बिना कैमरे के पेट की सटीक जांच, स्मार्ट ई-पिल से खुलेगा आंतों की बीमारियों का राज

Anjali Dwivedi | Mar 24, 2026, 13:43 IST
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IISER भोपाल ने कैमरा-रहित स्मार्ट ई-पिल विकसित की है, जो सेंसर तकनीक से पेट की बीमारियों की जांच करेगी। यह पारंपरिक जांच से 95% सस्ती और अधिक सटीक है।

News In Short

  • कैप्सूल से एंडोस्कोपी के मुकाबले खर्च में 90-95% की कमी आने की संभावना है।
  • मैग्नेट के जरिए ई-पिल को शरीर के किसी भी हिस्से में रोककर डेटा लेना संभव है।
  • कैमरा न होने के बावजूद pH और तापमान के जरिए सटीक डायग्नोसिस होगा।
  • 2 साल की रिसर्च के बाद मछली पर ट्रायल सफल, अब इंसानों पर परीक्षण की तैयारी है।
  • सामान्य कैप्सूल के आकार की यह पिल वायरलेस है और शरीर से आसानी से बाहर निकल जाती है।

News In Detail

पेट और आंतों की गंभीर बीमारियों की जांच अब पहले से कहीं अधिक सटीक और किफायती होने वाली है। आईसर (इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च), भोपाल के प्रोफेसर डॉ. मित्रदीप भट्टाचार्य और उनकी टीम ने एक स्मार्ट ई-पिल (Smart E-Pill) विकसित की है। यह छोटी सी डिवाइस शरीर के भीतर से रियल-टाइम डेटा भेजकर डॉक्टरों को बीमारी की सटीक स्थिति बताएगी।



कैमरा नहीं, सेंसर से होगी पहचान

आमतौर पर पेट की जांच के लिए इस्तेमाल होने वाली कैप्सूल एंडोस्कोपी में कैमरा लगा होता है, लेकिन यह नई ई-पिल कैमरा-रहित सेंसर तकनीक पर आधारित है।



यही वजह है कि इसकी लागत पारंपरिक एंडोस्कोपी की तुलना में बेहद कम है। यह वायरलेस पिल एक घुलनशील कवर के भीतर सुरक्षित रहती है। इसका आकार महज 6x20 मिलीमीटर है, जो एक सामान्य दवा के कैप्सूल जितना ही है।



मौजूदा तकनीक में कैप्सूल पर डॉक्टर का कोई नियंत्रण नहीं होता, वह पाचन प्रक्रिया के साथ खुद आगे बढ़ता है। लेकिन IISER की यह ई-पिल बैटरी-फ्री है और इसे बाहरी मैग्नेट के जरिए नियंत्रित किया जा सकता है।



इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि यदि डॉक्टर को किसी खास हिस्से में संक्रमण (पेट की समस्या) का अंदेशा है, तो वे इस पिल को वहीं रोककर डिटेल्ड डेटा ले सकेंगे।



pH और तापमान से खुलेगा बीमारी का राज

गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट के मुताबिक, अक्सर कैप्सूल एंडोस्कोपी में तस्वीरें साफ न आने पर जांच बेकार हो जाती है। इसके विपरीत, यह ई-पिल शरीर के भीतर का pH स्तर और तापमान मापती है। यह दवाइयों के रिलीज होने के पैटर्न और उनकी सही मात्रा की जानकारी भी देती है, जिससे इलाज को कहीं अधिक सटीक बनाया जा सकता है।



2 साल की रिसर्च और सफल ट्रायल

इस तकनीक को विकसित करने में वैज्ञानिकों को करीब 2 साल का समय लगा है। शोध के नतीजे प्रतिष्ठित इंटरनेशनल जर्नल एनपीजे फ्लेक्सिबल इलेक्ट्रॉनिक्स में प्रकाशित हुए हैं। आईसीएमआर (ICMR) की गाइडलाइंस के तहत इसका पहला सफल परीक्षण (Trial) मछली पर किया जा चुका है। अब अन्य जानवरों पर टेस्ट के बाद जल्द ही इसका ह्यूमन ट्रायल शुरू करने की तैयारी है।



25 हजार की जांच अब मात्र 2 हजार में

कीमत के मोर्चे पर यह तकनीक गेम-चेंजर साबित हो सकती है। जहां पारंपरिक कैप्सूल एंडोस्कोपी का खर्च 25 हजार से 50 हजार रुपए के बीच आता है, वहीं यह ई-पिल फिलहाल लैब स्तर पर मात्र दो हजार से ढ़ाई हजार में तैयार हो रही है। यानी जांच का खर्च करीब 95% तक कम हो सकता है। काम पूरा होने के बाद इसका बाहरी आवरण शरीर में घुल जाता है और माइक्रो सेंसर प्राकृतिक तरीके से शरीर से बाहर निकल जाते हैं।



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