इंदौर क्राइम ब्रांच टीआई और सिपाही पर रिश्वत के आरोप, खाते में लिए 50 हजार

Sanjay Gupta | Apr 01, 2026, 11:36 IST
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इंदौर में क्राइम ब्रांच के टीआई और सिपाही पर रिश्वत लेने के आरोप लगे हैं। जांच में सामने आया कि 50 हजार रुपए ऑनलाइन खाते में लिए गए। मामला लोकायुक्त तक पहुंचा। अब विभागीय जांच शुरू हो चुकी है और सख्त कार्रवाई के संकेत हैं।

News In Short

  • इंदौर क्राइम ब्रांच के टीआई पर रिश्वत लेने का आरोप है।
  • एक साइबर शिकायत की जांच के दौरान पैसे मांगे गए।
  • सिपाही के खाते में 50 हजार रुपए ट्रांसफर हुए।
  • मामला लोकायुक्त तक पहुंचा लेकिन आरोपी बच निकले हैं।
  • अब विभागीय जांच की जा रही है।

News In Detail

जानें क्या है पूरा मामला

इंदौर में फिर पुलिस पर सवाल उठे हैं। क्राइम ब्रांच के टीआई सुजीत श्रीवास्तव जांच में घिर गए हैं। उनके साथ सिपाही विकास का नाम भी सामने आया है। यह मामला एक साइबर शिकायत से शुरू हुआ था। एक युवती ने आपत्तिजनक फोटो डालने की शिकायत की थी। जांच के दौरान आरोपी युवक को बुलाया गया।



साइबर केस जांच में कैसे मांगे गए पैसे

टीआई ने युवक का फोन और लैपटॉप जांच के लिए लिया था। इसके बाद युवक से पैसे की मांग की गई थी। कहा गया कि केस में राहत दिलाई जा सकती है। युवक पर दबाव बनाया गया और डर दिखाया गया था। इसके बाद 50 हजार रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर कराए गए थे। यह रकम सिपाही विकास के खाते में भेजी गई थी।



लोकायुक्त तक पहुंचा मामला

मामला लोकायुक्त तक पहुंच गया था। मध्यप्रदेश लोकायुक्त इंदौर एसपी राजेश सहाय ने जांच शुरू की। टीआई और सिपाही को पकड़ने की योजना बनी। लेकिन कार्रवाई से पहले दोनों गायब हो गए। इस वजह से बच गए।



विभाग ने कैसे लिया सख्त एक्शन

मामला उच्च अधिकारियों तक पहुंचा। क्राइम डीसीपी ने सख्ती दिखाई है। टीआई से सभी जांच वापस ले ली गई हैं।



चालान देरी में दोषी साबित

टीआई पर पहले भी आरोप लग चुके हैं। एक केस में चालान समय पर पेश नहीं किया गया था। नियम के अनुसार 90 दिन में चालान जरूरी था। देरी के कारण आरोपी को जमानत मिल गई थी। इस मामले में भी जांच पहले से चल रही थी।



प्रारंभिक जांच में देरी साबित हुई है। अधिकारियों ने रिपोर्ट तैयार कर ली है। एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया ने कहा कि देरी साफ तौर पर सामने आई है। प्राथमिक जांच में आरोप सिद्ध हुए हैं। अब रिपोर्ट के आधार पर आगे कार्रवाई होगी।



पहले भी सट्टाकांड में हटाए गए थे

इसके पहले भी श्रीवास्तव पर सट्टाकांड में गाज गिरी थी। जब वह खजराना टीआई पद पर थे तब उनके एरिया में लगातार जुआ, सट्टा चलने की शिकायत आई थी। तब उच्च अधिकारियों ने इसे पकड़ा था। इसके बाद काम में लापरवाही के चलते उन्हें हटा दिया गया था।



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