लोकसभा चुनाव इंदौर में अक्षय बम की नाम वापसी फिर चर्चा में, सीसीटीवी के वो 44 सेकंड
News in Short
- लोकसभा चुनाव इंदौर के लिए कांग्रेस ने अक्षय बम को प्रत्याशी बनाया था।
- बम आखिरी समय तक चुनाव प्रचार करते रहे, लेकिन 29 अप्रैल को अचानक नाम वापस ले लिया।
- इसके बाद कांग्रेस का कोई प्रत्याशी ही नहीं बचा और बीजेपी के शंकर लालवानी रिकॉर्ड मतों से चुनाव जीते।
- एक निर्दलीय प्रत्याशी धर्मेंद्र सिंह झाला की याचिका से यह मामला फिर चर्चा में आ गया है।
- झाला का आरोप है कि उनका नाम गलत तरीके से वापस लिया गया, उन्होंने सीसीटीवी फुटेज हासिल कर कोर्ट में पेश किए हैं।
News in Detail
INDORE. लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान मध्यप्रदेश की सबसे चर्चित घटना थी इंदौर से कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. अक्षय कांति बम का नाम वापस लेना। वह 29 अप्रैल 2024 को कलेक्टोरेट में रिटर्निंग ऑफिसर व कलेक्टर आशीष सिंह के पास पहुंचे और नाम वापस ले लिया था।
इसके बाद देश की सबसे चर्चित सेल्फी सामने आई थी। इसमें मंत्री कैलाश विजयवर्गीय कार में आगे और पीछे विधायक रमेश मेंदोला व अक्षय बम बैठे हुए थे। इसी दौरान कुछ और नामांकन वापस लिए गए, जिनमें एक निर्दलीय प्रत्याशी धर्मेंद्र सिंह झाला भी थे, साथ ही भावना सिंगोरिया व अन्य शामिल थे।
क्यों उठा अब यह मामला?
दरअसल, झाला ने हाई कोर्ट में इलेक्शन पिटीशन (चुनाव याचिका) दायर की हुई है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी और जिला कोर्ट में परिवाद भी लगाया है। इसमें उन्होंने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत उस दिन 29 अप्रैल के पूरे समय के सीसीटीवी फुटेज हासिल किए हैं, जिन्हें कोर्ट में पेश किया गया है।
इसमें गंभीर आरोप लगाए गए हैं कि एक निर्दलीय प्रत्याशी अयाज अली को रिटर्निंग ऑफिसर के कक्ष में धमकाया गया कि नाम वापस ले लो, लेकिन वह नहीं माने। वहीं भावना ने नामांकन वापसी आवेदन कक्ष में किसी बाबू को दिया और चलती बनीं।
झाला ने यह याचिका अपने नामांकन वापसी के खिलाफ लगाई है। उनका कहना है कि उन्होंने तो नाम वापस लिया ही नहीं और न ही प्रस्तावक प्रदीप्ति दुबे ने लिया। दुबे की बहन अदिति चौधरी एक बीजेपी महिला नेत्री के साथ गईं और मेरा नामांकन फॉर्म तय समय (दोपहर 3 बजे) के बाद लिया गया। ऐसे में चुनाव को रद्द किया जाए।
अक्षय बम को लेकर सीसीटीवी में क्या है?
लोकसभा चुनाव में नाम वापस लेने वाले अक्षय कांति बम को लेकर भी इस सीसीटीवी में फुटेज मौजूद है। इसमें नजर आता है कि अक्षय बम सुबह 11:47 बजे कलेक्टोरेट चेंबर के बाहर कॉरिडोर में आते हैं। इनके साSAथ बीजेपी विधायक रमेश मेंदोला, तत्कालीन एमआईसी मेंबर जीतू यादव व अन्य साथ थे। वह 11:48 बजे रिटर्निंग अधिकारी के चेंबर में प्रवेश करते हैं और फिर 11 बजकर 48 मिनट 44 सेकंड पर बाहर आ जाते हैं। वह रिटर्निंग अधिकारी के चेंबर में मुश्किल से 30 सेकंड रहते हैं।
इन 30 सेकंड में क्या किया बम ने?
बम जब रिटर्निंग अधिकारी के चेंबर में प्रवेश करते हैं, तो सबसे आगे मेंदोला होते हैं। इसके बाद जीतू यादव, अक्षय बम व अन्य होते हैं। बम आगे आते हैं और पहले से ही लिखा हुआ एक फॉर्म लेकर आते हैं, जो नामांकन वापसी का फॉर्म है।
वह इसे जेब से निकालकर रिटर्निंग अधिकारी/कलेक्टर आशीष सिंह को देते हैं। अधिकारी द्वारा इसे चेक किया जाता है, साथ में खड़े सहायक को जांचने के लिए दिया जाता है और फिर स्वीकार कर लिया जाता है।
बम 30 सेकंड में ही कक्ष से बाहर निकल जाते हैं। इसके बाद वह बिना बात किए सीधे कलेक्टोरेट से चले जाते हैं। इसके तुरंत बाद ही मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की वह चर्चित सेल्फी ट्विटर (X) पर आती है, जिसमें उनके साथ बम और विधायक मेंदोला नजर आते हैं।
बम अपनी एक याचिका में बीजेपी पर ही लगा चुके हैं आरोप
उल्लेखनीय है कि खजराना के एक गैर इरादतन हत्या के मामले में हाई कोर्ट में बम ने जो याचिका लगाई थी, उसमें उन्होंने बीजेपी पर ही आरोप लगा दिए थे। शपथ पत्र में लिखा था कि वह चुनाव में प्रत्याशी थे और बीजेपी ने साजिश रची कि वह नाम वापस ले लें, इसलिए यह केस हुआ। आखिर वे इसमें सफल रहे और मैंने चुनाव से नाम वापस ले लिया। जब द सूत्र ने यह खुलासा किया, तब उन्होंने इस मामले में नया शपथ पत्र दिया और बीजेपी शब्द को हटा दिया।
झाला ने लगाए ये आरोप
झाला ने अपनी याचिका में आरोप लगाए हैं कि नामांकन वापसी की प्रक्रिया गलत हुई है, इसलिए चुनाव रद्द होना चाहिए। उनका कहना है कि मैं तो नाम वापसी की सूचना मिलने पर शाम पांच बजे कलेक्टोरेट गया था। पता चला कि किसी अदिति ने मेरे नाम का नामांकन वापसी आवेदन दिया है। झाला का आरोप है कि चुनाव में गलत प्रक्रिया (Malpractice) अपनाई गई है। मेरे नामांकन फॉर्म को मैंने भरा ही नहीं, न ही उस पर मेरे हस्ताक्षर हैं और न ही मेरे प्रस्तावक ने उसे भरा है।
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