आग पर काबू: पन्ना वन में देश का पहला एरियल फायर फाइटिंग परीक्षण सफल
ऐसे समझें पूरा मामला...
- पन्ना में हुआ एरियल फायर फाइटिंग का सफल परीक्षण।
- ड्रोन से दुर्गम क्षेत्रों में आग बुझाना संभव।
- मोनो अमोनियम फॉस्फेट से आग की तीव्रता कम हुई।
- पारंपरिक तरीकों की तुलना में ड्रोन अधिक प्रभावी।
- वन प्रबंधन में स्मार्ट तकनीक का उपयोग बढ़ेगा।
पन्ना वनमंडल में ड्रोन से 'एरियल फायर फाइटिंग' का पहला सफल परीक्षण हुआ। इस प्रयोग में मोनो अमोनियम फॉस्फेट का छिड़काव कर आग पर काबू पाया गया। यह तकनीक दुर्गम जंगलों में आग बुझाने में मददगार साबित हो सकती है। इससे वनकर्मियों को आग से बचने और जंगलों को सुरक्षित रखने में सहारा मिलेगा।
देश में पहली बार पन्ना में परीक्षण
भारत में पहली बार पन्ना वनमंडल में एरियल फायर फाइटिंग परीक्षण किया गया। यह परीक्षण 10 मई 2026 को शाहनगर वन परिक्षेत्र में किया गया, जिसमें ड्रोन और मोनो अमोनियम फॉस्फेट (MAP) का उपयोग किया गया। इस तकनीक का मुख्य उद्देश्य जंगलों में आग को जल्दी और प्रभावी तरीके से नियंत्रित करना था।
क्यों जरूरी है ड्रोन का उपयोग?
भीषण गर्मी के दौरान जंगलों में आग लगना आम बात है, खासकर उन क्षेत्रों में जो अत्यधिक दुर्गम होते हैं। इन स्थानों तक पहुंचने के लिए वनकर्मियों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में ड्रोन तकनीक की मदद से इन स्थानों पर त्वरित पहुंच बनाना और आग को प्रारंभिक स्तर पर नियंत्रित करना बहुत आसान हो गया है।
पारंपरिक तरीकों से बेहतर तकनीक
पारंपरिक तरीकों से आग बुझाना, जैसे फायर बीटिंग या लीफ ब्लोअर, काफी समय और मेहनत मांगता है। इसके अलावा, इन विधियों से वनकर्मियों की जान भी जोखिम में रहती है। जबकि ड्रोन से कंट्रोल छिड़काव कर आग की तीव्रता को कम किया जा सकता है और यह वनकर्मियों के लिए सुरक्षित भी है।
वैज्ञानिक अध्ययन और भविष्य की योजना
डीएफओ अनुपम शर्मा के अनुसार यह सिर्फ एक प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह एक गहन वैज्ञानिक अध्ययन का हिस्सा है। आने वाले समय में इस तकनीक के विभिन्न पहलुओं पर शोध किया जाएगा। इसमें रसायनों के प्रभाव, मिट्टी और जल पर असर और विभिन्न मौसम परिस्थितियों में ड्रोन की सटीकता का आकलन शामिल होगा।
स्मार्ट तकनीक का भविष्य
यदि यह तकनीक सफल रहती है, तो भविष्य में इसे संवेदनशील वन्यजीव आवासों और अन्य भीषण वनाग्नि स्थितियों में उपयोग किया जा सकेगा। पन्ना वनमंडल का यह कदम न केवल एक आधुनिक पहल है, बल्कि यह पूरे देश में वन प्रबंधन के लिए एक नया मॉडल भी प्रस्तुत कर सकता है।
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