इंदौर के पूर्व कलेक्टर आकाश त्रिपाठी, टीकमगढ़ कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय को 7 साल पुराने केस में राहत
केंद्र में सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के एमडी पद पर तैनात 1998 बैच के आईएएस आकाश त्रिपाठी को पुराने केस में राहत मिली है। यह मामला उनके इंदौर में संभागायुक्त और इंदौर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष रहते हुए साल 2019 का है।
यह केस जिला कोर्ट में चल रहा था। इसमें तत्कालीन आईडीए सीईओ और अब टीकमगढ़ कलेक्टर आईएएस विवेक श्रोत्रिय, तत्कालीन एसडीएम शाश्वत शर्मा, सोपा के प्रमुख डेविश जैन और अन्य भी पक्षकार थे। बता दें कि त्रिपाठी अक्टूबर 2022 से केंद्र में पदस्थ हैं।
जमीन संबंधी विवाद में लगा था केस
यह केस सुखलिया के प्रदीप देशपांडे ने सभी पक्षकारों पर लगाया था। देशपांडे का कहना था कि खजराना में उनकी जमीन है। इस पर जिला कोर्ट ने निषेधाज्ञा लगाई थी, यानी कोई भी बिना मंजूरी के इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकता था।
उनकी जमीन के पास ही सोपा (द सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया) की जमीन है, जो आईडीए से मिली हुई है। देशपांडे का आरोप था कि सोपा ने उनकी जमीन पर दखल दिया। इसके लिए तत्कालीन संभागायुक्त आकाश त्रिपाठी के आदेश पर सीईओ विवेक श्रोत्रिय और एसडीएम शाश्वत शर्मा ने नपती कराई थी।
देशपांडे का कहना था कि उनकी जमीन पर हस्तक्षेप किया गया था। उन्होंने यह भी बताया कि त्रिपाठी और तब की एसएसपी रुचि वर्धन मिश्रा ने पुलिस भेजी थी। उनका कहना था कि यह कोर्ट की अवमानना है और उनकी स्वामित्व वाली जमीन पर दखलंदाजी की गई है।
कोर्ट के फैसले से ऐसे मिली राहत
इस मामले में नवम जिला न्यायाधीश विवेक कुमार चंदेल ने अपना फैसला सुनाया है। उन्होंने कहा कि जमीन पर दखल देने का कोई पुख्ता प्रमाण नहीं मिला है। ना ही जमीन का कोई सीमांकन किया गया, जिससे ये साबित हो सके कि प्रशासन या आईडीए ने इसमें दखल दिया है। कोर्ट के अनुसार, जो तस्वीरें पेश की गईं, उनसे जमीन की स्थिति साफ नहीं हो रही है।
कोर्ट ने बताया कि याचिकाकर्ता की पुलिस में दी गई शिकायतों में भी ये साफ नहीं है कि पक्षकार उस जमीन पर कैसे हस्तक्षेप कर रहे थे। इस वजह से याचिका को खारिज कर दिया गया।
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