मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की बैठक से सांसद और विधायकों ने बनाई दूरी, जलसंकट पर भी एकजुट नहीं दिखे नेता
इन सभी को बुलाया था बैठक में
मंत्री विजयवर्गीय ने सांसद, सभी विधायकों और महापौर को बैठक में शामिल होने के लिए पत्र जारी किया था। बैठक में विभाग के अपर मुख्य सचिव, नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों और जलापूर्ति से जुड़े अधिकारियों को भी बुलाया गया था। बैठक का मुख्य उद्देश्य पानी की वर्तमान उपलब्धता की समीक्षा करना था। इसके साथ ही संभावित जलसंकट से निपटने के लिए कार्ययोजना बनाने पर विचार किया जाना था।
बैठक में केवल ये नेता पहुंचे
सिटी बस ऑफिस में तय समय पर बैठक शुरू हुई। इसमें महापौर पुष्यमित्र भार्गव के साथ विधायक मधु वर्मा, महेंद्र हार्डिया और रमेश मेंदोला मौजूद रहे। वहीं, मंत्री तुलसीराम सिलावट कैबिनेट बैठक के चलते भोपाल में थे। सांसद भी कृषि संबंधी बैठक के लिए मंत्रालय से ऑनलाइन जुड़े हुए थे। इसी कारण वे बैठक में नहीं पहुंच सके। भोपाल से नगरीय प्रशासन आयुक्त संकेत भोंडवे भी बैठक में शामिल होने पहुंचे थे।
ये नेता बैठक में नहीं पहुंचे
बैठक में देपालपुर विधायक मनोज पटेल, इंदौर विधानसभा क्षेत्र क्रमांक चार की विधायक और पूर्व महापौर मालिनी गौड़ तथा इंदौर विधानसभा क्षेत्र क्रमांक तीन के विधायक गोलू शुक्ला नहीं पहुंचे। गोलू शुक्ला को लेकर बताया गया कि वे नवरात्रि के दौरान पूजन में व्यस्त रहते हैं। इसलिए उनकी जगह प्रतिनिधि बैठक में शामिल हुए थे। वहीं, मनोज पटेल और मालिनी गौड़ के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से राजनीतिक मतभेद जगजाहिर हैं। माना जा रहा था कि शहर में संभावित जलसंकट को देखते हुए सभी नेता एकजुट होकर काम करेंगे। हालांकि, बैठक में ही नेताओं के बीच दूरियां नजर आईं।
बैठक में इन मुद्दों पर हुई चर्चा
बैठक में महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने नगर निगम की तैयारियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जलसंकट से निपटने के लिए लगातार बैठकें की जा रही हैं। इस संबंध में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से भी मुलाकात हो चुकी है। मुख्यमंत्री से 50 करोड़ रुपए के अनुदान की मांग की गई है। इसके साथ ही वार्डवार कार्ययोजना तैयार की जा रही है।
जल कार्य एमआईसी प्रभारी बबलू शर्मा ने भी तैयारियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि फंड मिलने पर नए हाइड्रेंट बनाए जा सकेंगे। इसके अलावा टैंकर खरीदने और बोरिंग सुधारने जैसे काम भी किए जाएंगे। बैठक में भविष्य में सख्त कदम उठाने की जरूरत भी बताई गई। पानी बचाने के लिए जनजागरूकता अभियान चलाने पर चर्चा हुई। इसके साथ ही मोटर लगाकर पानी खींचने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने जैसे कदम उठाने की बात कही गई। बोरिंग पर रोक लगाने का मुद्दा भी सामने आया।
मंत्री बोले- अभी से शुरू करें तैयारी
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि संभावित जलसंकट से निपटने के लिए अभी से तैयारी करनी होगी। पहले लोगों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक किया जाए। जरूरत पड़ने पर सख्त कदम भी उठाने होंगे। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि फंड की चिंता न करें। इसके लिए राशि की व्यवस्था की जाएगी।
बैठक में बताया गया कि इंदौर में हर साल औसतन 38 से 40 इंच बारिश होती है। इस बार अब तक केवल 23.20 इंच बारिश हुई है। यह औसत के मुकाबले करीब 40 फीसदी कम है। कम बारिश के कारण तालाब और अन्य जलाशय पूरी तरह नहीं भर सके हैं। इसका असर भूजल स्तर पर भी पड़ा है। ऐसे में आने वाले महीनों में शहर के सामने जलसंकट की चुनौती खड़ी हो सकती है।
महापौर ने मुख्यमंत्री से मांगे 50 करोड़
संभावित जलसंकट को देखते हुए महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से मुलाकात की थी। उन्होंने विशेष पैकेज के तहत 50 करोड़ रुपए की मांग की है। इस राशि से नए हाइड्रेंट बनाने, टैंकर खरीदने और अन्य जरूरी काम किए जाएंगे। इसके साथ ही यशवंत सागर और बिलावली तालाब में जल संग्रहण बढ़ाने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।
महापौर ने नर्मदा-मालवा-गंभीर लिंक परियोजना से इन तालाबों में पानी उपलब्ध कराने की संभावना पर मुख्यमंत्री से चर्चा की है। वहीं, शहर के हर वार्ड और जोन के लिए अलग-अलग कार्ययोजना बनाई जा रही है। इसका उद्देश्य जलसंकट की स्थिति बनने से पहले ही तैयारियां पूरी करना है। लोगों से पानी बचाने की अपील भी की जा रही है।
मंत्री बोले- जो नहीं आए उनके यहां समस्या नहीं होगी
बैठक के बाद मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से नेताओं की अनुपस्थिति को लेकर सवाल किया गया। इस पर उन्होंने पहले कहा कि जो नहीं आए हैं, उनसे ही पूछिए। त्योहार भी है। इसके बाद उन्होंने कहा कि उनके यहां पानी की समस्या नहीं होगी।
मंत्री विजयवर्गीय ने बताया कि इस बार बारिश कम हुई है। अभी से बोरिंग को लेकर शिकायतें आने लगी हैं। शहर में अब भी कुछ ऐसे क्षेत्र हैं, जहां नर्मदा का पानी नहीं पहुंचता है। आने वाले समय में बोरिंग सूख सकते हैं।
इसलिए अभी से योजना बनाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि नगर निगम ने काफी तैयारियां शुरू कर दी हैं। इस संबंध में एमआईसी की बैठक भी बुलाई जाएगी। मंत्री ने स्पष्ट किया कि अभी बोरिंग पर रोक लगाने को लेकर चर्चा नहीं हुई है। हालांकि, आगे जरूरत के अनुसार फैसले लिए जाएंगे।
कैलाश ने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर बोरिंग का अधिग्रहण भी किया जा सकता है। जमीन का पानी बेचने के लिए नहीं है। ऐसे बोरिंग को फिर से टेकओवर किया जा सकता है। मंत्री विजयवर्गीय ने यह भी कहा कि जरूरत पड़ी तो शहर को 100 करोड़ रुपए दिए जाएंगे। जलसंकट से निपटने के लिए फंड की कमी नहीं होने दी जाएगी।