इंदौर बिल्डर ने खरीदी वक्फ बोर्ड की 100 करोड़ की जमीन! अब FIR की तैयारी

Sanjay Gupta | Sept 25, 2026, 14:23 IST
इंदौर के बिल्डर ने देवास में वक्फ बोर्ड की 100 करोड़ की जमीन खरीद ली है। Photograph: (The Sootr)
इंदौर के एक बिल्डर ने देवास में वक्फ बोर्ड की 100 करोड़ रुपए से अधिक कीमत की जमीन खरीद ली है। अब इस मामले में सभी दस्तावेजों के साथ मप्र वक्फ बोर्ड ने उज्जैन संभागायुक्त, देवास कलेक्टर व एसपी को एफआईआर दर्ज कराने के लिए लिखा है।

इंदौर: मध्यप्रदेश के नव नियुक्त वक्फ बोर्ड ने भूमाफियाओं के खिलाफ अभियान शुरू कर दिया है। इसके तहत बोर्ड की जमीन खरीदने और बेचने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई की जा रही है।



इसी कड़ी में मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड के सदस्य मनोज मालपानी ने संभागायुक्त उज्जैन, देवास कलेक्टर और एसपी को सभी दस्तावेजों के साथ लिखित शिकायत भेजी है। शिकायत मिलने के बाद देवास कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने जमीन के नामांतरण पर रोक लगा दी है।



एवी इन्फ्रा ने खरीदी जमीन

यह जमीन देवास जिले की देवास तहसील के बिलावली गांव में स्थित है। सर्वे नंबर 203 की करीब पांच हेक्टेयर जमीन की कीमत 100 करोड़ रुपए से ज्यादा बताई जा रही है। यह जमीन नगरीय सीमा क्षेत्र में आती है।



इस जमीन को इंदौर की एवी इन्फ्रा कंपनी के आशीष खंडेलवाल और अनुत्तम भट्ट ने खरीदा है। जमीन को इनाम खिदमत इरफान अहमद पिता काजी हकीम निसार अहमद ने अपनी निजी पैतृक संपत्ति बताकर बेचा है।



12 साल में चेक से भुगतान का दावा

इस जमीन की रजिस्ट्री 29 अगस्त 2025 को देवास में हुई थी। रजिस्ट्री दस्तावेजों के अनुसार, एवी इन्फ्रा ने यह जमीन 5 करोड़ 65 लाख रुपए में खरीदी है।



दस्तावेजों में इस राशि का भुगतान 12 साल की अवधि में चेक के जरिए किए जाने का उल्लेख है। रिकॉर्ड के मुताबिक, दिसंबर 2014 में पहला चेक 15 लाख रुपए का जारी किया गया था।



इसके बाद अगस्त 2015, अप्रैल, मई और सितंबर 2017, मार्च और सितंबर 2018, अप्रैल 2019 से लेकर जनवरी 2025 तक अलग-अलग तारीखों में चेक जारी किए गए। इस तरह कुल 21 चेक के जरिए भुगतान किए जाने की बात कही गई है।



यानी जमीन का सौदा करीब 12 साल तक चलता रहा और इसके बाद रजिस्ट्री कराई गई।



हाईकोर्ट में लगाई थी याचिका, फिर वापस ली

इस मामले में एवी इन्फ्रा और अनुत्तम भट्ट ने नामांतरण नहीं होने को लेकर हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में याचिका दायर की थी।



याचिका में देवास कलेक्टर, तहसीलदार और अन्य अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया था। मामले में शासन की ओर से अधिवक्ता प्रद्युम्न मालपानी और शरद यादव ने तर्क रखे थे।



हालांकि, बाद में याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका वापस लेने की बात कही। इसके बाद जस्टिस संदीप एन. भट्ट ने याचिका खारिज कर दी।



क्या बोले देवास कलेक्टर

देवास कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने बताया कि यह जमीन पहले देवास डेवलपमेंट अथॉरिटी की योजना में शामिल थी। बाद में यह योजना खत्म हो गई।



इसके बाद संबंधित व्यक्ति ने जमीन बेच दी। शिकायत मिलने के बाद जमीन का नामांतरण रोक दिया गया है।



कलेक्टर ने बताया कि जानकारी में आया है कि जमीन के स्वामित्व को लेकर विवाद कोर्ट में चल रहा है। कोर्ट से स्थिति स्पष्ट होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।



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