इंदौर के पिनाकल ग्रांड घोटाले में IAS की जांच में ये भी दोषी, पुलिस की FIR में ये नाम गायब
इंदौर में साल 2014-15 के दौरान सबसे चर्चित रियल एस्टेट ब्रांड पिनाकल था। यह आशीष दास पुप्पेंद्र बढे़रा के प्रोजेक्ट थे। इसमें तीन प्रोजेक्ट थे जिसमें एक पिनाकल ड्रीम्स, दूसरा पिनाकल ग्रांड और तीसरा पिनाकल डिजायर था। उस समय इस ब्रांड के लिए बॉलीवुड स्टार भी प्रचार करते थे।
पिनाकल ड्रीम्स का मामला एनसीएलटी में सुलझ चुका है। वहीं डिजायर भी एनसीएलटी में चल रहा है। वहीं पिनाकल ग्रांड का मामला आयकर से लेकर अन्य जांच में उलझा है। इसी पिनाकल ग्रांड की निपानिया स्थित जमीन की धोखाधड़ी को लेकर क्राइम ब्रांच में एफआईआर हुई है।
इन पर हुई एफआईआर
क्राइम ब्रांच ने इस मामले में संजय अग्रवाल, नीना पति संजय अग्रवाल, रितू पति मनोज अग्रवाल और गुरनाम सिंह धालीवाल पर केस दर्ज किया है। इन सभी पर 420, 467, 468, 120बी, 409 आईपीसी धाराओं में केस हुआ है।
यह 16 आवेदकों ने की है शिकायत
इसमें रोहित सूद, रमेश रिझवानी, पंकज रिझवानी, राजेश रामरखिया, विशाल मित्तल, अंकिता मित्तल, मुकेश मेहता, अब्दुल खान, सूरज सेमवानी, संजय माहेशवरी, गणेश खत्री, ललित यादव, हेमंत खत्री, अभय झंवर, अनूप सिंघल, मनीष महाजन सहित कुल 16 लोगों ने पुलिस में शिकायत की थी। इनके आवेदन पर केस क्राइम ब्रांच थाने में दर्ज हुआ है।
इंदौर जिला प्रशासन में दो IAS ने की जांच
पिनाकल ग्रांड मामले में एक नहीं दो बार जिला प्रशासन इंदौर द्वारा जांच की गई। एक जांच तत्कालीन अपर कलेक्टर आईएएस डॉ. अभय बेड़ेकर ने की। उनकी रिपोर्ट सितंबर 2022 में आई। वहीं इसके बाद तत्कालीन अपर कलेक्टर आईएएस (वर्तमान कलेक्टर सिंगरौली) गौरव बैनल ने भी इसमें जांच की और अप्रैल 2025 में 30 पन्नों की रिपोर्ट बनाई।
डॉ. बेड़ेकर ने जांच में इन्हें मुख्य आरोपी माना
सितंबर 2022 में डॉ. बेड़ेकर द्वारा पूरी की गई जांच में पूरे मामले में आशीष दास और पुष्पेंद्र बढ़ेरा को आरोपी माना। इसमें लिखा गया कि ऐसा प्रतीत होता है कि दास और बढ़ेरा ही इस पूरे मामले में मास्टरमाइंड हैं।
डॉ. बेडेकर ने तो अपनी रिपोर्ट में लिखा कि यह विविध कंपनियों, मिलते-जुलते नाम की फर्मों, अलग-अलग फर्म के नाम पर राशि लेने, बुकिंग करने, बिक्री कर ठगी करने का नायाब उदाहरण है।
IAS गौरव बैनल ने जांच में यह पाया-
आईएएस बैनल ने जांच में पाया कि मुख्य भूमिका विकासकर्ता संजय अग्रवाल और जेएसएम देवकान व मिलती-जुलती कंपनी/फर्म के प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से मालिक आशीष दास व पुष्पेंद्र बढ़ेरा द्वारा निभाई गई। आशीष दास के हिस्से की 9.30 एकड़ जमीन के सभी भूखंडों पर अग्रवाल के सहमतिकर्ता के रूप में हस्ताक्षर हैं।
यह बताते हैं कि दास और अग्रवाल द्वारा विवादित जमीन पर प्लॉट बुकिंग आपस में मिलकर की गई। शिकायतों का निराकरण नहीं कर आपस में एक-दूसरे पर आरोप लगाए। ना प्लॉट दिए और ना ही राशि लौटाई। आईएएस ने अनुशंसा की कि इसमें सक्षम अधिकारी के पास आवेदन होना चाहिए। इन्हें प्लॉट या फिर बाजार मूल्य से राशि वापस मिलना चाहिए।
आईएएस ने इन सभी की भूमिका की जांच की
फरियादी रमेश रिझवानी, पंकज रिझवानी, राजेश रामरखिया, विशाल मित्तल, सुमित राजपाल, मुकेश मेहता, संजय माहेशवरी, अभय झंवर, रोहित सूद, जितेंद्र ने प्रशासन को शिकायत की थी। इसमें शिकायत आशीष दास, पुष्पेंद्र बढ़ेरा, नीना पति संजय अग्रवाल, रितू पति मनोज अग्रवाल, संजय अग्रवाल, गिरीश वाधवानी, गुरनाम सिंह धालीवाल, रविंद्र माटा, नवीन माटा, दीपक माटा के खिलाफ हुई थी।
यह छह कंपनियां एक जैसे नाम की, डायरेक्टर ये
जांच में पाया गया कि छह कंपनियां एक जैसे मिलते-जुलते नाम की बनाई गई और इसके जरिए इन सभी ने आपस में मिलकर फर्जीवाड़ा किया।
- जेएसएम देवकान प्रालि- डायरेक्टर आशीष दास, पुष्पेंद्र बढ़ेरा
- जेएसएम इंडिया देवकान प्रालि- डायरेक्टर वीरेंद्र शर्मा, कपिल अग्रवाल, दास और बढ़ेरा
- मेसर्स श्री जेएसएम देवकान पूर्व नाम सिमन कंस्ट्रक्शन- डायरेक्टर संदीप अग्रवाल, संदीप गुप्ता, राजेश मोटलानी इसके बाद डायरेक्टर बने हरप्रीत सिंह टूटेजा, गुरनाम सिंह धालीवाल
- मेसर्स श्री जेएसएम देवकान इंडिया पूर्व नाम सिमन इन्फ्रास्ट्रक्चर- संदीप अग्रवाल, संदीप गुप्ता व राजेश मोटलानी, बाद में डायरेक्टर हुए हरप्रती सिंह टूटेजा व गुरनाम सिंह धालीवाल
- मेसर्स जेएसएम देवकान- डायरेक्टर दास और गिरीश वाधवानी
- मेसर्स जेएसएम देवकान इंडिया- डायरेक्टर दास और वाधवानी
इनके द्वारा शिकायतकर्ताओं से ली गई बुकिंग की राशि
रिपोर्ट में है कि शिकायतकर्ताओं से मिले दस्तावेज, बयान के अनुसार प्लॉट बुकिंग की राशि मेसर्स जेएसएम देवकान के डायरेक्टर दास और गिरीश वाधवानी, जेएसएम देवकान प्रालि के दलाल संजय खंडेलवाल और डायरेक्टर दास व बढ़ेरा, मेसर्स जेएसएम देवकान पूर्व नाम सिमन कंस्ट्रक्शन के संदीप अग्रवाल, संदीप गुप्ता, राजेश मोटलानी व वर्तमान डायरेक्टर हरप्रीत टूटेजा, धालीवाल ने ली। साथ ही जेएसएम देवकान इंडिया प्रालि के डायरेक्टर वीरेंद्र शर्मा, कपिल अग्रवाल, बढ़ेरा, दास ने ली।
बीजेपी नेता कुमावत के जरिए हुआ सौदा
विस्तृत जांच रिपोर्ट में है कि अग्रवाल परिवार के पास निपानिया के सर्वे नंबर 260/1, 261/1, 261/2, 264/1 की 22 एकड़ जमीन है। संजय अग्रवाल, नीना, रितू ने इसकी निगम से फरवरी 2015 में विकास मंजूरी ली। वहीं अग्रवाल ने जमीन का सौदा बीजेपी नेता नानूराम कुमावत के जरिए आशीष दास और बढ़ेरा से किया।
दास ने अगस्त 2014 में एक करोड़ रुपए जेएसएम देवकान प्रालि से दिए लेकिन बाद में कहा कि जमीन मेसर्स श्री जेएसएम देवकान (सिमन कंस्ट्रक्शन) और मेसर्स श्री जेएसएम देवकान इंडिया (सिमन इन्फ्रास्ट्रक्चर) के नाम कर दो। इसके बाद जून 2015 में चार एकड़ जमीन देवकान और 5.30 एकड़ जमीन अक्टूबर 2015 में देवकान इंडिया के नाम कर दी।
बाद में दास और बढ़ेरा को अग्रवाल ने अलग कर दिया। अग्रवाल का कहना है कि बाद में दास और बढ़ेरा ने उन्हें बेची गई 9 एकड़ से अलग जमीन पर भी प्लॉट काटकर दूसरों को बेच दिए। यह सौदे विक्की जेठवानी, प्रतीम माटा व अन्य को भी हुए।
पुलिस की एफआईआर में यह लिखा
निपानिया की जमीन पर संजय अग्रवाल ने टीएंडसीपी, विकास मंजूरी सभी ली। प्लॉट भी काटे। विकास डेवलपर के रूप में चर्चित जेएसएम देवकान इंडिया व मेसर्स जेएसएम देवकान को 9.30 एकड़ जमीन बेचना बताया। लेकिन इसके पहले ही वह इस पर प्लॉट बेच चुके थे।
सभी को बताया कि चर्चित ब्रांड जेएसएम के आशीष दास इसे डेवलप करेंगे, लेकिन उन्हें बाद में अलग कर दिया। जेएसएम के नाम से धोखा देने के लिए संजय अग्रवाल व गुरनाम सिंह धालीवाल ने सिमन कंस्ट्रक्शन का नाम जेएसएम देवकान और सिमन इन्फ्रास्ट्रक्चर का नाम जेएसएम देवकान इंडिया बताया। धालीवाल इसमें भागीदार थे।
अग्रवाल ने 9.30 एकड़ जमीन जिन पर पहले ही प्लॉट काटकर बेचे जा चुके थे, इसे कृषि भूमि बताकर जेएसएम फर्म को जून व अक्टूबर 2015 में बेच दी। साथ ही निगम में बंधक रखे गए प्लॉट भी बेचे गए। इसके बदले में करोड़ों रुपए लिए गए। विक्की जेठवानी, प्रीतम माटा व उनके परिवार को भी प्लॉट बेचे गए।
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