इंदौर स्टेट GST कमिश्नर आईएएस अनय द्विवेदी क्यों आए चर्चा में, फैसलों से विभाग में मचा हड़कंप
Sanjay Gupta | Apr 11, 2026, 14:12 IST
indore gst commissioner anay dwivedi
इंदौर में स्टेट GST कमिश्नर आईएएस अनय द्विवेदी के सख्त फैसलों से विभाग में हड़कंप मच गया है। फेसलेस सुनवाई, रेंडम केस अलॉटमेंट और एंटी-इवेजन विंग की शक्तियां कम करने जैसे फैसलों से अधिकारी असहज हैं।
मध्यप्रदेश में स्टेट GST कमिश्नर और 2010 बैच के आईएएस अनय द्विवेदी फिर चर्चा में हैं। उनके सख्त फैसले और राजस्व बढ़ाने की कवायद ने विभागीय (जीएसटी) अधिकारियों को हिला दिया है।
हालत यह हो गई कि प्रभावित होने वाले अधिकारियों ने गुट बनाकर उनके खिलाफ लामबंद होने की साजिश शुरू कर दी है। यहां तक कि एक दिन (13 अप्रैल) के सामूहिक अवकाश पर जाने के मैसेज भी विभाग में चले थे। बाद में राजपत्रित अधिकारी संघ ने इन मैसेज का खंडन किया था।
जनवरी के मध्य में ही द्विवेदी ने काम संभाला है। पहले राजस्व पर ध्यान दिया गया। लगातार मॉनिटरिंग के जरिए राजस्व में ग्रोथ हुई थी। साथ ही, पहले जो राजस्व लक्ष्य से 17 फीसदी नीचे था, वह मार्च आते-आते केवल चार फीसदी पर रह गया था।
इस दौरान कई केस की स्क्रूटनी में सामने आया कि विभाग के जरिए वसूली और राजस्व पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जो केस लीगल लड़ाई में हारे जा रहे हैं, उनमें विभाग से अपील भी नहीं हो रही है। रिफंड के लिए करदाता परेशान हो रहे हैं, जो उनका अधिकार है।
जांच के दौरान ही एंटी-इवेजन विंग की कई कारगुजारियों की पोल खुल गई है। एक मैडम तो 366 फाइल दबाकर बैठी हुई थीं। इसमें करोड़ों का राजस्व मध्यप्रदेश शासन को मिलना था। इसमें कमिश्नर ने साफ चेतावनी दे दी कि ऐसी फाइल दबी तो सीधे आपराधिक केस कराया जाएगा।
खबर ये भी आई थी कि कमिश्नर अनय द्विवेदी को लेकर विभाग के वॉट्सऐप ग्रुप पर कुछ नाराज अधिकारियों ने भोपाल में जमा होने और एक दिन की छुट्टी पर जाने के मैसेज किए थे। हालांकि, बाद में राजपत्रित अधिकारी संघ के कार्यकारी अध्यक्ष आरके शर्मा ने इसका खंडन किया और ग्रुप पर संघ की ओर से एक मैसेज डाला।
उन्होंने कहा कि मुझे एक जानकारी मिली है। कुछ लोग GST राजपत्रित अधिकारी संघ से अलग एक वॉट्सऐप ग्रुप बनाकर, संघ का नाम गलत तरीके से इस्तेमाल कर रहे हैं। उसमें मैसेज भेज रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा कि सभी सदस्यों से अनुरोध है कि ऐसी भ्रामक जानकारी से बचें और ऐसे मामले संज्ञान में आते ही सूचित करें। ताकि ऐसे तत्वों पर वैधानिक कार्रवाई की जा सके। संघ अन्य किसी ग्रुप में संघ के नाम से चलाई जा रही गतिविधियों का समर्थन नहीं करता है और न ही संघ ने इस प्रकार के कोई निर्णय लिए हैं।
द्विवेदी अपनी सख्त कार्यशैली के चलते हमेशा ही चर्चा में रहते हैं। खंडवा में कोविड के दौरान भी उनकी सख्ती चर्चा में रही थी। साथ ही पूर्व विद्युत वितरण कंपनी के एमडी पद पर रहने के दौरान तत्कालीन केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते ने भी उन पर टिप्पणी की थी। वहीं, द्विवेदी सीधे शासन हित को देखते हुए सख्त फैसले लेने के लिए जाने जाते हैं।
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हालत यह हो गई कि प्रभावित होने वाले अधिकारियों ने गुट बनाकर उनके खिलाफ लामबंद होने की साजिश शुरू कर दी है। यहां तक कि एक दिन (13 अप्रैल) के सामूहिक अवकाश पर जाने के मैसेज भी विभाग में चले थे। बाद में राजपत्रित अधिकारी संघ ने इन मैसेज का खंडन किया था।
अनय द्विवेदी के ये बड़े फैसले, जिनसे मचा हंगामा
- अनय द्विवेदी ने सबसे बड़ा फैसला फेसलेस सुनवाई का लिया है। इनकम टैक्स की तर्ज पर आदेश हो गए हैं कि अब करदाता विभागीय अधिकारी के पास भौतिक (फिजिकल) रूप से नहीं जाएगा। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ही सुनवाई होगी। इससे करदाताओं को बड़ी राहत मिली और उधर अधिकारियों में सन्नाटा पसर गया है।
- दूसरा बड़ा फैसला लिया गया कि किसी करदाता के रिटर्न का विश्लेषण अब उस जोन का अधिकारी न करके रेंडम आधार पर पोर्टल के जरिए दूसरा अधिकारी करेगा। जैसे इंदौर का मामला है तो संभव है पोर्टल से यह केस जबलपुर, ग्वालियर या किसी भी अधिकारी के पास चला जाए।
- एक बड़ा फैसला यह हुआ कि एंटी-इवेजन विंग (Anti-Evasion Wing), जिस पर सबसे ज्यादा आरोप लगते हैं, उसकी पावर में कटौती कर दी जाएगी। छापे और जांच की कार्रवाई अब पोर्टल से पारदर्शी तरीके से होगी। साथ ही जरूरी नहीं कि जांच इन्हीं विंग से कराई जाए। सारे मामले अब एमपीएसईडीसी के पोर्टल पर अपलोड होंगे।
- ऑडिट और एंटी-इवेजन विंग अपने केस खुद नहीं देखेगा, अन्य जोन के अधिकारी देखेंगे।
क्यों लिए गए ये कड़े फैसले
इस दौरान कई केस की स्क्रूटनी में सामने आया कि विभाग के जरिए वसूली और राजस्व पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जो केस लीगल लड़ाई में हारे जा रहे हैं, उनमें विभाग से अपील भी नहीं हो रही है। रिफंड के लिए करदाता परेशान हो रहे हैं, जो उनका अधिकार है।
366 फाइल दबाकर बैठी हुई थीं मैडम
राजपत्रित अधिकारी संघ ने मैसेज का किया खंडन
संघ ने खंडन मैसेज में यह लिखा
उन्होंने आगे कहा कि सभी सदस्यों से अनुरोध है कि ऐसी भ्रामक जानकारी से बचें और ऐसे मामले संज्ञान में आते ही सूचित करें। ताकि ऐसे तत्वों पर वैधानिक कार्रवाई की जा सके। संघ अन्य किसी ग्रुप में संघ के नाम से चलाई जा रही गतिविधियों का समर्थन नहीं करता है और न ही संघ ने इस प्रकार के कोई निर्णय लिए हैं।
अपनी सख्त कार्यशैली से चर्चा में रहते हैं द्विवेदी
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