IAS संतोष वर्मा केस में पूर्व मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अमन भूरिया मुख्य षड़यंत्रकारी, जमानत खारिज
आईएएस संतोष वर्मा केस के फर्जी कोर्ट आदेश मामले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। मामले में पहले ही संतोष वर्मा और एडीजे विजेंद्र सिंह रावत फंसे हुए थे। अब पुलिस ने इंदौर जिला कोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) अमन सिंह भूरिया को इस षड़यंत्र का मुख्य आरोपी बता दिया है।
भूरिया ने यह कहकर लगाई याचिका
इंदौर पुलिस ने 17 अप्रैल को भूरिया को नोटिस भेजा था। इसके बाद 28 अप्रैल को उन्हें मोबाइल के साथ पेश होने के लिए कहा गया था। इसके जवाब में भूरिया ने जिला कोर्ट में जमानत की याचिका लगाई थी। उन्होंने कहा था कि उन्हें डर है कि उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है। एमजी रोड थाने में दर्ज किए गए केस में उन्हें आरोपी बनाया गया है। वहीं उन्होंने कहा कि पुलिस जो मोबाइल मांग रही है वो उनका नहीं है।
यह है पूरा केस
असल में मामला यह है कि लसूडिया थाने में संतोष वर्मा के खिलाफ एक केस दर्ज हुआ था। इस केस का चालान जिला कोर्ट में पेश किया गया था।
इस केस में एडीजे विजेंद्र सिंह रावत ने जून 2021 में एमजी रोड थाने में एक आवेदन दिया था। उन्होंने बताया था कि उनकी कोर्ट से 6 अक्टूबर 2020 को जो आदेश जारी हुआ, वह कूटरचित है। उन्होंने ऐसा कोई आदेश नहीं दिया था।
बता दें कि यह आदेश संतोष वर्मा को लसूडिया केस में बरी करने का था। इससे पहले एक और आदेश आया था, जिसमें बताया गया था कि महिला और संतोष वर्मा के बीच राजीनामा हुआ था।
रावत के आवेदन पर पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज किया और जांच शुरू कर दी। इसके बाद इस केस में संतोष वर्मा के अलावा एडीजे रावत और लिपिक नीतू सिंह चौहान को भी आरोपी बना दिया गया।
पुलिस का कहना है कि रावत और वर्मा ने मिलकर यह आदेश बनाया था। अब इस मामले में मुख्य षड़यंत्रकारी के रूप में अमन सिंह भूरिया का नाम सामने आया है।
भूरिया ने ही रावत और वर्मा को मिलवाया था
पुलिस ने अहम खुलासा करते हुए बताया कि भूरिया ने ही अपने चेंबर में संतोष वर्मा और विजेंद्र सिंह रावत की मुलाकात करवाई थी। पुलिस ने केस डायरी में बताया है कि संतोष वर्मा और विजेंद्र रावत दोनों के बयान ले लिए गए हैं। दोनों ने इस मुलाकात को सही बताया है।
वर्मा और भूरिया के बीच में लगातार फोन कॉल
इस केस को लेकर संतोष वर्मा और उनके बीच लगातार बात होती रही है, वो भी दो मोबाइल नंबरों से। 16 सितंबर 2020 से 22 जून 2021 तक दोनों के बीच 32 बार बातचीत हुई थी। वह भी न्यायिक काम के बाद रात में। जानकारी के अनुसार, जब 30 सितंबर को केस रावत की कोर्ट में षड़यंत्र के तहत शिफ्ट किया गया, उस दिन भी दोनों के बीच 8 बार बात हुई थी।
फिर 1 अक्टूबर को रात 8:38 बजे भी दोनों के बीच चर्चा हुई। वहीं 16 सितंबर से 25 सितंबर तक सुबह 10:52 से लेकर रात 10:35 तक भी बातचीत होती रही। इसके बाद 30 सितंबर को जेएमएफसी अरविंद गुर्जर की कोर्ट से केस रावत की कोर्ट में ट्रांसफर हुआ। दोनों के बीच की व्हाट्सएप चैट भी मौजूद है।
इस आधार पर जमानत खारिज
सभी तर्कों को सुनने के बाद जिला कोर्ट ने कहा कि यह एक गंभीर मामला है। संतोष वर्मा के जमानत मामले से कहीं ज्यादा गंभीर है। कूटरचना और कोर्ट के दस्तावेज में हेरफेर गंभीर अपराध माना जाता है। इसलिए जमानत की याचिका खारिज कर दी गई।
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