इंदौर नगर निगम 103 करोड़ घोटाले में ED कोर्ट से अभय राठौर, बड़ेरा की जमानत खारिज
समझें क्या है पूरा मामला
- नगर निगम में 103.42 करोड़ रुपए निकालने का आरोप है।
- अभय राठौर और राहुल बड़ेरा ने जमानत मांगी थी।
- विशेष अदालत ने दोनों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं।
- प्रवर्तन निदेशालय ने आरोपों को गंभीर आर्थिक अपराध बताया।
- मामले में 32 लोगों के खिलाफ अभियोजन शिकायत पेश हुई है।
Indore. इंदौर नगर निगम के चर्चित फर्जी बिल घोटाले में जेल में बंद इंजीनियर अभय राठौर को झटका लगा है। इसके साथ ही ठेकेदार राहुल बडे़रा की भी जमानत याचिका खारिज हो गई है। ईडी कोर्ट ने इसे गंभीर अपराध माना है और जमानत देने का कोई मजबूत साक्ष्य नहीं पाया है।
ईडी ने क्या कार्रवाई की
आरोपियों पर निगम के बिल घोटाले में केस दर्ज किया गया था। फिर ईडी ने इसमें मनी लाण्ड्रिंग एक्ट के तहत जून 2024 में दर्ज किया। हाल ही में ईडी ने इसमें चालान भी पेश किया है। इसमें आरोपियों पर ईडी ने छापे मारे और संपत्तियां भी अटैच की है। जांच के बाद ईडी ने 1 जून 2026 को अभय राठौर के साथ ही ठेकेदार राहुल बड़ेरा और मोहम्मद जाकिर को गिरफ्तार किया।
कोर्ट में क्या बोले आरोपी
आरोपियों की ओर से तर्क दिया गया कि वह एक साल से जेल में हैं और ईडी ने एकतरफा कार्रवाई की है। ईडी ने केवल तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया, जबकि इसमें सभी पर समान आरोप है। जबकि हम जांच में सहयोग कर रहे हैं। सभी आरोप झूठे हैं। सह आरोपी ऐहतेशाम (काकू) को हाईकोर्ट से गिरफ्तारी से अग्रिम राहत मिली है।
ईडी ने यह बात रखी
वहीं ईडी की ओर से विशेष लोक अभियोजक चंदन ऐरन, असिस्टेंट डायरेक्टर ईडी विपिन और विधि सहायक शान अली मौजूद थे। ईडी ने तर्क रखा कि फर्जी टेंडर, फर्जी बिल, वर्क आर्डर के जरिए बिल बनाकर 103 करोड़ की राशि प्राप्त की गई। इनके द्वारा इसे आपस में मिलकर लिया गया और बांटा गया। यह गंभीर अपराध है। इन सभी तर्क सुनने के बाद ईडी स्पेशल कोर्ट ने दोनों की जमानत याचिका खारिज कर दी।
क्या है 103 करोड़ का मामला
यह मामला इंदौर नगर निगम के संदिग्ध भुगतानों से जुड़ा है। आरोप है कि कागजों पर फर्जी विकास कार्य दिखाए गए। इन कार्यों के लिए कथित फर्जी टेंडर तैयार किए गए। जाली वर्क ऑर्डर और फर्जी बिल भी बनाए गए। जांच में नकली माप पुस्तिकाओं का उल्लेख सामने आया। झूठे कार्य पूर्णता प्रमाणपत्र भी इस्तेमाल होने का आरोप है।
ईडी का दावा 103.42 करोड़ रुपए की निकासी से जुड़ा है। यह आंकड़ा अभियोजन शिकायत में दर्ज बताया गया है। जांच के अलग चरणों में रकम के आंकड़े अलग रहे। नई अभियोजन शिकायत में 103.42 करोड़ रुपए बताए गए।
एजेंसी के अनुसार कई काम कभी किए ही नहीं गए। कुछ काम पहले ही पूरे हो चुके थे। इसके बावजूद उन्हीं कामों के नाम पर भुगतान हुआ। नगर निगम के खजाने से रकम निकालने का आरोप है।
कैसे शुरू हुई ईडी जांच
घोटाला सामने आने पर पुलिस ने कई मामले दर्ज किए। ये मामले इंदौर के एमजी रोड थाने में दर्ज हुए। इन एफआईआर (First Information Report) के आधार पर जांच आगे बढ़ी। पुलिस ने कई आरोपियों और संस्थाओं की भूमिका देखी।
ईडी ने जून 2024 में अलग जांच दर्ज की। यह जांच धन शोधन से जुड़े आरोपों पर केंद्रित थी। मामला पीएमएलए (Prevention of Money Laundering Act) के तहत दर्ज हुआ। इसे धन शोधन निवारण अधिनियम भी कहा जाता है।
ईडी ने बैंक खातों और संपत्तियों की जांच शुरू की। कंपनियों के भुगतान रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में आए। एजेंसी ने नगर निगम के दस्तावेज भी जुटाए। इनमें बिल और भुगतान स्वीकृति से जुड़े रिकॉर्ड शामिल थे। डिजिटल दस्तावेजों और बैंक लेनदेन का मिलान किया गया। इसके बाद कई स्थानों पर छापे मारे गए।
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