SIT ने लिए आईएएस संतोष वर्मा के हस्ताक्षर के नमूने, जज रावत की कोर्ट के फर्जी आदेश का मामला
समझें क्या है पूरा मामला...
- जज विजेंद्र सिंह रावत की कोर्ट से फर्जी आदेश जारी होने का मामला है।
- आईएएस संतोष वर्मा ने एसआईटी को हस्ताक्षर के नमूने दिए हैं।
- वर्मा पहले हस्ताक्षर के नमूने देने से बच रहे थे।
- निलंबित जज अमन सिंह भूरिया से भी पूछताछ हो चुकी है।
- जांच का केंद्र फर्जी आदेश पर किए गए हस्ताक्षर और साजिश की कड़ियां हैं।
इंदौर में न्यायाधीश विजेंद्र सिंह रावतकी कोर्ट से आईएएस संतोष वर्मा के केस में हुए फर्जी आदेश की जांच तेज हो गई है।
लंबे समय से आईएएस संतोष वर्मा इस केस में एसआईटी को अपने हस्ताक्षर का नमूना नहीं दे रहे थे। आखिरकार उन्होंने शनिवार को एसआईटी को हस्ताक्षर के नमूने दे दिए हैं।
लंबे समय से पुलिस से कतरा रहे थे वर्मा
इस केस में संतोष वर्मा लगातार पुलिस से कतरा रहे थे। कोर्ट में भी याचिका दायर की थी ताकि नमूना नहीं देना पड़े। लेकिन कोर्ट ने जांच में सहयोग करने की बात कही।
आखिरकार जब हाल ही में निलंबित जज भूरिया की गिरफ्तारी लेकर पूछताछ की गई और बाद में उन्हें रिहा किया गया, तो वर्मा भी घिर गए। इसके पहले पुलिस जज रावत और कोर्ट बाबू नीतू के हस्ताक्षर के नमूने ले चुकी है।
हस्ताक्षर में वी. रावत का राज
संतोष वर्मा को महिला द्वारा लसूडिया थाने में दर्ज कराए गए केस में बरी करने का आदेश जारी हुआ था। इस मामले में जज विजेंद्र सिंह रावत ने एमजी रोड थाने में साल 2021 में केस दर्ज कराया था कि यह आदेश उनकी कोर्ट में नहीं बना और फर्जी है।
दरअसल, इस आदेश में नीचे विजेंद्र सिंह रावत लिखा है और ऊपर वी. रावत के नाम से हस्ताक्षर किए गए हैं। यह वी. रावत किसने लिखा, इसी की जांच होना है। यह भी शंका जताई जा रही है कि यह कहीं खुद संतोष वर्मा ने तो नहीं बनाया? इसलिए एसआईटी को उनके हस्ताक्षर के नमूने लेने थे।
अब तक संतोष वर्मा का पूरा केस
- संतोष वर्मा के खिलाफ एक महिला ने लसूडिया थाने में केस दर्ज कराया।
- इस पर 6 अक्टूबर 2020 को जज विजेंद्र सिंह रावत की कोर्ट के फैसले की कॉपी सामने आई। इसमें वर्मा को बरी किया गया। इसी आदेश की कॉपी के चलते डीसीपी में वर्मा पदोन्नत होकर आईएएस बन सके।
- लेकिन जून 2021 में एमजी रोड थाने पर जज रावत ने आवेदन दिया कि यह 6 अक्टूबर का आदेश फर्जी है, वह तो उस दिन अवकाश पर थे।
- मामले की जांच में एक के बाद एक कड़ी खुली और इसमें इंदौर पुलिस ने जांच कर बताया कि संतोष वर्मा और रावत की मुलाकात जज अमन सिंह भूरिया ने ही अपने चेंबर में कराई थी।
- इसमें भूरिया मुख्य षड्यंत्रकारी है। इस केस को लेकर वर्मा और रावत के बीच तथा वर्मा व भूरिया के बीच लगातार बात हुई है।
यह है पूरा केस
लसूडिया थाने में संतोष वर्मा के खिलाफ एक केस दर्ज हुआ था। इस केस का चालान जिला कोर्ट में पेश किया गया था।
इस केस में एडीजे विजेंद्र सिंह रावत ने जून 2021 में एमजी रोड थाने में एक आवेदन दिया था। उन्होंने बताया था कि उनकी कोर्ट से 6 अक्टूबर 2020 को जो आदेश जारी हुआ, वह कूटरचित है। उन्होंने ऐसा कोई आदेश नहीं दिया था।
बता दें कि यह आदेश संतोष वर्मा को लसूडिया केस में बरी करने का था। इससे पहले एक और आदेश आया था। इसमें बताया गया था कि महिला और संतोष वर्मा के बीच राजीनामा हुआ था।
रावत के आवेदन पर पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज किया और जांच शुरू कर दी थी। इसके बाद इस केस में संतोष वर्मा के अलावा एडीजे रावत और लिपिक नीतू सिंह चौहान को भी आरोपी बना दिया गया था।
पुलिस का कहना था कि रावत और वर्मा ने मिलकर यह आदेश बनाया था।
FAQ
- संतोष वर्मा और जज विजेंद्र सिंह रावत का फर्जी आदेश मामला क्या है?
यह मामला इंदौर का है, जहां आईएएस संतोष वर्मा के केस में जज विजेंद्र सिंह रावत की कोर्ट से 6 अक्टूबर 2020 का फर्जी आदेश जारी होने की जांच चल रही है। आदेश में वर्मा को बरी किया गया था। - आईएएस संतोष वर्मा ने हस्ताक्षर का नमूना क्यों दिया?
लंबे समय तक वर्मा पुलिस से कतरा रहे थे। एसआईटी ने उनके हस्ताक्षर के नमूने जांच के लिए ताकि यह पता चल सके कि आदेश फर्जी था या नहीं। - जज अमन सिंह भूरिया का फर्जी आदेश केस में क्या रोल है?
निलंबित जज भूरिया को मुख्य षड्यंत्रकारी माना जा रहा है। उन्होंने वर्मा और रावत की मुलाकात अपने चेंबर में कराई थी और इस मामले में उनकी पूछताछ हो चुकी है।
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