इंदौर नगर निगम अब 1 लाख राशि तक के चेक नहीं लेगा, वजह 15 रुपए के भी चेक बाउंस
इंदौर नगर निगम ने अब एक लाख राशि तक का भुगतान चेक से लेने से इंकार कर दिया है। इसके बदले अब करदाताओं को ऑनलाइन ट्रांजैक्शन, डीडी व अन्य भुगतान के विकल्प चुनने होंगे। निगमायुक्त (आईएएस क्षितिज सिंघल) की मंजूरी से अपर आयुक्त राजस्व ने आदेश जारी किया है।
यह आदेश दिया गया
जारी आदेश में कहा गया है कि वर्तमान में ऑनलाइन भुगतान, यूपीआई, नेट बैंकिंग, क्यूआर कोड जैसे सुरक्षित व तत्काल भुगतान के विकल्प उपलब्ध हैं। हालांकि इन सिस्टम के जरिए एक लाख से अधिक भुगतान को लेकर सीमा होती है और अधिकांश करदाताओं को इसकी जानकारी नहीं है।
इसलिए एक लाख से अधिक के भुगतान में चेक स्वीकार किए जाएंगे लेकिन इससे कम राशि के भुगतान के लिए चेक नहीं लिए जाएंगे। यह भुगतान अब केवल नकद, ऑनलाइन भुगतान, डिमांड ड्राफ्ट के जरिए ही स्वीकार होंगे।
यह बनी है वजह: 37 करोड़ के चेक बाउंस
इंदौर में हर साल एक हजार करोड़ से अधिक का टैक्स राजस्व मिलता है। वहीं, बीते सवा साल में ही 37 करोड़ राशि के 3266 चेक बाउंस हो गए। इसमें 15-15 रुपए के भुगतान के चेक तक हैं।
इस वित्तीय वर्ष एक अप्रैल से 30 जून तक ही 566 चेक (6.50 करोड़ राशि के) बाउंस हो गए। अपर आयुक्त आकाश सिंह का कहना है कि चेक बाउंस होने के बाद कई लोगों ने राशि जमा ही नहीं कराई। इससे निगम के राजस्व पर असर हो रहा है।
इधर हो रहा विरोध
उधर कांग्रेस ने इसे करदाता विरोधी फैसला करार दिया है। शहर अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने इसे मनमाना फैसला करार दिया। पूर्व पार्षद दिलीप कौशल ने कहा कि यह तुगलकी फरमान है और अपर आयुक्त स्तर पर यह आदेश नहीं हो सकता है।
इसका फैसला एमआईसी और निगम परिषद की मंजूरी से ही हो सकता है। यह केवल प्रशासनिक आदेश से लागू नहीं हो सकता है। साथ ही यह संविधान के समानता के अधिकार का उल्लंघन है। वहीं चेक बाउंस होने की स्थिति में पहले से ही धारा 138 के तहत केस की प्रक्रिया होती है।
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