भागीरथपुरा में अब डायरिया से मौतों के खंडन में जुटे अधिकारी, विरोध में उतरे रहवासी, 4 मौत नहीं मानी

भागीरथपुरा कांड में अब तक 27 लोगों की मौत हो चुकी हैं। प्रशासन ने 21 मौतों का डेथ ऑडिट 12 जनवरी तक कराया था। 21 में से 15 मौतें डायरिया से होना माना गया था। मृतक बद्रीप्रसाद की अर्थी रखकर विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है।

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Sanjay Gupta
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News In Short

  • भागीरथपुरा कांड में अब तक 27 लोगों की मौत हो चुकी है।
  • प्रशासन ने 21 मौतों का डेथ ऑडिट कराया था जो 12 जनवरी तक हुई थीं। इनमें से 15 मौतें डायरिया से मानी गई थीं।
  • बीती चार मौतों को लेकर प्रशासन लगातार खंडन जारी कर रहा है।
  • अभी तक 450 मरीज अस्पताल में भर्ती हो चुके हैं, जिनमें अभी भी 10 मरीज भर्ती हैं।
  • मृतक बद्रीप्रसाद की अर्थी रखकर विरोध प्रदर्शन हो रहा है।

News In Detail

INDORE. इंदौर के भागीरथपुरा में लाख दावे के बाद भी हालत बेहतर नहीं हुए हैं। अब तक 27 मौत हो चुकी हैं, 450 लोग अस्पताल में भर्ती हो चुके हैं। अब बीती चार मौतों पर लगातार अधिकारी खंडन प्रेस नोट जारी कर रहे हैं। इससे रहवासी भड़क गए हैं। शनिवार, 24 जनवरी को एक मृतक के परिजन अर्थी रखकर विरोध प्रदर्शन पर उतर आए हैं। अभी भी अस्पतालों में दस मरीज हैं। इनमें से एक वेंटिलेटर पर और एक आईसीयू में है।

मृतक की अर्थी रखकर विरोध, पार्षद के खिलाफ नारेबाजी

बद्रीप्रसाद की मौत को डायरिया से नहीं मानने के चलते परिजन और रहवासी नाराज हैं। उनकी मौत 23 जनवरी को हुई थी। प्रशासन ने इसका कारण टीबी और अन्य पूर्व की गंभीर बीमारियों को बताया है। उन्हें कोई आर्थिक मदद नहीं मिली है।

इससे नाराज होकर परिजन और रहवासी भागीरथपुरा चौकी पर उनकी अर्थी रखकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। पार्षद कमल वाघेला के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी मौतों की निष्पक्ष जांच और उचित आर्थिक सहायता की मांग कर रहे हैं।

इन मौतों को लेकर खंडन जारी किया गया

  1. सुभद्राबाई उम्र 78 वर्ष, की मौत 15 जनवरी को हुई। इसका खंडन जारी किया और अन्य बीमारी के कारण मौत बताया है।

  2. हेमंत गायकवाड़ उम्र 51 साल, की मौत 21 जनवरी को हुई। प्रशासन ने इसका कारण कैंसर और अन्य बीमारी बताया है।

  3. विद्याबाई उम्र 82 साल, की मौत 22 जनवरी को हुई। इसका कारण अन्य बीमारियां बताया गया है।

  4. बद्री प्रसाद उम्र 63 साल, की मौत 23 जनवरी को हुई। इसका कारण भी अन्य बीमारियां बताया गया है।

मौतों पर इस तरह खंडन जारी कर रहा प्रशासन

हेमंत गायकवाड़ के परिजनों का कहना है कि 22 दिसंबर को वह दूषित पानी के कारण बीमार हुए थे। अस्पताल में भर्ती कराया गया था। फिर वह 28 दिसंबर को डिस्चार्ज हुए। दोबारा हालत बिगड़ने पर 7 जनवरी को अरविंदो अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। परिजनों का कहना है कि एरिया में लंबे समय से दूषित पानी की समस्या है। यदि समय पर निराकरण होता तो हमारे पिता आज जिंदा होते। 

उधर प्रशासन ने खंडन जारी किया कि उनकी मौत कार्डियो पल्मोनरी अरेस्ट से हुई थी। वह कैंसर से पीड़ित थे। सीएमएचओ डॉ. माधव हसानी ने कहा कि वास्तविक कारण कैंसर था। पहले डायरिया के कारण भर्ती हुए थे। उससे वह पूरी तरह स्वस्थ हो चुके थे।

बद्री प्रसाद की मौत के बाद परिजन शनिवार, 24 जनवरी को उनकी अर्थी रखकर विरोध कर रहे हैं। बेटे शैलेंद्र ने कहा कि चार जनवरी को उल्टी-दस्त के चलते एमवाय अस्पताल में भर्ती कराया था। फिर 17 जनवरी को उन्हें डिस्चार्ज किया गया। 17 जनवरी को फिर तबीयत बिगड़ी और अरविंदो अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां निधन हो गया। बीमार होने से पहले वह स्वस्थ थे और मजदूरी करते थे। उन्हें पहले कभी टीबी की शिकायत नहीं रही। प्रशासन ने मौत का कारण टीबी और अन्य बीमारी बताया। 

वहीं सीएमएचओ डॉ. माधव हसानी ने कहा कि बद्री प्रसाद को सांस की समस्या के कारण भर्ती कराया गया था। उन्हें पहले से ही कई गंभीर बीमारियां थीं, जिनमें टीबी, पूर्व में एंजियोग्राफी, शुगर और अन्य शामिल हैं। उनका निधन जलजनित बीमारी से नहीं हुआ है।

सुभद्रा बाई की मौत को लेकर प्रशासन ने खंडन नोट जारी किया

इसमें कहा गया कि उनके पुत्र डॉ. सतीश पंवार खुद एनेस्थीसिया के विशेषज्ञ हैं। उन्होंने सीएमएचओ को अवगत कराया कि उनकी माताजी पूर्व से हृदय रोग से पीड़ित थीं। इस कारण से ही उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया था। उनकी मौत दूषित पानी से नहीं जुड़ी थी।

जो गंभीर बीमारियां, उनके कारण भी दूसरे बताए गए

इसके साथ ही प्रशासन ने अन्य भर्ती गंभीर मरीजों के कारण भी दूसरी बीमारियां बताई है। इसमें कहा गया कि अपोलो अस्पताल में भर्ती पुरुष मरीज किडनी बीमारी से ग्रसित हैं। केयर सीएचएल में 23 वर्षीय महिला एमटीबी और अन्य बीमारी से पीड़ित हैं। अरविंदो अस्पताल में एक महिला एमटीबी और वायरल हेपेटाइटिस से, जबकि 66 साल की एक महिला लिवर में सूजन से पीड़ित हैं।

मौतों के आंकड़ों पर शुरू से ही चुप्पी रही

प्रशासन और शासन ने इस कांड के कारण मौतों के आंकड़ों पर हमेशा चुप्पी साधे रखी। सीएम डॉ. मोहन यादव से जब सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा था कि हम आंकड़ों में नहीं पड़ रहे हैं। सभी की मदद की जा रही है। पहली सुनवाई में हाईकोर्ट में प्रशासन ने चार मौतें बताई थीं। बाद में अगली सुनवाई में 15 बताई गई। उधर राहुल गांधी से मुलाकात के दौरान रहवासी 50 से अधिक मौत होने का दावा कर चुके हैं।

वहीं अब जो भी मौत होती है उसका खंडन प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी किया जा रहा है। करीब 20 लोगों को दो-दो लाख की आर्थिक सहायता दी गई है। अभी तक मुआवजा राशि का वितरण नहीं हुआ और ना ही इस राशि को लेकर कोई खुलासा हुआ है कि कब और कितनी देंगे। इन सभी मौतों को लेकर हाईकोर्ट लगातार सवाल कर रहा है, लेकिन अभी कोई जवाब नहीं मिला है।

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