मॉडल हर्षा रिछारिया अब कहलाएंगी स्वामी हर्षानंद गिरि : ग्लैमर की दुनिया छोड़ उज्जैन में लिया संन्यास

Sanjay Dhiman | Apr 19, 2026, 16:51 IST
Photograph: (the sootr)
मॉडल हर्षा रिछारिया ने अक्षय तृतीया के दिन उज्जैन में संन्यास लिया। अब वे स्वामी हर्षानंद गिरि के नाम से जानी जाएंगी। इस निर्णय के बाद उनका जीवन अब पूरी तरह से आध्यात्मिक सेवा में समर्पित रहेगा।

News in Short

  • मॉडल का संन्यास: इंस्टाग्राम स्टार हर्षा रिछारिया ने उज्जैन में दीक्षा लेकर संन्यास धारण किया।
  • नया नाम: संन्यास के बाद अब उन्हें 'स्वामी हर्षानंद गिरि' के नाम से जाना जाएगा।
  • पिछला जीवन त्यागा: उन्होंने खुद का पिंडदान और तर्पण कर सांसारिक जीवन को पूरी तरह छोड़ा।
  • अखाड़े से जुड़ाव: निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी सुमनानंद गिरि ने उन्हें पवित्र दीक्षा दी।
  • धर्म की राह: अब वे ग्लैमर छोड़कर सनातन संस्कृति और समाज सेवा के लिए काम करेंगी।

News in Detail

आज जहां हर कोई नेम और फेम के पीछे भागता है, वहां भोपाल की एक मशहूर मॉडल ने अपने निर्णय से सबको चौंका दिया है। इंस्टाग्राम पर जिनके लाखों चाहने वाले थे, उन्होंने अचानक भगवा चोला पहन लिया है। हम बात कर रहे हैं मशहूर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर, मॉडल हर्षा रिछारिया की।



हर्षा ने कुंभ नगरी उज्जैन में संन्यास धारण कर लिया है। अब वे ग्लैमर की दुनिया को छोड़कर अध्यात्म की राह पर चलेंगी। संन्यास के बाद उनका नाम अब स्वामी हर्षानंद गिरि महाराज हो गया है।



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अक्षय तृतीया पर स्वामी सुमनानंद गिरि ने दिलाई दीक्षा

अक्षय तृतीया का दिन हिंदू धर्म में बहुत शुभ माना जाता है। इसी पावन मौके पर उज्जैन के मौनी तीर्थ आश्रम में यह आयोजन हुआ। पंचायती निरंजनी अखाड़ा के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी सुमनानंद गिरि ने हर्षा को दीक्षा दी। संन्यास लेना कोई छोटा काम नहीं है, यह एक कठिन तपस्या है। हर्षा ने इसके लिए बाकायदा अपने पिछले जीवन का पूरी तरह त्याग किया। उन्होंने गुरु के सानिध्य में संन्यास की कठिन मर्यादाओं को निभाने का संकल्प लिया। अब उनका पूरा जीवन धर्म और समाज सेवा के लिए समर्पित रहेगा।



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खुद का पिंडदान कर पिछले जीवन से तोड़ा नाता

संन्यास की प्रक्रिया बहुत ही भावुक और गहराई से भरी होती है। परंपरा के अनुसार, हर्षा ने खुद का तर्पण और पिंडदान भी किया। सनातन धर्म में संन्यास लेने का मतलब है कि पुराना व्यक्ति मर गया। अब एक नए आध्यात्मिक शरीर का जन्म हुआ है जिसे सन्यासी कहते हैं। उन्होंने अपनी शिखा और दंड त्याग की विधि को पूरा किया है। यह सब कर्मकांड इसलिए किए गए ताकि पुराना रिश्ता खत्म हो सके। अब वे अपने परिवार और पुराने रसूख से पूरी तरह मुक्त हो चुकी हैं।



झांसी से भोपाल और फिर उज्जैन तक का सफर

हर्षा रिछारिया का परिवार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के झांसी का है। उनके पिता दिनेश रिछारिया एक साधारण रोडवेज बस में कंडक्टर रहे हैं। उनकी मां किरण रिछारिया एक छोटा सा बुटीक चलाती हैं। उनका भाई कपिल एक कंपनी में प्राइवेट नौकरी करता है। पूरा परिवार लंबे समय से मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में रहता है। हर्षा ने अहमदाबाद से योग में स्पेशल कोर्स भी कर रखा है। वे ग्रेजुएट हैं और शुरू से ही काफी प्रतिभाशाली और एक्टिव रही हैं।



लाखों फॉलोअर्स को छोड़कर क्यों चुनी वैराग्य की डगर?

सोशल मीडिया पर हर्षा की लोकप्रियता किसी बॉलीवुड स्टार से कम नहीं थी। इंस्टाग्राम पर उनके 18 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स आज भी मौजूद हैं। वे एक स्टेज एंकर और मॉडल के रूप में काफी सफल रही थीं। हालांकि, पिछले कुछ समय से उनका मन अध्यात्म की तरफ मुड़ने लगा था। वे सनातन संस्कृति के प्रचार के लिए लगातार वीडियो भी बनाती रहती थीं। वे स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज की शिष्या के रूप में काफी समय से जुड़ी थीं। आखिरकार उन्होंने तय किया कि अब वे केवल ईश्वर की भक्ति करेंगी।



महामंडलेश्वर बोले- संन्यास में मर्यादा का पालन जरूरी

दीक्षा देने के बाद महामंडलेश्वर स्वामी सुमनानंद गिरि ने बड़ी बात कही। उन्होंने कहा कि संन्यास लेना एक बहुत ही अनुशासित और कठिन प्रक्रिया है। एक संन्यासी का आचरण समाज के लिए आईना होता है, उसे पवित्र रखना चाहिए। उन्होंने हर्षा को नसीहत दी कि वे संन्यास की गरिमा को बचाए रखें। हर्षा ने भी पूरे विश्वास के साथ कहा कि वे अपनी मर्यादा निभाएंगी। उन्होंने कहा कि गुरुदेव के मार्गदर्शन में अब वे सनातन का प्रचार करेंगी। समाज सेवा और संस्कृति की रक्षा ही अब उनके जीवन का लक्ष्य है।



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कैसा होगा अब स्वामी हर्षानंद गिरि का नया जीवन?

अब हर्षा के पास न कोई बैंक बैलेंस होगा और न कोई घर। स्वामी हर्षानंद गिरि के रूप में वे अब साधु-संतों की टोली का हिस्सा होंगी। संन्यासी के लिए पूरी दुनिया ही अब उनका अपना परिवार बन चुकी है। वे अब निरंजनी अखाड़े की परंपराओं के अनुसार धर्म का काम आगे बढ़ाएंगी।



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