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News In Short
इंदौर की घटना के बाद नगरीय प्रशासन विभाग अलर्ट हुआ।
इसके लिए AMRUT REKHA पोर्टल और मोबाइल ऐप किया तैयार किया गया है।।
413 निकायों की वाटर-सीवर लाइन की डिजिटल मैपिंग होगी।
इंटरसेक्शन पॉइंट्स पर रोबोटिक सिस्टम से जांच होगी।
ओवरहेड टैंक की सफाई का वीडियो पोर्टल पर होगा।
News In Detail
इंदौर में दूषित पानी ने अब तक 24 जानें ले ली हैं। सरकार ने इस घटना को देखते हुए कड़ा रुख अपनाया है। नगरीय प्रशासन विभाग अब बड़ा कदम उठा रहा है। प्रदेश की जल व्यवस्था को अब पूरी तरह बदला जाएगा।
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413 निकायों की डिजिटल मैपिंग
जीआईएस एक्सपर्ट देवराज त्रिपाठी ने बताया कि अब 413 नगरीय निकायों का डेटा ऑनलाइन होगा। इसमें नगर निगम (Municipal Council) और नगर पालिकाएं शामिल होंगी। वाटर सप्लाई का पूरा रूट-मैप पोर्टल पर अपलोड होगा। डिजिटल मैप से नेटवर्क की निगरानी आसान होगी।
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अमृत रेखा पोर्टल की शुरुआत
विभाग ने AMRUT REKHA पोर्टल तैयार किया है। इसके साथ ही एक मोबाइल ऐप भी बनाया गया है। इसमें सीवेज लाइन की मैपिंग की जा रही है। फील्ड इंजीनियर अब डिजिटल निगरानी करेंगे। डेटा के आधार पर तुरंत कार्रवाई संभव होगी।
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रोबोट करेंगे लीकेज की जांच
जहां पाइप लाइनें आपस में मिलती हैं, वहां खतरा होता है। इन पॉइंट्स को पोर्टल पर येलो मार्क मिलेगा। यहां रोबोटिक सिस्टम से लीकेज चेक होगा। बिना खुदाई के ही खराबी का पता चल सकेगा। इससे समय और पैसा दोनों की बचत होगी।
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टैंकों की सफाई की मॉनिटरिंग
अब ओवरहेड टैंक की निगरानी और भी सख्त होगी। सफाई के पैरामीटर्स का पालन करना अनिवार्य है। सफाई का वीडियो पोर्टल पर डालना पड़ेगा। फील्ड इंजीनियर ग्राउंड पर वेरिफिकेशन भी करेंगे।
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दो हिस्सों में काम करेगा सिस्टम
वेब पोर्टल पर नेटवर्क का पूरा डेटा रहेगा। अधिकारियों के लिए यह पोर्टल बहुत उपयोगी है। मोबाइल ऐप से फील्ड की मॉनिटरिंग होगी। लीकेज मिलते ही तुरंत मरम्मत कराई जाएगी। यह तकनीक जल संकट को रोकने में सहायक है।
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राहुल गांधी के सामने रहवासियों ने लगाए ये आरोप
रहवासियों ने राहुल गांधी से मुलाकात के दौरान कहा कि भागीरथपुरा शमशान बन गया है। लोग 22 दिसंबर से ही बीमार होने लगे थे। पानी की शिकायतें तो पिछले 6 महीनों से हो रही थीं। वहीं, जब 200 से 250 लोग अस्पतालों में पहुंचे, तब जाकर प्रशासन ने संज्ञान लिया है।
रहवासियों ने आरोप लगाया कि मौतें छिपाई जा रही हैं। साथ ही, 50 से अधिक मौतें हो चुकी हैं। लाशों को उनके गांव चुपचाप पहुंचा दिया गया है। शमशान घाट का रजिस्टर 28 दिसंबर को ही गायब कर दिया गया, ताकि मौतों का सही आंकड़ा सामने न आ सके। पीड़ितों ने कहा कि उन्हें सिर्फ साफ पानी चाहिए
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