हाईकोर्ट में रखे तर्क- भोजशाला संस्कृत सीखने का केंद्र, इसका उज्जैन के महाकाल मंदिर से संबंध

Sanjay Gupta | Apr 10, 2026, 20:01 IST
bhojshala
Indore: भोजशाला धार को लेकर हाईकोर्ट में लगातार पांचवें दिन सुनवाई हुई। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के बाद अब कुलदीप तिवारी की याचिका पर तर्क रखे गए। इस दौरान पुराने दस्तावेज, साहित्य से कहा गया कि यह संस्कृत सीखने का केंद्र था।

इंदौर हाईकोर्ट की डबल बेंच में धार भोजशाला को लेकर चल रही अंतिम सुनवाई में पांचवें दिन भी तर्क हुए। इस दौरान अब दूसरी याचिका कुलदीप तिवारी व अन्य को लेकर तर्क सुने गए। इसके पहले चार दिन तक हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की याचिका में वरिष्ठ वकील विष्णु शंकर जैन ने तर्क रखे थे। वहीं अब दूसरी याचिका में अधिवक्ता मनीष गुप्ता ने तर्क रखे।



यह बातें रखी गई कोर्ट में

अधिवक्ता गुप्ता ने मुख्य तौर पर 1908 में प्रकाशित गजेटियर को आधार बनाया और इसके तथ्य रखे। जस्टिस विजय शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच में यह तर्क रखे गए। इसमें बताया गया कि इस गजेटियर में लिखा है कि राजा भोज द्वारा यह संस्कृत सीखने का केंद्र बनाया गया था।



यहां पर देश-विदेश के ज्ञानी लोग आते थे और अपनी काबिलियत बताकर राजा से इनाम पाते थे। जम्मू कश्मीर के प्रसिद्ध कवि बिल्हण ने भी एक जगह लिखा है कि उन्हें अफसोस है कि वह राजा भोज के संस्कृत केंद्र में जाकर अपनी प्रतिभा नहीं दिखा सके।



उज्जैन महाकाल मंदिर से भी संबंध

यह भी बताया गया कि यह एक संस्कृत स्कूल के रूप में थी। एएसआई की ही एक किताब में बताया गया कि परमार वंश के मंदिर, शिलालेख हैं, इसमें सांप की आकृति बनी है। यही आकृति महाकाल मंदिर में और निमाड़ के ऊना मंदिर में भी मिली है। यह आकृति यानी मंदिर में ही मिलती है। यह सर्पबंदी पाणिनी के संस्कृत व्याकरण को समझने के लिए होती है। इससे साफ होता है कि भोजशाला भी संस्कृत स्कूल थी।



विविध किताब, साहित्य के तर्क दिए गए

इसके साथ ही अधिवक्ता द्वारा अन्य किताब, साहित्य की जानकारी रखते हुए ऐतिहासिक उदाहरण पेश किए। इसमें बताया कि राजा भोज ने विविध विषयों पर 84 ग्रंथ लिखे। इसी में एक आर्किटेक्चर पर थी। इसी किताब के आधार पर ही यह भोजशाला का निर्माण भी हुआ है।



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