MP में 50 हजार कर्मचारियों के केस पेंडिंग, HC ने कहा, विभाग खुद सुलझाएं विवाद

Anjali Dwivedi | Feb 01, 2026, 17:44 IST
high-court-suggestion-50-thousand-pending-cases
हाई कोर्ट ने सरकार को इन-हाउस डिस्प्यूट रिजॉल्यूशन सिस्टम बनाने का निर्देश दिया है। अब कर्मचारियों के प्रमोशन और ट्रांसफर विवाद विभाग को 45 दिन में सुलझाने होंगे।

News In Short

  • हाई कोर्ट में कर्मचारियों के 50 हजार से ज्यादा सर्विस संबंधी मामले लंबित हैं।
  • कर्मचारियों को 30 दिन में आवेदन करना होगा और सरकार को 45 दिन के अंदर फैसला लेना जरूरी होगा।
  • कोर्ट ने सभी विभागों में इन-हाउस डिस्प्यूट रिजॉल्यूशन सिस्टम शुरू करने का निर्देश दिया है।
  • इस व्यवस्था से प्रदेश के प्रथम श्रेणी से लेकर चतुर्थ श्रेणी तक के करीब 6 लाख कर्मचारियों को राहत मिलेगी।
  • निष्पक्ष फैसलों के लिए कोर्ट ने रिटायर्ड जजों की सेवाएं लेने का भी सुझाव दिया है।

News In Detail

जबलपुर. सरकारी कर्मचारियों के ट्रांसफर, प्रमोशन और इंक्रीमेंट जैसे मुद्दों को लेकर हाई कोर्ट ने एमपी सरकार को आईना दिखाया है। कोर्ट ने साफ तौर पर कहा है कि सेवा संबंधी छोटे-छोटे विवादों के लिए कर्मचारियों को बार-बार अदालत का दरवाजा खटखटाने के लिए मजबूर न किया जाए।



जस्टिस विनय सराफ ने मंडला जिले के फॉरेस्ट गार्ड्स की वरिष्ठता और आर्थिक लाभ से जुड़ी एक याचिका की सुनवाई के दौरान यह अहम नसीहत दी।



विभागों में बने अपनी अदालत

जस्टिस सराफ ने निर्देश दिया है कि सरकार सभी विभागों में एक इन-हाउस डिस्प्यूट रिजॉल्यूशन सिस्टम विकसित करे। इसका मतलब है कि विवाद कोर्ट पहुँचने से पहले ही विभागीय स्तर पर सुलझा लिया जाए। कोर्ट ने इसके लिए एक समय सीमा भी तय की है।



याचिकाकर्ता को 30 दिन के भीतर सक्षम अधिकारी के पास आवेदन देना होगा, और सरकार को अगले 45 दिन के भीतर उस पर अपना अंतिम फैसला सुनाना होगा। इस आदेश की एक कॉपी मुख्य सचिव को भेजकर गंभीरता से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।



50 हजार कर्मचारियों के पेंडिंग केस

वर्तमान में हाई कोर्ट में कर्मचारियों (सरकारी कर्मचारी) से जुड़े 50 हजार से अधिक मामले लंबित हैं। यदि सरकार इस इन-हाउस सिस्टम को प्रभावी ढंग से लागू करती है, तो प्रदेश के करीब 6 लाख अधिकारी-कर्मचारियों को इसका सीधा फायदा मिलेगा।



इसमें 8 हजार क्लास-1 अधिकारी, 40 हजार क्लास-2 अधिकारी, लगभग 5 लाख क्लास-3 कर्मचारी और 50 हजार से अधिक क्लास-4 कर्मचारी शामिल हैं। इससे न केवल अदालतों का बोझ कम होगा, बल्कि कर्मचारियों का समय और पैसा भी बचेगा।



छोटे मामलों की कोर्ट में भरमार

कोर्ट ने चिंता जताई कि इन दिनों सर्विस मैटर्स की बाढ़ आ गई है। छोटे-छोटे प्रशासनिक विवाद भी कोर्ट पहुंच रहे हैं, जिससे अन्य गंभीर मामलों की सुनवाई प्रभावित होती है। कोर्ट ने सुझाव दिया कि हर स्तर पर नॉमिनेटेड अधिकारी नियुक्त किए जाएं। साथ ही जरूरत पड़ने पर रिटायर्ड जिला न्यायाधीशों की मदद ली जाए। इससे फैसले अधिक निष्पक्ष, प्रभावी और समयबद्ध होंगे, जिससे अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच भरोसा बढ़ेगा।



हाईकोर्ट से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें...



क्या हाईकोर्ट की सलाह मानेगी Madhya Pradesh सरकार ? 6 लाख कर्मचारियों को होगा फायदा !



ग्वालियर हाईकोर्ट का 24 अधिकारियों के खिलाफ SC-ST एक्ट लगाने का आदेश



एमपी हाईकोर्ट में जजों की भारी कमी, हर पांचवां पद खाली!



इंदौर नगर निगम में असिस्टेंट इंजीनियर की नहीं होगी भर्ती, हाईकोर्ट ने इसलिए लगाई रोक





Tags:
  • एमपी सरकार
  • सरकारी कर्मचारी
  • जबलपुर
  • हाई कोर्ट
  • जस्टिस विनय सराफ