करप्शन के पुराने मामलों में वकीलों के नंबर नदारद, सालों तक लंबित हो रहे मामले

Neel Tiwari | Aug 06, 2026, 19:27 IST
Photograph: (THESOOTR)
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से जुड़ी पुरानी आपराधिक अपीलों में अधिवक्ताओं की पूरी जानकारी अपडेट करने का अभियान शुरू किया है। एक पुराने मामले की सुनवाई में सामने आई तकनीकी दिक्कत के बाद यह फैसला लिया गया।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • हाई कोर्ट ने पुराने करप्शन मामलों की अपीलों का रिकॉर्ड अपडेट करने का फैसला लिया है।
  • अब अधिवक्ताओं से नाम, एनरोलमेंट नंबर, केस नंबर और मोबाइल नंबर मांगे गए हैं।
  • यह कदम एक पुराने मामले की सुनवाई के दौरान आई तकनीकी परेशानी के बाद उठाया गया।
  • कोर्ट ने माना कि सही जानकारी नहीं होने से सुनवाई की सूचना नहीं पहुंच सकी।
  • रजिस्ट्री को सभी पुराने मामलों का रिकॉर्ड अपडेट करने का विशेष अभियान चलाने के निर्देश मिले हैं।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने अधिवक्ताओं के लिए एक अहम कदम उठाया है। यह फैसला पुराने मामलों की सुनवाई को तेज बनाने के उद्देश्य से लिया गया है। अदालत चाहती है कि किसी भी मामले में सूचना पहुंचने में देरी न हो। इसी कारण अब रिकॉर्ड को नए सिरे से अपडेट किया जाएगा।



हाई कोर्ट ने 5 अगस्त 2026 को एक नोटिस जारी किया। इसमें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत लंबित सभी पुरानी आपराधिक अपीलों के अधिवक्ताओं और पक्षकारों से जरूरी जानकारी मांगी गई है। यह जानकारी जबलपुर स्थित हाई कोर्ट के गेट नंबर 5 के पूछताछ केंद्र पर जमा करनी होगी।



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किन जानकारियों को देना होगा

हाई कोर्ट ने साफ किया है कि प्रत्येक अधिवक्ता अपना नाम उपलब्ध कराएं। इसके साथ एनरोलमेंट नंबर भी देना होगा। संबंधित केस नंबर भी दर्ज करना होगा। मोबाइल या फोन नंबर देना भी जरूरी रहेगा।



इस अभियान का मकसद केवल रिकॉर्ड पूरा करना नहीं है। इसका उद्देश्य यह भी है कि भविष्य में किसी भी सुनवाई की सूचना सीधे संबंधित अधिवक्ता तक पहुंच सके।



एक पुराने केस ने दिखाई सिस्टम की बड़ी कमी

इस पूरे अभियान की शुरुआत एक पुराने आपराधिक मामले से हुई। मामला वर्ष 2002 की क्रिमिनल अपील क्रमांक 69/2002 का है। यह ए. मैथ्यू बनाम केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो का मामला है।



29 जुलाई 2026 को जस्टिस संजीव एस. कलगांवकर के समक्ष इस मामले की सुनवाई हुई। अपीलकर्ता की ओर से बताया गया कि उनके अधिवक्ता का एनरोलमेंट नंबर कोर्ट के डेटाबेस में दर्ज नहीं था। इसी वजह से उन्हें मोबाइल संदेश के जरिए सुनवाई की सूचना नहीं मिली।



इसके कारण पिछली तारीख पर अधिवक्ता अदालत में उपस्थित नहीं हो सके। उन्होंने अदालत से अनुपस्थिति माफ करने की मांग की। साथ ही कहा कि वे अंतिम बहस के लिए पूरी तरह तैयार हैं।



कोर्ट ने अनुपस्थिति माफ की, फिर दिया बड़ा निर्देश

अदालत ने अधिवक्ता की बात स्वीकार कर ली। पिछली सुनवाई पर उनकी अनुपस्थिति को माफ कर दिया गया। कोर्ट ने माना कि मामला काफी पुराना है। इसलिए इसकी जल्द सुनवाई जरूरी है।



कोर्ट ने इस अपील को सितंबर 2026 की अंतिम सुनवाई सूची में शामिल करने का आदेश दिया। इसके साथ ही रजिस्ट्री को एक व्यापक अभियान चलाने के निर्देश दिए गए।



अब रजिस्ट्री करेगी पुराने रिकॉर्ड की जांच

जस्टिस संजीव एस. कलगांवकर ने रजिस्ट्री से कहा कि सभी पुरानी अपीलों के डेटाबेस की जांच की जाए। जहां भी अधिवक्ताओं के एनरोलमेंट नंबर दर्ज नहीं हैं, वहां जानकारी अपडेट की जाए।



अदालत ने आदेश की प्रति प्रिंसिपल रजिस्ट्रार (न्यायिक) और रजिस्ट्रार (आईटी) को भी भेजने के निर्देश दिए। इससे यह प्रक्रिया प्रशासनिक स्तर पर भी शुरू हो सके।



अधिवक्ताओं के लिए यह खबर अहम क्यों

आज अधिकांश सूचनाएं डिजिटल माध्यम से भेजी जाती हैं। यदि डेटाबेस अधूरा रहेगा, तो सुनवाई की जानकारी समय पर नहीं मिलेगी। इससे मामलों की सुनवाई भी प्रभावित हो सकती है।



हाई कोर्ट का यह कदम भविष्य में ऐसी परेशानियों को रोक सकता है। इससे अधिवक्ताओं को समय पर सूचना मिलेगी। अदालत का समय भी बचेगा। पुराने मामलों की सुनवाई भी तेज हो सकेगी।



पक्षकारों को भी मिलेगा सीधा फायदा

इस अभियान का लाभ केवल अधिवक्ताओं तक सीमित नहीं रहेगा। जिन पक्षकारों के मामले वर्षों से लंबित हैं, उन्हें भी फायदा मिलेगा। सही रिकॉर्ड होने से मामलों की सूची, नोटिस और सुनवाई की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होगी। इससे अदालत के डिजिटल रिकॉर्ड की गुणवत्ता भी बेहतर होगी। आने वाले समय में केस प्रबंधन और आसान बनने की उम्मीद है।



अब क्या करना चाहिए

जिन अधिवक्ता के भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से जुड़े पुराने आपराधिक अपील वाले मामले लंबित हैं, उन्हें अपनी जानकारी जल्द जमा करनी चाहिए। यदि रिकॉर्ड पहले से अपडेट है, तब भी एक बार उसकी पुष्टि करना बेहतर रहेगा। इससे भविष्य में किसी तकनीकी परेशानी से बचा जा सकेगा।



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