इंदौर-तीन में अश्विन जोशी की पत्नी मनप्रीत हुईं सक्रिय, क्या कटेगा पिंटू का पत्ता..?
Indore. इंदौर की विधानसभा तीन से तीन बार के कांग्रेस विधायक रहे अश्विन जोशी का निधन 8 मई 2026 को हो गया था। वह इस विधानसभा से पांच बार चुनाव लड़े और 1998, 2003 व 2008 में जीते। इसके बाद साल 2013 व 2018 में हार के बाद उनका टिकट कटा और चचेरे भाई दीपक (पिंटू) जोशी को टिकट मिला। लेकिन वह साल 2023 के चुनाव में 14 हजार वोट से बीजेपी के गोलू शुक्ला से हार गए। वहीं अब जोशी के निधन के बाद उनकी पत्नी मनप्रीत जोशी के सक्रिय होने की संभावना तेज हो गई है।
क्यों मिले संकेत
अश्विन जोशी ने स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर हर साल 14 अगस्त को राजबाड़ा पर देशभक्ति कार्यक्रम की शुरूआत की थी। उनके निधन के बाद इस बार यह जिम्मेदारी उनकी पत्नी मनप्रीत जोशी ने यह जिम्मेदारी संभाली। उनके साथ बेटे आदित्य जोशी और बेटी अदिति जोशी भी मौजूद रही।
क्या बोलीं मनप्रीत जोशी
इस दौरान मनप्रीत जोशी ने माइक थामा और कहा कि आप सभी का सहयोग मेरे परिवार को मिलता रहा है और आपने विधायक जी (अश्विन जोशी) को बहुत स्नेह दिया है। वैसा ही स्नेह मेरे साथ बनाए रखिएगा।
कई कांग्रेस नेता रहे मौजूद
इस दौरान मंच पर शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे के साथ ही जिलाध्यक्ष विपिन वानखेड़े, पूर्व विधायक सत्यनारयण पटेल, अरविंद बागड़ी, भूपेंद्र सलूजा, हनी पाण्डेय व अन्य कई नेता और अश्विन जोशी के कई पूर्व सहयोगी मौजूद रहे।
पिंटू जोशी का पत्ता कटेगा क्या
इंदौर तीन से विधानसभा टिकट के दावेदारों में अश्विन जोशी के बाद पिंटू जोशी, अरविंद बागड़ी ही रहे हैं। पिंटू साल 2023 का चुनाव 14 हजार वोट से हारे, जो इस विधानसभा क्षेत्र की वोटों के लिहाज से बड़ी हार थी। वहीं हार्ट अटैक के बाद जिस तरह से पिंटू बचे हैं और स्वास्थ्य के चलते बहुत ज्यादा सक्रिय नहीं रहे हैं, ऐसे में मनप्रीत का नाम उठा है।
स्वर्गीय जोशी के कई पुराने सहयोगी उन्हें आगे आने के लिए लगातार कह रहे हैं और हर मदद का आश्वासन दिया हुआ है। महिला आरक्षण आता है तो फिर उनकी दावेदारी और मजबूत होगी। ऐसे में पिंटू के लिए साल 2028 में टिकट की दावेदारी इनती आसान नहीं रहने वाली है।
आगे क्या रहेगी तस्वीर
साल 2028 के विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं। लेकिन इंदौर विधानसभा तीन में अभी से सियासी सरगर्मी दिखने लगी है। पिंटू जोशी के लिए टिकट की राह पहले जितनी आसान नहीं दिख रही। वहीं मनप्रीत जोशी की सक्रियता नए समीकरण बना सकती है। कांग्रेस आलाकमान आने वाले समय में इस पर फैसला लेगा। तब तक यह सिर्फ कयासों का विषय बना रहेगा।
स्थानीय राजनीति में यह चर्चा अगले कुछ महीनों तक गर्म रह सकती है। पार्टी के भीतर भी इस मुद्दे पर अलग-अलग राय देखने को मिल रही है। कुछ कार्यकर्ताओं का कहना है कि परिवार की सहानुभूति भी मायने रखती है। वहीं कुछ नेता संगठन में लंबे अनुभव को ज्यादा अहम मानते हैं। फिलहाल कांग्रेस की तरफ से कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया गया है। आने वाले महीनों में यह तस्वीर और साफ हो सकती है।
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