इंदौर-अबू धाबी इंटरनेशनल फ्लाइट से सोना तस्करी नेटवर्क में कस्टम कर्मचारी भी शामिल
डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) ने तीन अगस्त को इंदौर के देवी अहिल्याबाई होलकर इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Indore Airport) पर सोना तस्करी का मामला पकड़ा था। जांच में करीब 1 करोड़ 28 लाख रुपए कीमत का 1 किलो सोना बरामद हुआ।
इस मामले में यात्री के साथ एक कारोबारी और उसका मध्यस्थ भी पकड़ा गया। पूछताछ के दौरान पता चला कि इस पूरे नेटवर्क में कस्टम विभाग का एक एग्जीक्यूटिव असिस्टेंट भी शामिल था।
डीआरआई को मिली खुफिया जानकारी
विभाग को खास जानकारी मिली थी कि इंदौर के देवी अहिल्याबाई होलकर (DABH) इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सोने की तस्करी करने वाला एक संगठित गिरोह सक्रिय है। DRI की कड़ी निगरानी और जांच से यह भी पता चला कि एयरपोर्ट पर काम करने वाले कुछ अधिकारी सोने की तस्करी में इस गिरोह की मदद कर रहे थे।
तस्करी में कस्टम का एग्जीक्यूटिव असिस्टेंट शामिल
डीआरआई ने आबू धाबी से सोना लेकर इंदौर पहुंचे यात्री गोविंद पोरवाल (डीआरआई की कार्रवाई) को पकड़ा। साथ ही इसमें कारोबारी संजय मुंजे, साथी अमन गेहलोत को भी पकड़ा। इसके साथ ही इस गिरोह में एयर इंडिया एक्सप्रेस का कर्मचारी वासुदेव बरनाले भी शामिल था। जांच और आगे बढ़ी तो इसमें कस्टम का एग्जीक्यूटिव असिस्टेंट अजय सेन (उम्र 56 साल) भी शामिल मिला।
इस तरह सोने को लाते थे एयरपोर्ट से बाहर
गोविंद पोरवाल, यात्री- यह यात्री (केरियर) सोने को आबू धाबी की फ्लाइट से लेकर इंदौर एयरपोर्ट पहुंचा।
वासुदेव बरनाले, एयरपोर्ट कर्मचारी- फ्लाइट से बाहर आते ही कस्टम जांच के पहले ही यात्री एयरोब्रिज पर एयर इंडिया एक्सप्रेस कर्मचारी वासुदेव बरनाले को यह सोना दे देता था।
मुंजे, गेहलोत- बरनाले एयरोब्रिज के पास सीढ़ियों से ही टरमैक (जहां फ्लाइट पार्क होती है) वहां उतर जाता था। वह इमिग्रेशन और कस्टम से बचा हुआ सोना एयरपोर्ट से बाहर आकर पार्किंग में बैठे मुंजे और गेहलोत को देता था। फिर यह सोना लेकर निकल जाते थे।
डीआरआई ने इस तरह सभी को धरा
डीआरआई को मिली खुफिया जानकारी के बाद तीन अगस्त को देवी अहिल्याबाई होलकर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्टपर टीम ने निगरानी शुरू की। जांच में पता चला कि गिरोह के सदस्य मुंजे और गेहलोत ने पार्किंग में नीले रंग की कार खड़ी की थी। इसी दौरान एयर इंडिया एक्सप्रेस का कर्मचारी बरनाले वहां पहुंचा और यात्री पोरवाल से लाया गया सोना कार में पहुंचा दिया।
जैसे ही कार वहां से निकलने लगी, डीआरआई की टीम ने एग्जिट पॉइंट पर घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया। इसके बाद बरनाले और यात्री पोरवाल को भी हिरासत में लिया गया। जांच में मुंजे और गेहलोत के पास चांदी जैसे दिखने वाले दो कड़े मिले। जब उनकी जांच की गई तो वे सोने के निकले। इनका वजन करीब एक किलो था और यह 24 कैरेट शुद्ध सोना था, जिसकी कीमत करीब 1 करोड़ 44 लाख रुपए बताई गई।
पूछताछ में इस पूरे नेटवर्क के मुख्य साथी के रूप में कस्टम विभाग के अजय सेन का नाम सामने आया।
कस्टम कर्मचारी 10 हजार में देता था खुफिया जानकारी
डीआरआई की पूछताछ में अजय सेन का नाम सामने आने के बाद उसे पूछताछ के लिए बुलाया गया और फिर गिरफ्तार (इंदौर में सोना तस्करी का आरोपी गिरफ्तार) कर लिया गया। जांच में पता चला कि सेन सोना तस्करी करने वाले गिरोह को डीआरआई और कस्टम की जांच प्रक्रिया और ड्यूटी से जुड़ी अंदरूनी जानकारी देता था। इसके बदले उसे हर यात्रा में सोने की तस्करी पर 10 हजार रुपए कमीशन मिलता था।
जांच में सामने आया कि इसी कमीशन के लालच में सेन ने गिरोह को जरूरी जानकारी पहुंचाई। सोना तस्करी (Indore News) की पूरी योजना बनाने के लिए सभी आरोपी 13 जुलाई को मिले थे। इसके बाद अबू धाबी से सोना इंदौर लाया गया। फिलहाल डीआरआई पूरे नेटवर्क की आगे जांच कर रही है।
तीन किलो सोना भी डीआरआई ने पकड़ा था
हाल ही में डीआरआई ने महाराष्ट्र के अकोला से आ रहे तीन किलो सोने की तस्करी ( gold smuggling) भी पकड़ी थी। इस मामले में सराफा कारोबारी पिता-पुत्र दीपक और नकुल खंडेलवाल की भूमिका सामने आई थी। जांच के बाद दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया है।
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