दीपाली रस्तोगी के तंज से सुलगी IAS बिरादरी, विरोध बढ़ता देख मुख्य सचिव अनुराग जैन ने संभाला मोर्चा
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव दीपाली रस्तोगी की टिप्पणी के बाद शुरू हुआ विवाद इतना बढ़ गया कि आईएएस बिरादरी के भीतर असहज स्थिति बन गई थी। द सूत्र में मामला प्रमुखता से सामने आने के बाद मुख्य सचिव अनुराग जैन ने हस्तक्षेप किया और पूरे घटनाक्रम को शांत करने की कोशिश की। मुख्य सचिव का यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि विवाद सीधे तौर पर एक प्रमोटी आईएएस अधिकारी को श्रेय मिलने और न मिलने के सवाल से जुड़ गया था।
द सूत्र में यह खबर प्रकाशित होने के बाद मुख्य सचिव अनुराग जैन ने स्वयं अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने मध्यप्रदेश आईएएस एसोसिएशन के ग्रुप में लिखा कि "Really excellent idea implemented in the leadership of Sheelendra. We showcased it in the Exhibition on Women Empowerment on the occasion of 300th Birth Celebration of Great Administrator Ahilya Bai. Hon'ble PM appreciated the initiative."
यानी, शीलेंद्र के नेतृत्व में यह वास्तव में उत्कृष्ट पहल थी। देवी अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती के अवसर पर आयोजित महिला सशक्तिकरण प्रदर्शनी में इसका प्रदर्शन किया गया था और प्रधानमंत्री ने भी इसकी सराहना की थी।
मुख्य सचिव की इस टिप्पणी को कई अधिकारी सीधे तौर पर आईएएस शीलेन्द्र सिंह के योगदान को मान्यता देने और विवाद को शांत करने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं।
कई आईएएस अधिकारियों ने द सूत्र से कहा कि मुख्य सचिव ने समय रहते हस्तक्षेप कर सही संदेश दिया है। सीनियर आईएएस ने बताया कि मुख्य सचिव पूरे कैडर के अभिभावक की भूमिका में होते हैं। ऐसे में अनुराग जैन ने उसी भूमिका का निर्वहन करते हुए विवाद को बढ़ने से रोकने का प्रयास किया है।
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क्या है पूरा मामला
विवाद की जड़ में छिंदवाड़ा जिले का चर्चित नवाचार वॉश ऑन व्हील्स (WoW) है। यह पहल उस समय शुरू हुई थी, जब शीलेंद्र सिंह छिंदवाड़ा के कलेक्टर थे। यह मॉडल राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुका है। भोपाल के जंबूरी मैदान में आयोजित रानी अहिल्याबाईहोल्कर की 300वीं जयंती के महिला सशक्तिकरण महासम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसकी सराहना की थी। प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पत्रिका अकॉलैड्स ने भी इसे अपने अंक में स्थान दिया है। हाल ही में इस अभिनव परियोजना को देश का प्रतिष्ठित इंडिया सैनिटेशन कोएलिशन-फिक्की नेशनल अवॉर्ड भी मिला है।
जब पूर्व केंद्रीय सचिव ने की शीलेंद्र सिंह की तारीफ
मध्यप्रदेश कैडर के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी और पूर्व केंद्रीय सचिव अनिल स्वरूप ने इस मॉडल पर एक लेख लिखा। इस लेख को पूर्व केंद्रीय सचिव आलोक श्रीवास्तव ने आईएएस एसोसिएशन मध्यप्रदेश के आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप में शेयर किया।
उन्होंने लिखा कि सरकारें अनेक योजनाएं और अभियान शुरू करती हैं, लेकिन उनमें से बहुत कम पहल ऐसी होती हैं, जो लंबे समय तक प्रभावी ढंग से चलती रहें। छिंदवाड़ा जिले में कलेक्टर के रूप में कार्यरत रहे युवा आईएएस अधिकारी शीलेंद्र सिंह ने जो किया, वह अन्य अधिकारियों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण है। इसके बाद ग्रुप में शीलेंद्र सिंह को बधाइयों का सिलसिला शुरू हो गया। डायरेक्ट और प्रमोटी, दोनों वर्गों के अधिकारियों ने उन्हें शुभकामनाएं दीं।
फिर आया आईएएस दीपाली रस्तोगी का कमेंट
घटनाक्रम में मोड़ तब आया, जब अपर मुख्य सचिव दीपाली रस्तोगी ने उसी पोस्ट पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा, "It's Chhindwara team's effort. The CEO ZP Agrim Kumar, the "young" IAS officer, has played a very active role. The IT initiative was led by him. We have replicated the initiative at state level with the help of Agrim and NIC."
दीपाली ने कहा, यह किसी एक अधिकारी की उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरी छिंदवाड़ा टीम का सामूहिक प्रयास था। उन्होंने जिला पंचायत सीईओ अग्रिम कुमार की भूमिका को प्रमुखता से रेखांकित किया और बताया कि आईटी आधारित पहल का नेतृत्व उन्होंने किया था, लेकिन विवाद इस बात पर खड़ा हो गया कि उनकी टिप्पणी में शीलेंद्र सिंह का कहीं उल्लेख नहीं था। उन्होंने उन्हें बधाई भी नहीं दी। साथ ही अग्रिम कुमार का जिक्र करते हुए "young" IAS officer लिखा और "young" शब्द को Quote-Unquote किया। यहीं से चर्चा शुरू हो गई कि आखिर शीलेंद्र सिंह को लेकर चुप्पी क्यों रही।
कमेंट के बाद थम गए बधाई के मैसेज
दीपाली रस्तोगी की टिप्पणी के बाद आईएएस एसोसिएशन के ग्रुप में शीलेंद्र सिंह को बधाई देने वाले संदेश लगभग बंद हो गए। इसके बाद चर्चा प्रमोटी आईएएस अधिकारियों के अलग व्हाट्सएप ग्रुप आईएएस पीआर में पहुंच गई। वहां कई अधिकारियों ने नाराजगी जताई। कुछ अफसरों ने यह तक सुझाव दिया कि यदि यही स्थिति रही तो प्रमोटी अधिकारियों को आईएएस एसोसिएशन का ग्रुप छोड़ देना चाहिए।
इससे पहले भी उठ चुके हैं सवाल
दीपाली रस्तोगी की टिप्पणी के बाद डायरेक्ट और प्रमोटी आईएएस अधिकारियों के बीच की खाई एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई। कई अधिकारियों का मानना है कि यह अकेली घटना नहीं है। हाल ही में डिंडोरी की गौंड पेंटिंग को जीआई टैग मिलने के मामले में भी ऐसा ही विवाद सामने आया था। उस समय महिला आईएएस अधिकारियों के व्हाट्सएप ग्रुप में मीनाक्षी सिंह के काम की सराहना की जा रही थी। इसी दौरान दीपाली रस्तोगी ने टिप्पणी करते हुए उपलब्धि का श्रेय एसआरएलएम की सीईओ हर्षिका सिंह, डिंडोरी कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ की पहल को दिया था। इसके बाद महिला अधिकारियों के बीच भी यह चर्चा शुरू हो गई थी कि क्या मीनाक्षी सिंह के योगदान को पर्याप्त श्रेय मिला।
चर्चा में रहे हैं दीपाली के तेवर
यह पहला मौका नहीं है जब दीपाली रस्तोगी की किसी टिप्पणी ने प्रशासनिक गलियारों में बहस छेड़ी हो। वे अपने तेवर के लिए जानी जाती हैं। इससे पहले भी एक महत्वपूर्ण बैठक में वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के सामने उन्होंने बिना झिझक अपनी बात रखी थी। प्रशासनिक हलकों में उनकी पहचान एक ईमानदार, विजनरी और रिजल्ट-ओरिएंटेड अधिकारी की है। इस बार उनकी टिप्पणी ने डायरेक्ट और प्रमोटी आईएएस अधिकारियों के बीच मौजूद उस संवेदनशील मुद्दे को फिर सामने ला दिया, जिस पर समय-समय पर चर्चा होती रही है। फिलहाल मुख्य सचिव के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत होता दिख रहा है, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने आईएएस बिरादरी के भीतर चल रही खींचतान को एक बार फिर उजागर कर दिया है। साथ ही दीपाली की छवि पर भी असर पड़ा है।
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