एमपी में हर दिन 87 लोग हो रहे साइबर क्राइम के शिकार, इंदौर पुलिस ने किया अलर्ट
News In short
- इंदौर में सिर्फ मार्च महीने में ही 2,600 साइबर ठगी की शिकायतें दर्ज की गईं।
- शहर में रोजाना लगभग 87 लोग डिजिटल फ्रॉड का शिकार बन रहे हैं।
- अब ठग ओटीपी नहीं मांगते, बल्कि APK फाइल भेजकर पूरा मोबाइल हैक कर लेते हैं।
- पिछले तीन महीनों में पुलिस ने करीब 1.75 करोड़ रुपए ठगों से वापस रिकवर किए हैं।
- ठगी होने पर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर तुरंत शिकायत करें, जिससे ई-एफआईआर दर्ज हो सके।
News In Detail
इंदौर में साइबर ठगी (Cyber fraud) के डराने वाले आंकड़े सामने आए हैं, जिन्होंने पुलिस प्रशासन की नींद उड़ा दी है। अगर आप भी इंटरनेट चलाते हैं, तो यह खबर आपको सावधान करने के लिए काफी है। केवल मार्च माह में ही इंदौर क्राइम ब्रांच के पास धोखाधड़ी की 2,600 शिकायतें आई हैं। वहीं, साल 2025 में देशभर के 55 हजार 659 लोग साइबर फ्रॉड का शिकार हुए।
इसका सीधा मतलब यह है कि इंदौर में हर दिन औसतन 87 लोग ठगों के जाल में फंसकर अपनी मेहनत की कमाई गंवा रहे हैं। पुलिस की साइबर पाठशाला और जागरूकता अभियानों के बावजूद, अपराधियों के नए-नए पैंतरे अब आम जनता की जेब पर भारी पड़ रहे हैं।
डॉक्टर और इंजीनियर भी खा गए मात
हैरानी की बात यह है कि ठगी का शिकार होने वालों में सिर्फ कम पढ़े-लिखे लोग ही नहीं, बल्कि डॉक्टर, इंजीनियर और बड़े व्यापारी भी शामिल हैं। इन दिनों सबसे ज्यादा मामले शेयर ट्रेडिंग और घर बैठे एक्सट्रा इनकम के नाम पर सामने आ रहे हैं।
ठग लोगों को ज्यादा मुनाफे का सपना दिखाते हैं और लोग उसी लालच में आकर निवेश कर बैठते हैं। घर संभालने वाली महिलाएं भी इन अपराधियों के निशाने पर हैं, जिन्हें पार्ट-टाइम काम के नाम पर फंसाया जा रहा है।
बस एक क्लिक में खाता साफ
ठगों ने अब अपने तरीके बदल लिए हैं। अब वे केवल बैंक अधिकारी बनकर फोन नहीं करते, बल्कि तकनीक का सहारा ले रहे हैं। आजकल बिजली का बिल जमा न होने या गैस कनेक्शन कटने का डर दिखाकर एक संदेहास्पद (Suspicious) एपीके फाइल भेजी जाती है।
जैसे ही कोई इस फाइल पर क्लिक करता है, उसके मोबाइल का पूरा कंट्रोल ठगों के पास चला जाता है। इसके बाद बिना किसी ओटीपी के आपके बैंक खाते से पैसे निकाल लिए जाते हैं। अक्सर पीड़ित को तब पता चलता है जब फोन पर बैलेंस कटने का मैसेज आता है।
करोड़ों की ठगी और पुलिस की रिकवरी
साल 2025 में 55 हजार 659 लोगों के साथ साइबर फ्रॉड हुआ। इन मामलों में कुल 581 करोड़ रुपए की ठगी की गई। पुलिस ने फुर्तीदिखाते हुए 137 करोड़ रुपए होल्ड करा दिए। साइबर फ्रॉड रकम फ्रीज कराने में प्रदेश ने लंबी छलांग लगाई है। एमपी अब देश में 22वें स्थान से बढ़कर छठे स्थान पर आ गया है।
समय रहते शिकायत की तो पैसे वापस
भले ही ठग सक्रिय हैं, लेकिन इंदौर क्राइम ब्रांच भी पूरी मुस्तैदी से कार्रवाई कर रही है। पिछले तीन महीनों में पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए ठगों के बैंक खाते ब्लॉक करवाए और लगभग पौने दो करोड़ रुपए पीड़ितों को रिफंड करवाए हैं। पुलिस का कहना है कि अगर आपके साथ कोई धोखाधड़ी होती है, तो तुरंत नेशनल हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें।
ई-एफआईआर से बढ़ी
अब पीड़ितों को थानों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं है। सरकार ने ई-एफआईआर (e- fir) की व्यवस्था शुरू की है। हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज होते ही वह ई-एफआईआर में बदल जाती है और संबंधित थाने को भेज दी जाती है। इस नई व्यवस्था का असर भी दिखने लगा है, पिछले 10 दिनों में ही इंदौर के अलग-अलग थानों में 50 से अधिक केस दर्ज किए जा चुके हैं। याद रखिए, आपकी सतर्कता ही साइबर ठगों का सबसे बड़ा इलाज है।
साइबर क्राइम से कैसे बचें
- अपने सोशल मीडिया और बैंक अकाउंट के लिए ऐसा पासवर्ड रखें जिसका कोई अंदाजा न लगा सके। हर जगह एक ही पासवर्ड रखने की गलती न करें।
- अपने अकाउंट्स में टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) चालू करें। इससे फायदा ये होगा कि पासवर्ड पता होने के बाद भी कोई आपका अकाउंट तब तक नहीं खोल पाएगा, जब तक आपके पास आने वाला कोड उसे न मिल जाए।
- व्हाट्सएप या ईमेल पर आए किसी भी ऐसे लिंक पर क्लिक न करें जो आपको इनाम या फ्री ऑफर का लालच दे। ये ठगों का बिछाया जाल हो सकते हैं।
- अपना OTP, पिन या बैंक की कोई भी जानकारी फोन पर किसी को न बताएं। याद रखें, बैंक कभी भी आपसे ये चीजें फोन पर नहीं मांगता।
- जब भी फोन या ऐप्स का अपडेट आए, उसे तुरंत कर लें। नए अपडेट्स आपके फोन की सुरक्षा को और मजबूत बनाते हैं।
- कोई भी ऐप डाउनलोड करना हो, तो सिर्फ गूगल प्ले स्टोर या एप्पल ऐप स्टोर का ही इस्तेमाल करें। किसी अनजान वेबसाइट से ऐप डाउनलोड करना भारी पड़ सकता है।
- किसी भी अनजान नंबर से आने वाले वीडियो कॉल को न उठाएं। आज के समय में वीडियो कॉल के जरिए ब्लैकमेल करने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।
- अगर कोई खुद को पुलिस या सीबीआई अफसर बताकर आपको डराए या 'डिजिटल अरेस्ट' की धमकी दे, तो घबराएं नहीं। कानून में ऐसा कोई नियम नहीं है। तुरंत फोन काटें और स्थानीय पुलिस को सूचना दें।
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