इंदौर निगम ने सरकारी शराब दुकान को किया सील, 50 हजार का लगाया फाइन

Sanjay Gupta | Oct 27, 2024, 14:20 IST
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इंदौर नगर निगम ने सरकारी शराब दुकान को सील कर दिया। इस पर जमकर विवाद भी हुआ। आबकारी विभाग ने इस कार्रवाई को लेकर खासी नाराजगी जाहिर की। वहीं निगम ने 1 लाख रुपए का स्पॉट फाइन लगाया।

इंदौर नगर निगम की राजस्व वसूली टीम ने रविवार को सरकारी शराब दुकान ही सील कर दी, जिसे लेकर जमकर विवाद हुआ। आबकारी विभाग ने भी इस कार्रवाई को लेकर खासी नाराजगी जाहिर की। निगम की टीम एक लाख रुपए के स्पॉट फाइन वसूली पर अड़ी रही, लेकिन आबकारी विभाग की दखल के बाद 50 हजार का फाइन लेकर दोपहर में दुकान की सील खोली गई। विवाद इस बात पर है कि स्पॉट फाइन तक की कार्रवाई अपनी जगह है। सफाई के लिए सख्ती भी जरूरी है, लेकिन क्या निगम को सरकारी दुकान सील करने का अधिकार है? इसे लेकर शराब ठेकेदार और आबकारी विभाग निगम की सीलिंग कार्रवाई से नाराज है।



दुकान क्यों की गई सील?

दरअसल, यह मामला जीपीओ चौराहे की शराब दुकान का है। दुकान सुबह साढ़े आठ बजे खोलने के लिए जब ठेकेदार पहुंचे तो वहां दुकान सील मिली और साथ ही निगम की टीम मौजूद थी। निगम के दिलीप लोधी ने कहा कि दुकान के बाहर कचरा और गंदगी है, डिस्पोजल सामग्री है, जो प्रतिबंधित है इन कामों के लिए एक लाख का स्पॉट फाइन भरने पर ही दुकान खोली जाएगी। इस पर दुकानदार ने कहा कि यह गंदगी यहां शाम से रात तक ठेले लगाने वाले लोग करते हैं, यह डिस्पोजल उन्हीं के डले हुए हैं और गंदगी भी उन्हीं की फैलाई हुई है। वैसे भी सरकारी ठेका है और दुकान सील नहीं की जा सकती है।



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दोपहर तक चली बहस

इसी बात पर निगम की टीम और शराब ठेकेदार, कर्मचारियों के बीच में बहस चलती रही। बात आबकारी विभाग तक पहुंची। हालांकि निगम की टीम ने एक नहीं सुनी। आखिर में केवल यही सुलह बनी कि 50 हजार तो देने ही होंगे। इस पर 50 हजार का स्पॉट फाइन नकद लिया गया और दुकान की सील खोली गई।



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अहाते बंद होने के बाद हो रहा यह हाल

शराब दुकानदारों का कहना है कि अहाता बंद होने के बाद हर दुकान के बाहर यह विवाद की स्थिति बन रही है। कारण है कि अहाते नहीं होने पर अब शराब दुकान के पास ही शराब पीने वाले डिस्पोजल ग्लास लाकर बैठ जाते हैं, पास ही ठेले वाले खड़े हो जाते हैं, जो दुकान बंद होने के बाद वहीं पर डिस्पोजल ग्लास, जूठन और अन्य गंदगी फेंक कर चले जाते हैं। उधर सुबह आठ-साढ़े आठ बजे निगम की टीम निरीक्षण के लिए पहुंचती और फिर गंदगी, डिस्पोजल देखकर स्पॉट फाइन लगा देती है।



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