इंदौर में भावांतर योजना नहीं चाहता किसान संघ, MSP से खरीदी की मांग, योजना में देरी भी बड़ी वजह

Sanjay Gupta | Oct 03, 2025, 15:15 IST
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इंदौर में किसान संघ भावांतर योजना का विरोध कर रहा है। किसान चाहते हैं कि सरकार सोयाबीन की खरीदी MSP से करे, ताकि उन्हें उचित मूल्य मिल सके। जानें क्या है पूरा मामला...

INDORE. सोयाबीन की पैदावार के लिए मालवा क्षेत्र सबसे प्रमुख केंद्र है। यहां भी इंदौर-उज्जैन क्षेत्र सबसे अहम है। सोयाबीन के कम मिले रहे भाव को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भावांतर योजना की घोषणा की है। इसमें किसान को न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी (5328 रुपए प्रति क्विंटल) दिलाने की मंशा जाहिर की गई है। लेकिन इंदौर में किसान इस योजना से खुश नहीं हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अनुषंगी संगठन भारतीय किसान संघ ने इसका विरोध किया है।



क्या है भावांतर योजना, कैसे लागू होगी

अब किसान संघ क्यों कर रहा है विरोध

किसान संघ के इंदौर नगराध्यक्ष दिलीप मुकाती ने बताया कि हमारा पूर्व का 2018 का अनुभव अच्छा नहीं था, तब 500 रुपए देने की बात कही थी, फिर इसे बोनस राशि बताया गया, लेकिन किसानों के खाते में यह राशि नहीं आई।



मंडी में सोयाबीन 3300-4200 रुपए प्रति क्विंटल बिक रहा है। संघ की मांग है कि एमएसपी लागू किया जाए और इस पर सोयाबीन की खरीदी की जाए।



मुकाती ने कहा कि 2018 में प्याज की भावांतर राशि जिले में 29 करोड़ बकाया है, जो आज तक नहीं मिली है।



सबसे बड़ी बात है कि इसे अक्टूबर अंत में लागू करने की बात हो रही है, जब तक तो छोटे और मध्यम किसान पूरी सोयाबीन बेच चुके होंगे, क्योंकि उन्हें तो अभी अगली फसल के लिए राशि चाहिए और ना ही भंडारण की व्यवस्था है। इसे अभी ही लागू करना चाहिए।



इंदौर में हर रोज 800-1000 वाहन सोयाबीन मंडियों में आ रहे हैं, बेच चुके किसानों को इसका कोई लाभ नहीं मिलेगा।



इंदौर में भावांतर योजना के विरोध वाली खबर पर एक नजर..

  • सीएम मोहन यादव ने सोयाबीन खरीदी के लिए भावांतर योजना की घोषणा की, जिसमें किसान को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 5328 रुपए प्रति क्विंटल दिलाने का उद्देश्य है।
  • 3 अक्टूबर से किसानों का पंजीकरण शुरू होगा, और 24 अक्टूबर से इस योजना को लागू किया जाएगा। इसमें मंडी में बिकने वाली सोयाबीन की कीमत के मॉडल रेट के अंतर का भुगतान सरकार द्वारा किया जाएगा।
  • इंदौर में भारतीय किसान संघ ने इस योजना का विरोध किया है, उनका कहना है कि 2018 में किए गए वादों को पूरा नहीं किया गया और किसानों को कोई लाभ नहीं मिला।
  • किसान संघ की मांग है कि एमएसपी लागू किया जाए और सोयाबीन की सरकारी खरीदी की जाए। वे यह भी कहते हैं कि योजना लागू होने का समय गलत है, क्योंकि छोटे किसान पहले ही अपनी फसल बेच चुके होंगे।
  • किसान संघ के अनुसार, जब भावांतर योजना लागू होती है, व्यापारी कार्टेल बनाकर दाम गिरा देते हैं, जिससे किसान को नुकसान होता है, क्योंकि सरकार केवल मॉडल रेट और एमएसपी के अंतर का भुगतान करती है।

व्यापारियों के कार्टेल से डर रहा किसान

इंदौर किसान संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि भावांतर योजना जब लागू होती है, तो व्यापारी और अधिकारी मिलकर अधिक दाम पर खरीदी कराते हैं, जिससे मॉडल रेट अधिक आता है। मॉडल रेट और समर्थन मूल्य के अंतर का ही भावांतर में भुगतान होता है। बाद में जैसे ही योजना लागू होती है, तो फिर व्यापारी कार्टेल बनाकर दाम एकदम गिरा देते हैं, चाहे कितना ही दाम गिरे, सरकार मॉडल रेट और एमएसपी के बीच के अंतर को ही देती है, ऐसे में किसान को नुकसान होता है।



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