इंदौर पुलिस की पिटाई, दो दिन बाद अज्ञात पर FIR, हमला करने वाले मोहसिन खान का ही नाम गायब

Sanjay Gupta | Jun 24, 2026, 13:17 IST
इंदौर पुलिस की पिटाई, दो दिन बाद अज्ञात पर FIR
इंदौर पुलिस को रविवार रात को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया। भूमाफिया के गुंडों ने नशे की हालत में पुलिस बल पर ही हमला कर दिया। इसमें दो पुलिसवालों का सिर फूट गया। द सूत्र के खुलासे के बाद पुलिस जागी और दो दिन से दबे मामले में 23 जून रात 11.30 बजे केस दर्ज किया।

भूमाफिया के गुंडों से इंदौर पुलिस पिट रही है!

इंदौर में पुलिस के साथ मारपीट का मामला सामने आया है। आरोप है कि भूमाफिया से जुड़े लोगों ने पुलिसकर्मियों पर हमला किया, लेकिन शुरुआत में मामला दबा दिया गया। जब द सूत्र ने कनाडिया थाना क्षेत्र की भूरी टेकरी में रविवार रात हुई इस घटना का खुलासा किया, तब जाकर अधिकारियों को इसकी जानकारी मिली। इसके बाद सीपी संतोष सिंह ने कनाडिया टीआई सहर्ष यादव को तलब कर फटकार लगाई और तुरंत केस दर्ज करने के निर्देश दिए।



इसके बाद 23 जून की रात करीब 11:30 बजे मामला दर्ज किया गया, लेकिन इसमें भी किसी का नाम नहीं लिखा गया और अज्ञात लोगों के खिलाफ ही केस बनाया गया।



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पुलिस पर हमला और केस अज्ञात पर..?

एफआईआर में अज्ञात लोगों के खिलाफ बीएनएस की धारा 121(1), 125, 132, 296(ए) और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया गया है। ये सभी धाराएं सरकारी काम में बाधा डालने और सरकारी कर्मचारियों पर हमला करने से जुड़ी हैं।



एफआईआर के मुताबिक, 22 जून की रात करीब 12:45 बजे (रविवार-सोमवार की दरमियानी रात) डायमंड कॉलोनी के लोगों और संयम इन्फ्रा कंपनी से जुड़े लोगों के बीच विवाद हुआ था।



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जिस मोहसिन खान ने मारा, उसे भी छोड़ा

एफआईआर में मोहसिन खान का कहीं भी नाम नहीं है, जबकि आरोप है कि उसी ने अपने साथियों के साथ मिलकर पुलिस पर हमला किया था।



एफआईआर के अनुसार डायमंड कॉलोनी और संयम इन्फ्रा कंपनी से जुड़े लोगों के बीच झगड़ा चल रहा था। सूचना मिलने पर विजय सिकरवार और आशीष शर्मा मौके पर पहुंचे। वहां दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ा हुआ था। इसी दौरान करीब 8 से 10 लोगों ने पत्थरबाजी शुरू कर दी और किसी ने आशीष शर्मा के सिर पर डंडा भी मार दिया।



इसके बाद दोनों घायल पुलिसकर्मियों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। एफआईआर में बताया गया है कि अज्ञात 8-10 लोगों ने सरकारी काम में बाधा डाली और हमला किया। पुलिस का कहना है कि वे अभी हमलावरों को पहचान नहीं पाए हैं, लेकिन बाद में पहचान होने पर कार्रवाई की जाएगी।



क्यों दबाया गया मामला

दरअसल, यह पूरा खेल 500 करोड़ की जमीन डायमंड गृह निर्माण सोसायटी की डायमंड कालोनी का है। इसमें कुछ हिस्सा संयम इन्फ्रा ने लिया है तो कुछ और की बंदरबाट हो चुकी है। मामला कोर्ट में है।



अन्य लोगों को जमीन पर आने से रोकने के लिए जमीन खरीदने वाले भूमाफिया ने मोहसिन खान नाम के गुंडे को रखा हुआ है। कनाडिया थाने से इसकी सांठगांठ के भी आरोप हैं। जब रात को विवाद हुआ तो मोहसिन ने साथियों के साथ नशे की हालत में पुलिस को पीट दिया।



मामला टीआई सहर्ष यादव तक पहुंचा, लेकिन आरोप है कि सांठगांठ और उच्च स्तर की पहुंच के चलते मामले को दबा दिया गया। पिटने वाले पुलिसकर्मियों को भी समझा दिया गया।



हालांकि जब द सूत्र ने 23 जून को इस पूरे मामले का खुलासा किया, तब मामला सीपी संतोष सिंह तक पहुंचा। इसके बाद उन्होंने टीआई को तलब कर जानकारी ली और तुरंत केस दर्ज करने के निर्देश दिए।



टीआई बोलते रहे पुलिस का कुछ नहीं है

23 जून को जब द सूत्र ने टीआई सहर्ष यादव से इस मामले पर बात की थी, तो उन्होंने इसे सिर्फ दो पक्षों का आपसी विवाद बताया था। उनका कहना था कि इसमें पुलिस की कोई भूमिका नहीं है और न ही पुलिस पर कोई हमला हुआ है। उन्होंने यह भी कहा था कि दोनों पक्षों के बीच समझौता हो चुका है।



लेकिन अब जो एफआईआर दर्ज हुई है, उसने इस पूरे मामले की अलग तस्वीर सामने रख दी है और टीआई पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि अभी पूरी सच्चाई सामने नहीं आई है, क्योंकि एफआईआर में कंपनी का नाम साफ तौर पर नहीं लिखा गया है। ऐसे में आरोप लग रहे हैं कि भूमाफियाओं और उनके साथ जुड़े लोगों को बचाने की कोशिश की गई है।



संयम इन्फ्रा के डायरेक्टर पर कई केस

दरअसल, मारपीट करने वाला मोहसिन जिस संयम इन्फ्रा कंपनी से जुड़ा बताया जा रहा है, उस कंपनी का नाम पहले भी कई विवादों से जुड़ चुका है। जब रिकॉर्ड की जांच की गई तो सामने आया कि संयम इन्फ्रा कंपनी में प्रतीक संघवी, दिलीप सिसौदिया (दीपक मद्दा) और जयश्री संघवी डायरेक्टर के तौर पर दर्ज हैं।



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बता दें कि भू-माफिया अभियान के दौरान, जब इंदौर में तत्कालीन कलेक्टर आईएएस मनीष सिंह के समय कार्रवाई चल रही थी, तब दीपक मद्दा पर अलग-अलग थानों में करीब आधा दर्जन एफआईआर दर्ज हुई थीं। इसमें संघवी का नाम भी आरोपी के रूप में सामने आया था।



इसके अलावा आरोप है कि इन्होंने अयोध्यापुरी में सिम्पलेक्स कंपनी के नाम से सोसायटी की जमीन भी खरीदी थी। वहीं, दीपक मद्दा पर खजराना थाने में गृह विभाग का गलत लेटर देने और कल्पतरू सोसायटी में घोटाले जैसे गंभीर मामलों में भी केस दर्ज हो चुके हैं।



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