नेता प्रतिपक्ष सोनिला मिमरोट ने सोमवार को रावण का पुतला जलाया
इंदौर कांग्रेस को झटका, राज्य निर्वाचन आयोग ने तीन पार्षदों के दल बदलने पर खारिज की मांग
Sanjay Gupta | Sootr Creatives | Oct 19, 2026, 14:00 IST
इंदौर में कांग्रेस को झटका, 19 से घटकर 14 रह गए पार्षद
इंदौर में कांग्रेस के पार्षदों की संख्या लगातार घट रही है। जुलाई 2022 के चुनाव में कांग्रेस के 19 पार्षद चुने गए थे। अब इनकी संख्या घटकर 14 रह गई है। कांग्रेस के दो पार्षदों की सदस्यता पहले ही शून्य घोषित हो चुकी है। वहीं, तीन पार्षद बीजेपी में शामिल हो गए हैं।
इस मामले में कांग्रेस ने लगातार शिकायतें की थीं। पार्टी ने दल-बदल कानून के तहत सदस्यता खत्म करने की मांग की थी। अब इस मामले में राज्य निर्वाचन आयोग ने फैसला सुना दिया है।
साल 2022 में कांग्रेस के टिकट पर तीन उम्मीदवारों ने चुनाव जीता। वार्ड 15 से ममता सुभाष सुनेर, वार्ड 17 से शिवम यादव और वार्ड 23 से विनीता धर्मेंद्र मौर्य जीते। लेकिन चुनाव जीतने के बाद तीनों ने बीजेपी की सदस्यता ले ली। इस दौरान एक कार्यक्रम में सीएम डॉ. मोहन यादव और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी मौजूद थे।
इसके बाद तत्कालीन महिला कांग्रेस अध्यक्ष सोनिला मिमरोट ने राज्यपाल से शिकायत की। अब मिमरोट निगम में नेता प्रतिपक्ष हैं। लेकिन इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद मिमरोट ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। उन्होंने याचिका में दो महीने के भीतर फैसला लेने की मांग की। इसके बाद मिमरोट की शिकायत राज्य निर्वाचन आयोग पहुंची थी।
मिमरोट ने तीनों पार्षदों की सदस्यता रद्द करने की मांग की है। उन्होंने दल-बदल कानून के तहत यह मांग रखी है। राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी पक्षों को सुना। इसके बाद आयोग ने शिकायत खारिज कर दी है। आयोग ने कहा कि दल-बदल कानून सांसदों और विधायकों पर लागू होता है। यह कानून स्थानीय निकाय चुनावों पर लागू नहीं होता। इसलिए तीनों पार्षदों की सदस्यता रद्द नहीं की जा सकती।
इससे पहले कांग्रेस के वार्ड 58 के पार्षद अनवर कादरी उर्फ डकैत की पार्षदी जा चुकी है। सुनेहरा अंसारी को बाद में हाई कोर्ट से स्टे मिल गया था। वो अभी पार्षद बची हुई है। कादरी पर लव जिहाद के लिए फंडिंग करने के आरोप लगे थे। इसके बाद उनका पूरा आपराधिक रिकॉर्ड सामने आया। संभागायुक्त ने उनकी पार्षदी शून्य घोषित कर दी थी। साथ ही, उन्हें छह साल के लिए अयोग्य घोषित करने का आदेश दिया। हालांकि, कादरी ने शासन के पास अपील की है। इसी तरह, नामांकन पत्र में सही जानकारी नहीं भरने का मामला सामने आया है। इसके चलते जिला कोर्ट ने अंसारी की पार्षदी शून्य घोषित कर दी।
2023 के विधानसभा चुनाव के बाद से कांग्रेस को लगातार झटके लग रहे हैं। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार अक्षय कांति बम ने नामांकन वापस ले लिया। इसके बाद वे बीजेपी में शामिल हो गए। विधानसभा चुनाव लड़ चुके संजय शुक्ला भी बीजेपी में जा चुके हैं।
विशाल पटेल, रामकिशोर शुक्ला और राजा मंधवानी भी बीजेपी ज्वाइन कर चुके हैं। इनके अलावा कई नेता कांग्रेस का साथ छोड़ चुके हैं। हालांकि, हाल ही में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने एक बयान दिया। उन्होंने कहा कि कई नेता फिर से कांग्रेस में लौटना चाहते हैं।
नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष सोनिला मिमरोट ने सोमवार को रावण का पुतला जलाया। इस पुतले का नाम मित्रासुर रखा गया था। इस दौरान प्रदर्शन से ज्यादा नेताओं और पार्षदों की गैरमौजूदगी चर्चा में रही। प्रदर्शन में मुश्किल से एक दर्जन कार्यकर्ता ही शामिल हुए। सिर्फ पार्षद सादिक खान उनके साथ पहुंचे।
मिमरोट के नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद से निगम के खिलाफ प्रदर्शनों में नेता शामिल नहीं हो रहे हैं। इससे पहले शहराध्यक्ष चिंटू चौकसे ही नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। इस पर मिमरोट ने कहा कि कांग्रेस में सभी एकजुट हैं। उन्होंने बताया कि रामनवमी की पूजा के कारण नेता नहीं आ सके। इसकी सूचना भी उन्होंने पहले ही दे दी थी।
मिमरोट ने पुतले का नाम मित्रासुर रखने के पीछे किसी का नाम बताने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि शहर के लोग खुद तय करें कि किसने मित्र की जगह शत्रु जैसा काम किया है। उन्होंने भागीरथपुरा और बावड़ी कांड का भी जिक्र किया। मिमरोट ने कहा कि शहर में लगातार गंदा पानी सप्लाई हो रहा है। इसके बावजूद जिम्मेदार लोगों को कोई सजा नहीं मिल रही है।
यह है तीन पार्षदों का मामला
फिर राजसभवन से लेकर हाईकोर्ट तक आवेदन
राज्य निर्वाचन आयोग ने खारिज की शिकायत
कादरी और अंसारी पहले ही पार्षद से हटाए गए
कांग्रेस लगातार घट रही है
विशाल पटेल, रामकिशोर शुक्ला और राजा मंधवानी भी बीजेपी ज्वाइन कर चुके हैं। इनके अलावा कई नेता कांग्रेस का साथ छोड़ चुके हैं। हालांकि, हाल ही में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने एक बयान दिया। उन्होंने कहा कि कई नेता फिर से कांग्रेस में लौटना चाहते हैं।
इधर मिमरोट का प्रदर्शन, नहीं पहुंचे नेता
मिमरोट ने पुतले का नाम मित्रासुर रखने के पीछे किसी का नाम बताने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि शहर के लोग खुद तय करें कि किसने मित्र की जगह शत्रु जैसा काम किया है। उन्होंने भागीरथपुरा और बावड़ी कांड का भी जिक्र किया। मिमरोट ने कहा कि शहर में लगातार गंदा पानी सप्लाई हो रहा है। इसके बावजूद जिम्मेदार लोगों को कोई सजा नहीं मिल रही है।
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