जासूसों के साथ नेता, आईएएस-आईपीएस की कॉल डिटेल का सौदा, ATS ने ASI को किया गिरफ्तार
News In Short
- एटीएस जांच में सीडीआर लीक का खुलासा हुआ है।
- इंदौर क्राइम ब्रांच के एएसआई को गिरफ्तार किया गया है।
- जासूस कंपनियों को कॉल डिटेल दिलवाई जा रही थी।
- नेताओं, आईएएस, आईपीएस तक के रिकॉर्ड निकाले गए हैं।
- 20 से 40 हजार रुपए में सौदा हो रहा था।
News In Detail
मध्यप्रदेश में प्राइवेसी (निजता) का खतरा इस कदर बढ़ गया है कि अब निजी जासूस (प्राइवेट डिटेक्टिव) कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) भी निकलवा रहे हैं। इसके लिए ये डिटेक्टिव पुलिस से ही सांठगांठ कर रहे हैं।
पुलिस किसी भी केस में सीडीआर की अनिवार्यता बताकर मोबाइल कंपनियों से यह डिटेल ले लेती है। कई बार ऑफ रिकॉर्ड भी मिलीभगत से यह काम हो रहा है। हालत यह है कि नेता और हाईप्रोफाइल लोगों के साथ आईएएस, आईपीएस के कॉल रिकॉर्ड भी सुरक्षित नहीं हैं।
इस तरह हुआ खुलासा
इंदौर की इंदौर डिटेक्टिव सर्विस के संचालक मुकेश तोमर की एक केस में जांच की गई थी। इसमें खुलासा हुआ कि इनके द्वारा कॉल डिटेल रिकॉर्ड निकलवाई जा रही है।
इसमें इंदौर क्राइम ब्रांच के एएसआई रामपाल की भूमिका पाई गई। इसके बाद एटीएस ने उसे गिरफ्तार किया है। रामपाल द्वारा इस जासूस कंपनी को रिकॉर्ड दिलवाए जा रहे थे।
कई एजेंसियों के साथ संपर्क में पुलिस अधिकारी
एटीएस को प्रारंभिक जांच में मिला है कि इंदौर के साथ ही भोपाल व अन्य शहरों की जासूसी कंपनियों के संचालक पुलिस विभाग के कुछ अधिकारी-कर्मचारियों के साथ मिलकर यह खेल कर रहे हैं।
भोपाल के IAS, IPS के निकले रिकॉर्ड
जांच में आया है कि यह एजेंसी केवल आम लोग ही नहीं, बल्कि हाईप्रोफाइल लोगों, नेताओं, आईएएस और आईपीएस जैसे अधिकारियों की भी कॉल डिटेल निकलवा रही है।
भोपाल में पदस्थ कई अधिकारियों की सीडीआर निकलवाई जा चुकी है। एटीएस ने इस पूरे मामले को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर देखा है। इसलिए एटीएस ने इस केस को अपने हाथ में लिया है और जांच कर रही है।
20 से 40 हजार में हो रहा खेल
जांच में अभी तक सामने आया है कि पुलिस अधिकारी और कर्मचारी केवल 20 से 40 हजार रुपए लेकर किसी की भी कॉल डिटेल रिकॉर्ड निकलवा लेते हैं। इसे खुले बाजार में और जरूरत के मुताबिक बेचा जाता है। एटीएस अब इस मामले में बड़े स्तर पर जांच कर रही है। इसमें कई लोग रडार पर हैं।
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