चयनित ने ईमानदारी से आपराधिक रिकॉर्ड बताया तो नौकरी से नहीं हटा सकते-इंदौर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
समझें क्या है पूरा मामला
- बीएसएफ में चयनित राहुल जाट ने खुद अपने खिलाफ दर्ज पुराने आपराधिक केस की जानकारी दी थी।
- रिकॉर्ड बताने के बाद बीएसएफ ने 2012 की गाइडलाइन का हवाला देकर उसकी सेवा समाप्त कर दी।
- मामला मोटरबाइक का हार्न बजाने के बाद हुई सामान्य मारपीट का था।
- राहुल जाट बाद में कोर्ट से बरी हो गया, लेकिन विभाग ने उसका पक्ष स्वीकार नहीं किया।
- इंदौर हाईकोर्ट की डबल बेंच ने सेवा समाप्ति के सभी आदेश रद्द कर दिए।
इंदौर हाईकोर्ट ने सरकारी नौकरी में आपराधिक रिकॉर्ड को लेकर बड़ा फैसला दिया है। मामला बीएसएफ में नौकरी पाने वाले कांस्टेबल राहुल जाट का है। जाट ने खुद अपना आपराधिक रिकॉर्ड बताया था।
जिसके बाद उसे नौकरी से निकाल दिया गया था। आपराधिक रिकॉर्ड वालों को सरकारी नौकरी से बाहर रखने के मामले में इंदौर हाईकोर्ट ने अहम फैसला दिया है।
मामला बीएसएफ में नौकरी का है। पुराने आपराधिक रिकॉर्ड के कारण राहुल जाट को कांस्टेबल की नौकरी से बाहर कर दिया गया था। सिंगल बेंच ने भी इस आदेश को बरकरार रखा था। इसके बाद मामला हाईकोर्ट की डबल बेंच में पहुंचा, जहां याचिका मंजूर कर ली गई।
क्या है पूरा मामला
राहुल जाट ने एसएससी जनरल ड्यूटी परीक्षा 2022 पास की और कांस्टेबल के लिए बीएसएफ में चयनित हुआ। उसने 27 अक्टूबर 2023 को इंदौर स्थित आईजी सेंट्रल स्कूल ऑफ वेपंस एंड टैक्टिक्स, बीएसएफ में ज्वाइन किया।
वहां दस्तावेजों का सत्यापन हुआ और अपराध सहित अन्य जानकारी मांगी गई। इस पर राहुल ने बताया कि शिवपुरी में वर्ष 2022 में उसके खिलाफ मारपीट का एक केस दर्ज हुआ था। यह जानकारी देने के बाद 22 नवंबर 2023 को उसकी सेवा समाप्त कर दी गई।
इस मामले में राहुल ने 24 जनवरी 2024 को अधिकारियों को रिप्रेजेंटेशन भी दिया, लेकिन उसे स्वीकार नहीं किया गया। इसके बाद 9 फरवरी 2024 को उसका आवेदन भी खारिज कर दिया गया।
केवल हार्न बजाने को लेकर सामान्य केस था
यह मामला मोटरबाइक का हार्न बजाने को लेकर हुई सामान्य मारपीट का था। उस समय अभ्यर्थी की उम्र 22 साल और शिकायतकर्ता की उम्र 20 साल थी। इस मामले में राहुल को 28 नवंबर 2023 को कोर्ट ने बरी भी कर दिया।
यह कहकर नौकरी से हटाया
बीएसएफ ने अपने पक्ष में गृह मंत्रालय की वर्ष 2012 की गाइडलाइन का हवाला देते हुए राहुल को बर्खास्त किया। विभाग ने आपराधिक रिकॉर्ड के आधार पर उसे सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य बताया।
रिप्रेजेंटेशन में राहुल ने यह भी बताया कि सेवा समाप्ति के आदेश के सात दिन बाद ही शिवपुरी कोर्ट ने 28 नवंबर 2023 को उसे निर्दोष माना है। हालांकि विभाग ने यह तर्क भी खारिज कर दिया।
विभाग का कहना था कि उसे सम्मानपूर्वक बरी नहीं किया गया, बल्कि संदेह का लाभ और पर्याप्त सबूत नहीं होने के कारण छोड़ा गया है।
हाईकोर्ट ने यह दिए आदेश
हाईकोर्ट की जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस जय पिल्लई की बेंच ने राहुल जाट की याचिका स्वीकार कर ली। साथ ही बीएसएफ द्वारा सेवा समाप्त करने और रिप्रेजेंटेशन खारिज करने के सभी आदेश रद्द कर दिए।
हाईकोर्ट ने कहा कि चयनित अभ्यर्थी ने ईमानदारी से अपने रिकॉर्ड का खुलासा किया। उसे कोर्ट से बरी किया जा चुका है। उसके खिलाफ दर्ज मामला न तो जघन्य अपराध था और न ही ऐसा अपराध था, जिससे उसके चरित्र का आकलन किया जा सके।
यह सामान्य मारपीट की अचानक हुई घटना थी। केवल इसके आधार पर किसी अभ्यर्थी को चयन से वंचित नहीं किया जा सकता। इसलिए सेवा समाप्त करने का आदेश निरस्त किया जाता है।
FAQ
- इंदौर हाईकोर्ट के इस फैसले का क्या मतलब है?
हाईकोर्ट ने कहा कि मामूली मारपीट के केस में बरी हो चुके व्यक्ति को सरकारी नौकरी से नहीं निकाला जा सकता। ईमानदारी से आपराधिक रिकॉर्ड बताना अयोग्यता नहीं है। यह फैसला भविष्य के ऐसे मामलों में नजीर बनेगा। - BSF ने किस आधार पर राहुल जाट को निकाला था?
बीएसएफ ने गृह मंत्रालय की 2012 की गाइडलाइन का हवाला देकर राहुल को निकाला। विभाग का तर्क था कि उसे "सम्मानपूर्वक बरी" नहीं किया गया था। लेकिन हाईकोर्ट ने इस तर्क को अस्वीकार कर दिया। - क्या पुरानाआपराधिक केस सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य बनाता है?
हर मामला अलग होता है। इंदौर हाईकोर्ट ने कहा कि जघन्य अपराध और मामूली झड़प में फर्क करना जरूरी है। अगर केस मामूली है और अभ्यर्थी बरी हो चुका है तो उसे आधार बनाकर नौकरी नहीं छीनी जा सकती।
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