भागीरथपुरा में अब 16 मौत मानी, हाईकोर्ट ने डेथ आडिट पर उठाए सवाल

The Sootr | Jan 27, 2026, 17:40 IST
Photograph: (the sootr)
इंदौर भागीरथपुरा में दूषित पानी से 16 मौतें सरकारी रिपोर्ट में सरकार ने मानी है। हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई में डेथ ऑडिट और पानी की जांच पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

NEWS IN SHORT

  • भागीरथपुरा दूषित पानी मामले में सरकार ने 16 मौतें आधिकारिक रूप से स्वीकार कीं।
  • हाईकोर्ट ने डेथ ऑडिट रिपोर्ट की प्रक्रिया और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए।
  • पानी जांच रिपोर्टों में नगर निगम और प्रदूषण बोर्ड के दावों में विरोधाभास सामने आया।
  • कोर्ट ने स्थिति को अलार्मिंग बताते हुए साफ पानी को मौलिक अधिकार कहा।
  • मृतकों के परिजनों को दस लाख मुआवजा और मुफ्त इलाज की मांग तेज हुई।

NEWS IN DETAIL

indore. इंदौर भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों को लेकर एक बार फिर हाईकोर्ट इंदौर में लंबी बहस हुई। मंगलवार 27 जनवरी को करीब पौने दो घंटे सुनवाई चली। इस दौरान राज्य सरकार ने माना कि उसने 23 डेथ का एनालिस किया है। इसमें 16 मौतें दूषित पानी से हुई हैं। बाकी पांच मौत का एनालिस होना बाकी है।



बता दें कि इंदौर के भागीरथपुरा में अभी तक कुल 28 मौत हो चुकी हैं। 450 मरीजों का अस्पताल में उपचार हो चुका है। आठ मरीज अभी भी भर्ती हैं।



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कोर्ट में रिपोर्ट पर ही उठ गए सवाल

भागीरथपुरा कांड मामले की सुनवाई हाईकोर्ट जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच में हुई। इस दौरान इस डेथ आडिट पर सवाल खड़े हो गए। बेंच ने पूछा कि यह कमेटी आखिर इन 16 मौतों तक कैसे पहुंची? इसके क्या ठोस आधार थे? इसमें वर्बल आटोप्सी जैसे शब्द और सीएमएचओ से मिली जानकारी के आधार पर भी सवाल खड़े हुए।



वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागड़िया ने कहा कि जो कमेटी बनी, वह भी सरकारी मेडिकल प्रोफेसर की है, तो रिपोर्ट कैसे सही मानी जा सकती है? इस पर आखिर में तय हुआ कि पूरी डिटेल रिपोर्ट अगली सुनवाई में पेश की जाएगी। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि यह साफ होना चाहिए कि आखिर मौत किस वजह से हुई और इसे मानने का ठोस कारण क्या था? जो मौत इस दूषित पानी से नहीं मानी गईं, उन्हें नहीं मानने की ठोस वजह क्या थी?



सैंपल लिए गए पानी की रिपोर्ट पर भी सवाल

वहीं पानी की सैंपल रिपोर्ट पर भी सवाल हुए। नगर निगम के अधिवक्ता ने बताया कि एरिया में 26 किमी लंबा पानी का नेटवर्क है। जिसमें 9.5 किमी पाइप लाइन बदली जा चुकी है। आठ पैरामीटर्स पर पानी की जांच की गई और यह सही पाई गई। इस पर बागड़िया ने आपत्ति लेते हुए कहा कि प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने 34 मानकों पर जांच की थी और पानी को सही नहीं पाया था। निगम केवल 8 मानकों पर जांच कर पानी की सप्लाई कर रहा है। इस पर और पानी की रिपोर्ट जांचने की भी बात कही गई।



हाईकोर्ट ने जताई चिंता, यह अलार्मिंग स्थिति

हाईकोर्ट जस्टिस ने सुनवाई के दौरान कहा कि साफ पानी का मुद्दा गंभीर बात है। इसलिए इसे सुओ मोटो लिया है। बात सामने आते ही हमने तत्काल हाईकोर्ट का वाटर टैंक चेक कराया। अभी महू में भी यही बात सामने आई। यह अलार्मिंग स्थिति है। सरकार जनता के लिए हैं और तय होना चाहिए कि साफ पानी मिले।



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जो मौतें मानीं, उन्हें दस लाख का मुआवजा दिया जाए

वहीं यह बात भी अधिवक्ताओं ने कही कि दूषित पानी से जो मौतें मान ली हैं, उनके परिजनों को तो मुआवजा दिया जाए। अभी तो केवल रेडक्रास से राहत राशि के दो-दो लाख जारी किए गए हैं। लोगों को राहत राशि के लिए चक्काजाम करना पड़ रहा है। मुआवजा कम से कम दस लाख हो। लोगों को निशुल्क उपचार मिले। साफ पानी मिले और जिम्मेदारों पर आपराधिक कार्रवाई हो। अधिवक्ता विभोर खंडेलवाल ने कहा कि पूरे टेंडर की कापी और अन्य रिपोर्ट भी याचिकाकर्ताओं को दी जाए। अधिवक्ता मनीष यादव, रितेष ईनानी ने भी तर्क रखे।





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