इंदौर गैस पाइपलाइन विस्फोट में आखिरकार BJP पार्षद सोनी पर हुई FIR, हाईकोर्ट में बोले ACP
इंदौर में सत्ताधारी दल के नेता के प्रति ढीला रवैया अपना रही पुलिस को आखिरकार सख्ती दिखानी पड़ी। मामला वार्ड 31 में सुमन नगर में पार्षद बालमुकुंद सोनी द्वारा अवंतिका गैस पाइपलाइन पर ही बोरिंग करा देने का है, जिससे ब्लास्ट में चार लोग झुलस गए।
इसे लेकर हाईकोर्ट इंदौर में मंगलवार, 21 जुलाई को एसीपी विजयनगर पराग सैनी पेश हुए। द सूत्र ने खुलासा किया था कि मौजूद नगर निगम की जांच रिपोर्ट में सीधे तौर पर इसके लिए पार्षद बालमुकुंद सोनी (वार्ड 31) को जिम्मेदार माना गया है। वहीं, इसके बाद भी पुलिस उन्हें बचा रही थी।
हाईकोर्ट में एसीपी ने यह बताया
इस हादसे के बाद अधिवक्ता रितेश इनानी ने जनहित याचिका दायर की है। इसके तहत घायलों को मुफ्त उपचार दिया जा रहा है और एक युवती को अहमदाबाद एयरलिफ्ट किया गया है। हाईकोर्ट में जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं होने की बात भी उठी, इस पर पुलिस से जवाब मांगा गया।
कोर्ट ने दस दिन में जांच पूरी करने के लिए कहा था, लेकिन विजयनगर पुलिस ने कहा कि पार्षद बयान देने नहीं आ रहे हैं। वहीं जब्त मशीन छोड़ने पर भी नाराजगी जताई। मंगलवार, 21 जुलाई को एसीपी पराग सैनी पेश हुए और उन्होंने कोर्ट को बताया कि इसमें पार्षद सोनी को भी आरोपी बना लिया गया है और जांच जारी है। इसके साथ ही कपिल शर्मा व अन्य भी आरोपी हैं।
दस लाख रुपए की राशि भी मांगी
उधर यह बात भी आई कि घायल युवती का उपचार अहमदाबाद में हो रहा है और वहां 10 लाख रुपए का बिल बाकी है। मुफ्त उपचार होने के बाद भी शासन ने राशि नहीं दी है। इस पर सीएमएचओ डॉ. माधव हसानी ने कोर्ट से कहा कि इस संबंध में शासन को रिमाइंडर भेजा है।
इस पर अधिवक्ता रितेश ईनानी ने आपत्ति ली और कहा कि रोजमर्रा में बिल के लिए क्या इस तरह से प्रक्रिया चलेगी? कल घायल को कुछ हो गया तो कौन जिम्मेदार होगा? शासन से भी अभी जवाब आना बाकी है। शासन की ओर से अधिवक्ता अमित भाटिया और ऋषि तिवारी मौजूद थे।
नगर निगम की जांच रिपोर्ट में यह था
इस मामले में निगमायुक्त क्षितिज सिंघल ने अपर आयुक्त आकाश पाठक के साथ कार्यपालन यंत्री असित खरे और पीएस कुशवाह की जांच समिति बनाई थी। इसकी रिपोर्ट द सूत्र के पास मौजूद है।
इसमें बताया गया कि भू-जल स्तर बढ़ाने के लिए जल गंगा संवर्धन के तहत रिचार्जिंग शाफ्ट बनाए जा रहे हैं और इसके लिए बोरिंग होती है। वहीं, सुमन नगर में जिस जगह यह बोरिंग हो रही थी, वह निगम द्वारा स्वीकृत स्थल-सूची में नहीं था। न ही निगम से मंजूरी ली गई थी और ना ही यहां मौके पर निगम का कोई भी अधिकारी या इंजीनियर मौजूद था। केवल वेंडर कर्मचारी और पार्षद सोनी मौजूद थे।
पार्षद सोनी ने ही बुलाई थी बोरिंग जांच कमेटी ने निगम के टीना सिसोदिया, उजमा खान, मनीष मेहता, रोहित बोयत के साथ ही एसआरसी कंस्ट्रक्शन कंपनी के राजेश चाचरा और बोरिंग मशीन एजेंट कपिल शर्मा के भी बयान लिए। इसमें आया कि चाचरा ने ही बोरिंग मशीन एजेंट कपिल को पार्षद का नंबर दिया और कहा कि जहां वह बोलें, बोरिंग लगा देना।
पार्षद ने सुमन नगर में बोरिंग बुलाई और वहां जगह बताते हुए बोरिंग करने के लिए कहा। इसमें कोई तकनीकी जांच आदि नहीं की और बोरिंग लगाते ही नीचे अवंतिका गैस लाइन होने से ब्लास्ट हो गया। कर्मचारियों के बयानों में यह भी आया कि इससे पहले भी पार्षद ने अपने निवास की गली के पास ही रिचार्जिंग शाफ्ट बनाने के लिए कहा था , जो हमने उपयुक्त नहीं होने से मना कर दिया था। फिर उन्होंने अपने स्तर पर ही बोरिंग बुलाकर सुमन नगर में करा ली।
पुलिस ने बोरिंग वाले पर ही किया था पहले केस
इस मामले में लेटलतीफी के बाद अन्य तीसरे व्यक्ति (चार झुलसे पीड़ितों के अलावा अन्य व्यक्ति) के आवेदन पर सामान्य धाराओं में केस दर्ज कर लिया। इसके बाद बोरिंग मशीन जब्त की और उनके ही कर्मचारी को इसमें आरोपी बनाया। लेकिन जिला कोर्ट के आदेश से वह बोरिंग मशीन भी छूट गई। हाईकोर्ट ने अब पूरी पुलिस डायरी और अधिकारियों को बुलाया था। इसमें अब पार्षद आरोपी बने हैं।
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