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News In Short
भागीरथपुरा में कांग्रेस नेता राजाराम बोरासी की 25 जनवरी को मौत हुई, यह 28वीं मौत है।
परिजनों का आरोप, गंदे पानी के कारण स्वास्थ्य बिगड़ा, जबकि प्रशासन ने हार्ट बीमारी बताया है।
स्वास्थ्य विभाग ने मेडिकल रिपोर्ट में उल्टी-दस्त की बात को खारिज किया है।
प्रशासन ने पहले 4 मौतों का भी खंडन किया, सभी को अन्य बीमारी से मौत बताया गया है।
हाईकोर्ट ने मौतों के आंकड़ों पर सवाल उठाए, मुआवजा राशि का वितरण अभी तक नहीं हुआ है।
News in Detail
INDORE. भागीरथपुरा में रविवार, 25 जनवरी की सुबह कांग्रेस नेता राजाराम बोरासी की मौत ने बवाल मचा दिया है। वे सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में भर्ती थे। यह 28वीं मौत थी। लेकिन जैसे ही मौत की खबरें आईं, तत्काल स्वास्थ्य विभाग ने उनकी मेडिकल रिपोर्ट निकाली और खंडन करना शुरू कर दिया। वहीं, परिजनों का आरोप है कि यह सब गंदे पानी से हुआ है।
इनका हुआ निधन
भागीरथपुरा निवासी राजाराम बोरासी, उम्र 75 साल, कांग्रेस के वार्ड अध्यक्ष थे। साथ ही, महिला कांग्रेस अध्यक्ष रीना बौरासी के दूर के रिश्ते में भी लगते थे। वे पहले कांग्रेस से विधायक रहे संजय शुक्ला का काम देखते थे, लेकिन उनके बीजेपी में जाने के बाद भी कांग्रेस के लिए सक्रिय थे। इन्होंने ही भागीरथपुरा की घटना को लेकर लगातार मुखर होकर गंदे पानी को उजागर किया था।
परिजन क्या बोल रहे हैं
उनके बेटे नीरज बौरासी ने द सूत्र से कहा कि वे हार्ट के मरीज थे, लेकिन वे काफी समय से इलाज ले रहे थे। करीब दस दिन पहले गंदे पानी के चलते उल्टी-दस्त हुए और वे संजीवनी क्लिनिक गए थे और दवा लेकर आए थे। इसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ी और वे सुपर स्पेशलिटी में भर्ती हो गए थे। वहां बताया गया कि निमोनिया के कारण हार्ट कम काम कर रहा था। इसके बाद सुबह उनका निधन हो गया। लेकिन इसकी शुरुआत उल्टी-दस्त से हुई थी और तभी से उनकी तबीयत खराब हुई थी।
स्वास्थ्य विभाग का खंडन
सीएमएचओ डॉ. माधव हसानी ने इनकी मौत को लेकर खंडन जारी किया है। उन्होंने कहा कि साल 2018-19 में उनकी एंजियोग्राफी हुई थी। उन्हें हाई बीपी और हार्ट की बीमारी थी। अभी के भर्ती दस्तावेज में कहीं भी उल्टी-दस्त की बात नहीं है, यह मेडिकल रिपोर्ट से स्पष्ट है। यह मौत दूषित पानी से नहीं हुई है।
बीती पांच मौतों का लगातार खंडन
स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन द्वारा खंडन की गई मौतों में यह पांचवी है। इससे पहले सुभद्राबाई, विद्या बाई, हेमंत गायकवाड़ और बद्री प्रसाद की मौतों का भी खंडन जारी किया जा चुका है। इन्हें डायरिया से मौत नहीं माना गया है। बद्री प्रसाद की मौत को लेकर भी हंगामा हुआ था और परिजनों ने अर्थी रखकर 24 जनवरी को विरोध प्रदर्शन किया था।
इन मौतों को लेकर खंडन जारी किया गया
सुभद्राबाई, उम्र 78 साल, की मौत 15 जनवरी को हुई, इसका खंडन जारी किया गया और अन्य बीमारी के कारण मौत बताया है।
हेमंत गायकवाड़, उम्र 51 साल, की मौत 21 जनवरी को हुई, प्रशासन ने कारण इसका कैंसर और अन्य बीमारी बताया है।
विद्याबाई, उम्र 82 साल, की मौत 22 जनवरी को हुई, इसका कारण अन्य बीमारियां बताया गया है।
बद्री प्रसाद, उम्र 63 साल, की मौत 23 जनवरी को हुई, इसका कारण भी अन्य बीमारियां बताया गया है।
राजाराम बोरासी, उम्र 75 साल, की मौत 25 जनवरी को हुई, कारण हृदय रोग बताया गया है।
मौतों के आंकड़ों पर शुरू से ही चुप्पी रही
प्रशासन और शासन ने इस कांड के कारण मौतों के आंकड़ों पर हमेशा चुप्पी साधे रखी है। सीएम डॉ. मोहन यादव से जब सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा था कि हम आंकड़ों में नहीं पड़ रहे और सभी की मदद की जा रही है। पहली सुनवाई में हाईकोर्ट में प्रशासन ने चार मौतें बताई और बाद में अगली सुनवाई में 15 बताई गई थी।
उधर, राहुल गांधी से मुलाकात के दौरान रहवासी 50 से अधिक मौत होने का दावा कर चुके हैं। वहीं, अब जो भी मौत होती है उसका खंडन प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के जरिए जारी किया जा रहा है। करीब 20 लोगों को दो-दो लाख की आर्थिक सहायता दी गई है।
वहीं, अभी तक मुआवजा राशि का वितरण नहीं हुआ। ना ही इस राशि को लेकर कोई खुलासा हुआ है कि कब और कितनी दी जाएगी। इन सभी मौतों को लेकर हाईकोर्ट लगातार सवाल कर रहा है, लेकिन अभी कोई जवाब नहीं मिला है।
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