान इस विवाद में नया मोड़ लेकर आया है।
क्या है पूरा विवाद?
जब यूपीएससी के फाइनल रिजल्ट का ऐलान हुआ, तो एक ही रोल नंबर (0856794) पर दो महिला अभ्यर्थियों ने अपनी 301वीं रैंक पर दावा किया। बिहार की आकांक्षा सिंह के घर में खुशी का माहौल था। उन्होंने इंटरव्यू भी दिए और अपनी सफलता की कहानी साझा की। लेकिन यह मामला तब मोड़ लेता है जब गाजीपुर की डॉक्टर आकांक्षा सिंह ने दावा किया कि 301वीं रैंक उनकी है, न कि बिहार वाली आकांक्षा की।
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गाजीपुर वाली डॉ. आकांक्षा का बयान
गाजीपुर की डॉ. आकांक्षा सिंह, जो पेशे से गायनेकोलॉजिस्ट हैं, ने दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा, "मेरा नाम डॉ. आकांक्षा सिंह है और मैंने यूपीएससी 2025 में 301वीं रैंक हासिल की है। मैं गाजीपुर (यूपी) की रहने वाली हूं और एम्स पटना से मास्टर डिग्री प्राप्त की है। मुझे पता चला है कि कोई और भी इस रैंक पर दावा कर रहा है, लेकिन सच्चाई एडमिट कार्ड के बारकोड से साफ हो जाएगी। मैं सिर्फ यही चाहती हूं कि मेरी सफलता पर कोई सवाल न उठे।"
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एडमिट कार्ड का 'झोल'
जब दोनों अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड का मिलान किया गया, तो एक चौंकाने वाली बात सामने आई। गाजीपुर वाली आकांक्षा के एडमिट कार्ड पर न केवल रोल नंबर सही था, बल्कि उसका बारकोड भी सही था। वहीं, बिहार वाली आकांक्षा के एडमिट कार्ड पर रोल नंबर तो सही था, लेकिन बारकोड स्कैन करने पर अलग नंबर दिखा। इस असमंजस से साफ है कि कुछ गड़बड़ी जरूर हो सकती है। अब यूपीएससी की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।
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क्यों बढ़ा विवाद?
यह विवाद सिर्फ एक रोल नंबर और रैंक का नहीं है, बल्कि इसने यूपीएससी की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए हैं। दो महिलाएं एक ही रैंक के लिए दावा कर रही हैं, जो कि परीक्षा में कभी नहीं हुआ। ऐसे में यूपीएससी को इस मामले की गहराई से जांच करनी चाहिए और जो भी सही हो, उसे सामने लाना चाहिए।
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